Afghanistan Iran Clash: पानी के लिए लड़ रहे अफगानिस्तान और ईरान, क्या है हेलमंद नदी विवाद
हेलमंद नदी के पानी के बंटवारे को लेकर ईरान और अफगानिस्तान के बीच विवाद गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अब दोनों देश अब युद्ध के मुहाने पर आ चुके हैं।

Afghanistan Iran Clash: दुनिया के दो इस्लामिक मुल्क ईरान और अफगानिस्तान (तालिबान शासित) युद्ध की कगार पर खड़े हैं। दोनों देशों के बीच हेलमंद नदी के पानी को लेकर 27-28 मई को सीमाओं पर गोलीबारी हुई। तालिबानी शासन ने स्वीकार किया कि उनका एक शख्स मारा गया है। ईरान सरकार ने कहा कि इस दौरान उनका कोई सुरक्षाकर्मी हताहत नहीं हुआ। जबकि 'तेहरान टाइम्स' के मुताबिक तीन ईरानी सैनिक मारे गए थे। इस तरह 4 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई लोग घायल हैं।
अब सवाल पैदा होता है कि आखिर हेलमंद नदी को लेकर दोनों देशों के बीच कौन सा विवाद है? क्यों यह पड़ोसी मुल्क पानी को लेकर खून बहाने को तैयार हैं? कौन पानी रोक रहा है और किसे जरुरत है इसकी? चलिए आपको बताते हैं कि ईरान और अफगानिस्तान में पानी का झगड़ा क्यों है?
क्या है हेलमंद नदी का विवाद?
1,150 किलोमीटर लंबी हेलमंद नदी अफगानिस्तान की सबसे लंबी नदी है। पश्चिमी हिंदुकुश पर्वत शृंखला में काबुल के पास से इसका उद्गम होता है और रेगिस्तानी इलाकों से बहते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा में हामन झील में जाकर गिरती है। जो अफगानिस्तान-ईरान सीमा पर फैली हुई है।
हामन झील ताजे पानी की एक विशाल झील है। हेलमंद के पानी से भरी इस झील का दायरा 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। हालांकि अब यह बांधों, जलवायु परिवर्तन व अन्य मानवीय समस्याओं की वजह से सिकुड़ रही है। आपको बता दें कि एक जमाने में यह दुनिया के सबसे बड़े वेटलैंड (नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र) में से एक थी। जर्मन वेबसाइट DW की एक रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञ हामन झील सूखने के पीछे हेलमंद नदी पर बने नये बांधों और पानी पर नियंत्रण को जिम्मेदार मानते हैं।
ईरान और अफगानिस्तान दोनों देशों के लिए झील और नदी का पानी पर्यावरण तथा अर्थव्यवस्था दोनों में अहमियत रखता है। इस नदी का पानी दोनों देशों के लिए एक जीवंत स्रोत है, जो खेती, रोजगार और ईकोसिस्टम की बहाली में काम आता है। यही वजह है कि अफगानिस्तान और ईरान दशकों से पानी के बंटवारे को लेकर टकराते रहे हैं।
दोनों देश सूखे से जूझ रहे हैं
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक पिछले 30 सालों से ईरान में सूखा एक बड़ी समस्या बना हुआ है। पिछले एक दशक में स्थिति और बदतर हो गयी है। ईरान मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक 97 प्रतिशत देश का हिस्सा किसी-न-किसी स्तर के सूखे का सामना कर रहा है। जबकि दूसरी तरफ अफगानिस्तान 79 प्रतिशत सूखे की मार झेल रहा है। दोनों देश प्यास बुझाने से लेकर सिंचाई तक के लिए बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। यही कारण है इनकी हेलमंद नदी के पानी पर रार ठन गई है।
ईरान के राष्ट्रपति की चेतावनी
मई 2023 की शुरुआत में ही ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने तालिबान प्रशासन पर ईरान के पूर्वी क्षेत्रों में नदी के पानी के प्रवाह को रोकने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि यह 1973 की संधि का उल्लंघन है। इसे वह किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं करेंगे। इस बयान के बाद अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रान्तों के बीच सीमा चौकियों पर गोलीबारी की घटनाएं हुई थी।
ईरानी राष्ट्रपति ने किस संधि की दुहाई दी?
अफगानिस्तान से दो बड़ी नदियां पूर्व की दिशा में ईरान जाती हैं। हेलमंद (जिसे हीरमंद भी कहा जाता है) और हारी रूद नदी। फिलहाल हेलमंद नदी विवाद के केंद्र में है। साल 1973 में दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ था। इसके तहत अफगानिस्तान को 26 क्यूबिक मीटर पानी प्रति सेकंड या हर साल 850 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ईरान को साझा करना है। वहीं अगर दोनों देशों में पानी को लेकर मतभेद होता है तो राजनयिक चैनलों के माध्यम से उसे सुलझाया जायेगा। इसके अलावा यदि राजनयिक चैनल मामले को सुलझा नहीं पाते हैं तो आपसी रूप से चुने गये सलाहकार बोर्ड के जरिये मसले को सुलझाया जायेगा।
ताज्जुब की बात यह है कि ईरान ने कई मौकों पर अफगानिस्तान द्वारा नदी पर बांध बनाये जाने का विरोध तो किया है लेकिन इसी नदी के पानी को नियंत्रित करने के लिए उसने भी अपनी तरफ दर्जनों बांध बना लिए हैं। इसके बारे में ईरान ने कभी भी अफगानिस्तान को जानकारी तक नहीं दी।
किस बांध को लेकर उठा ताजा विवाद?
हेलमंद नदी पर वैसे तो दर्जनों बांध बने हुए हैं लेकिन 24 मार्च 2021 को अफगानिस्तान की अशरफ गनी की सरकार के समय कमाल खान बांध को खोला गया। इस बांध के बनने के बाद से ईरान की तरफ से शिकायत की गयी कि अफगानिस्तान उनके हिस्से का पानी रोक रहा है। इस बांध से अफगानिस्तान 9 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है। इसके जलाशय में 52 मिलियन क्यूबिक मीटर तक ताजा पानी जमा करने की क्षमता है।
क्या पानी सिर्फ एक बहाना है?
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दरअसल, ईरान और तालिबान शासित अफगानिस्तान के रिश्तों में कई पेचीदगियां हैं। नदी के अलावा दोनों देशों के बीच अवैध प्रवासियों का आवागमन सहित शिया-सुन्नी धार्मिक विवाद भी प्रमुख वजह हैं जिनसे दोनों सरकारें एक-दूसरे के खिलाफ रहती हैं। अफगानिस्तान मुस्लिम सुन्नी बहुल देश है जबकि ईरान में मुस्लिम शिया आबादी बहुसंख्यक है।












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