Hepatitis Report: भारत हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में विश्व में दूसरे स्थान पर, कितना बड़ा है खतरा?
Hepatitis Report: हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यू एच ओ) ने अपनी '2024 विश्व हेपेटाइटिस रिपोर्ट' जारी की। रिपोर्ट में डबल्यूएचओ ने कई चौंका देने वाले और गंभीर खुलासे किए हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि दुनिया के 187 देशों में वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या 2019 में 1.1 मिलियन से बढ़कर 2022 में 1.3 मिलियन हो गई है।
इनमें से 83% मौतें हेपेटाइटिस बी के कारण और 17% मौतें हेपेटाइटिस सी के कारण हुईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022 में हेपिटाइटिस के 2.2 मिलियन नए इन्फेक्शन हुए, जो 2019 के 2.5 मिलियन मामलों से कम है।

यह तो हुई विश्व की बात, लेकिन हेपेटाइटिस भारत में भी बहुत गंभीर समस्या बना हुआ है और भारत, चीन के बाद दूसरा देश है, जहां पर हेपेटाइटिस बी और सी के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं भारत में हेपेटाइटिस के बारे में।
वर्ल्ड हेपेटाइटिस रिपोर्ट
डबल्यूएचओ की '2024 वैश्व हेपेटाइटिस रिपोर्ट' के अनुसार, 2022 में भारत में वायरल हेपेटाइटिस के 3.5 करोड़ से अधिक मामले थे, जो उस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल हेपेटाइटिस के मामलों का 11.6% था। रिपोर्ट के अनुसार भारत, जो वायरल हेपेटाइटिस के मामलों में चीन के बाद दूसरे स्थान पर था, ने 2022 में हेपेटाइटिस बी के 2.98 करोड़ मामले दर्ज किए, जबकि हेपेटाइटिस सी इन्फेक्शन की संख्या 55 लाख थी।
हेपेटाइटिस दूसरा ऐसा इन्फेक्शन है जिसके कारण विश्व भर में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, प्रति वर्ष लगभग 1.3 मिलियन मौतें। पहले स्थान पर ट्यूबरक्लोसिस है। हेपेटाइटिस से होने वाली कुल मौतों में से हेपेटाइटिस बी और सी के कारण 96% मौतें होती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विश्व भर में हेपेटाइटिस बी और सी इन्फेक्शन के कारण हर दिन 3,500 लोग मर रहे हैं।
क्या है हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस लिवर में सूजन है, जो वायरल इन्फेक्शन, शराब के सेवन, किसी बीमारी, किसी खास दवाई समेत विभिन्न कारणों की वजह से हो सकती है। हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है, हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, और इ, लेकिन इनमें से सबसे आम हेपेटाइटिस ए, बी और सी है।
हेपेटाइटिस ए शॉर्ट टर्म डिजीज है, जो खराब या पुराने खाने या फिर पानी से हो सकता है। हेपेटाइटिस बी अक्सर इन्फेक्टेड ब्लड, सुई, सिरिंज या फिर किसी अन्य व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड के संपर्क में आने से फैलता है, और इसकी वजह से लॉन्ग टर्म लिवर डैमेज और लीवर कैंसर भी हो सकता है।
हेपेटाइटिस सी इन्फेक्टेड ब्लड की वजह से या बच्चों को जन्म देने के दौरान मां से नवजात शिशु में फैलता है। हेपेटाइटिस डी केवल हेपेटाइटिस बी से इन्फेक्टेड लोगों को ही शिकार बनाता है और ड्यूल इन्फेक्शन, और ज्यादा गंभीर इन्फेक्शन और खराब स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस इ मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और साउथ अमेरिका में पाया जाता है और ज्यादातर गंदगी वाले क्षेत्रों में फैलता है।
भारत में हेपेटाइटिस
भारत में हेपेटाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता है। आपको बता दें कि भारत में हेपेटाइटिस के सबसे ज्यादा मामले हेपेटाइटिस बी और सी के हैं। 2019 में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 40 मिलियन लोग हेपेटाइटिस बी से पीड़ित थे। देश की आम आबादी में हेपेटाइटिस बी सर्फेस एंटीजन (HBsAg) का फैलाव 1.1% से 12.2% तक है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश की आम आबादी में लगभग 6-12 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से इन्फेक्टेड हैं। 2019 की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हेपेटाइटिस के 10-30% और लीवर फेलियर के 5-15% मामलों के लिए हेपिटाइटिस ए जिम्मेदार है। गौर करने वाली बात तो यह है कि हेपेटाइटिस ए और इ देश में वायरल हेपिटाइटिस और लिवर फैलियर के लिए जिम्मेदार है।
भारत सरकार ने उठाए क्या कदम
भारत सरकार ने नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) को लागू करके हेपेटाइटिस से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस पहल का मकसद 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करना और सिरोसिस और लीवर कैंसर सहित हेपेटाइटिस बी और सी के बढ़ते बोझ को कम करना है।
एनवीएचसीपी वैक्सीनेशन और उपचार सहायता के साथ वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, पता लगाने और उपचार पर ध्यान लगाता है। इसके अलावा, भारत सरकार ने वायरल हेपेटाइटिस से निपटने के लिए नेशनल एक्शन प्लान (एनएपी) शुरू किया है, जो एनवीएचसीपी का ही हिस्सा है। इन कदमों की मदद से भारत 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स 3.3' की ओर कदम बढ़ा रहा है और 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है।
भारत हेपिटाइटिस में दूसरे स्थान पर क्यों
भारत में हेपेटाइटिस के मामले बहुत ज़्यादा हैं और इसके पीछे कई वजहें हैं, जैसे खराब डायग्नोसिस और इलाज सुविधाएं, हेपेटाइटिस रिस्पॉन्स के लिए अपर्याप्त धन, बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी, कम वैक्सीनेशन दर, इंजेक्शन का बार-बार इस्तेमाल, इंफेक्टेड ब्लड, इलाज और वैक्सीनेशन को लागू करने में चुनौतियां।












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