भारतीय टीनेजर्स को स्लो बना रही है उनकी फास्ट लाइफ
देश के टीनेजर्स की बात आती है, तो हर किसी के जेहन में एक ही तस्वीर सामने आती है, कूल, फुर्तीले, तेज़ और अलग सोच रखने वाली पर्सनालिटी! मगर अफसोस हम इस पर्सनालिटी को हमेशा सेहतमंद समझते रहे, और इनके स्वास्थ्य पर कभी ध्यान नहीं दिया। शायद यही कारण है कि देश की 80 फीसदी आबादी का स्वास्थ्य आज संकट में है। सच पूछिए तो इनकी फास्ट लाइफ ही इन्हें स्लो बना रही है।
भारत को युवाओं का देश कहा जाता रहा है। और देश के युवाओं के स्लो होने का एक मात्र कारण है उनका बिगड़ता स्वास्थ्य।
एक नजर आबादी पर
- 10 से 19 वर्ष आयुवर्ग के लड़के/लड़कियों की आबादी देश की कुल जनसंख्या की 1/5 है।
- 10 से 24 वर्ष के लोगों की कुल संख्या देश के आबादी की एक तिहाई है।
- यानी बिना किशोरों के बेहतर सेहत पर ध्यान दिए बेहतर देश की परिकल्पना करना बेईमानी होगी।
अब इनके स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातें
- टीनेजर्स में खान-पान और सेहत को लेकर कई तरह की भ्रातियां भी रहती हैं।
- टीनेजर्स को सबसे ज्यादा बीमारियां फास्ट फूड जैसे नूडल्स, बर्गर, आदि से लगती हैं।
- देश में युवाओं में 33 प्रतिशत बीमारियां गलत तथा अनियमित जीवन शैली की वजह से हैं।
- 60 फीसदी असामयिक मौतें भी इसी वर्ग में होती हैं।
- किशोरों के बीच तम्बाकू व शराब का सेवन तेजी से बढ़ रहा है।
- खराब खानपान शैली के साथ शारीरिक प्रताड़ना सबसे ज्यादा येही लोग झेलते हैं।
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के अनुसार 56 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से ग्रसित हैं।
- टीनेजर्स में प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है, इस कारण सुस्त रहते हैं और जल्दी बीमार पड़ते हैं।
और भी तथ्य पढ़ें स्लाइडर के साथ-

19 की उम्र से पहले शादी
19 वर्ष से कम उम्र की लगभग 40 प्रतिशत लड़कियां शादीशुदा हैं। और बाल विवाह और मातृ मृत्यु दर में सीधा संबंध है।

कुपोषण की शिकार लड़कियां
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक 15-19 साल की पचास फीसदी लड़कियां कुपोषण या अतिपोषण की शिकार हैं।

प्रसव के दौरान मौतें
देश में प्रति एक लाख पैदा होने वाले शिशुओं के दौरान 212 प्रसूताओं की मौत हो जाती है। इसमें किशोरियों की आबादी सबसे है।

मोटापे के शिकार टीनेजर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 2.4 प्रतिशत किशोरियां मोटापे की भी शिकार हैं।

टीनेज में प्रेगनेंसी
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार टीनेज में प्रेगनेंसी भारत में सबसे ज्यादा होती है। इस मामले में अमेरिका भी पीछे है।

क्या कर रही है सरकार
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें लड़कियों को अपनी सेहत को लेकर जानकारियां दी जा रही हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों पर
सभी उप-स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जन-स्वास्थ्य केन्द्रों में किशोरों के लिए अलग से सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इन केन्द्रों में 10 से 19 वर्ष के किशोर और किशोरियां अपनी बीमारियों और उपचारों के अलावा सेहत से जुड़े परामर्श के लिए भी संपर्क कर सकेंगे।

स्कूलों में हेल्थ अवेयरनेस
स्कूलों में किशोरों को अपने सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए अलग से अभियान चलाया जाएगा। स्कूली किशोरों को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह के अवार्ड और प्रमाण-पत्र देने जैसी योजनाएं शुरू की जा रही हैं।
नोट- इस लेख में कई तथ्य प्रदीप सुरीन द्वारा पीआईबी के लिये लिखे लेख से लिये गये हैं।












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