सबसे ज्यादा देशभक्त तो सोशल मीडिया पर दिखते हैं क्यों?
लखनऊ। जब से सोशल नेटवर्किंग साईट्स का जमाना आया है देशभक्ति करने से ज्यादा दिखाने की चीज हो गयी है .आप मेरी बात से असहमत हो सकते हैं पर जो मैंने देखा है वह आपने भी देखा होगा .मैंने क्या देखा है आइये वो आप भी महसूस कीजिये।
मैंने सबसे ज्यादा देशभक्ति देखी है इंटरनेट पर और कहाँ.. गूगल से डाउनलोड करके फेसबुक पर डाली गयी पिक्चर में मैंने देशभक्ति को देखा.. उसी फेसबुक के अपडेट में चार पंक्तियों में मैंने देशभक्ति देखी है।
देशभक्ति की नयी पहचान
चेहरे पर पोते हुए तिरंगे के रंग में, अख़बार में छपी फोटो में उस लड़की के तिरंगे दुप्पट्टे में, स्कूल और कॉलेज में होते एक दिन के कार्यक्रमों में, सरकारी कार्यालयों में बजते देशभक्ति के गानों में.. सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान की धुन पर मन या बेमन से खड़े होते लोगों में देशभक्ति को मैंने देखा है.. यही देशभक्ति की अब नयी पहचान है।
पर क्या बस इतना ही हमारा फ़र्ज़ है
आज़ादी को उनत्तर साल गुज़र गए..बदलाव की बयार में आज़ादी भी डिजिटल हो गयी है, वर्चुअली ज्यादा नज़र आती है और असल जिंदगी में कम। शायद इसलिए भी क्यूंकि असल जिंदगी में हमारे पास उतना वक़्त और धैर्य नहीं है अपने देश के गौरव के प्रतीकों के बारे में जानने का।
फेसबुक-ट्विटर पर सबसे ज्यादा देशभक्त
हाँ लेकिन फैशन की दृष्टि से देखें तो अब आज़ादी का जश्न मनाना भी ट्रेंड मैं है.. फेसबुक, ट्विटर पर अच्छे से अच्छे स्टेटस और फ़ोटो डालने की होड़ नज़र आती दिखती है. ऐसा इसलिए जिससे कम से एक दिन के लिए ही सही लेकिन लोग हमारे बारे में जान सकें कि हाँ हम भी देशभक्त हैं, वर्चुअल ही सही। आज़ादी का दिन अब छुट्टी के दिन में परिवर्तित होता जा रहा है।
कुर्बान हुई जिंदगियों का मोल समझिये
ऐसे मुझे बस आपसे इतना ही कहना कि ज़रूरी नहीं है कि आप स्वतंत्रता दिवस पर भाषण सुनकर और देश के इतिहास को दोहरा कर ही देशभक्ति दिखा सकते हैं, आप भले ही उस दिन को छुट्टी की तरह मनाइये लेकिन इस दिन के लिए गयी कुर्बान हुई जिंदगियों का मोल तो समझना ही होगा। आप चाहें तो एक दिन में सारी देशभक्ति न दिखाकर छोटे छोटे कामों से इस देशभक्ति की लौ को जलाये रख सकते हैं।
देश को गंदा होने से बचाये
मसलन, भारत इतने सालों के बाद भी गंदगी से जूझ रहा है. सड़कें, दीवारें, सरकारी कार्यालय आदि आज भी सफाई के लिए तरसते हैं, सड़कों और दीवारों पर पान थूकना, कार्यालयों में उचित सफाई न होना, तो इन्हें गन्दा न करने का प्रण करके भी आप देश को अपना योगदान दे सकते हैं। देश के लिए जान की कुर्बानी दे गए शहीदों के नाम कम से कम एक पेड़ लगाकर भी देशभक्ति दिखाई जा सकती है।
धर्म के नाम पर होते हैं दंगे
अंधविश्वास की आरी धीरे धीरे इस देश को नींव से खोखला कर रही है, रातों रात मंदिर मस्जिद बना और तोड़ दिए जाते हैं। धर्म के नाम पर दंगे फ़साद हो जाते हैं और इसमें हानि किसी और की नहीं केवल आम इंसान की ही होती है। देशभक्ति के जज़्बा ये भी हो सकता है कि कोई कितना भी धर्म के नाम पर उकसाये, हम नहीं भटकेंगे।
विरासत में मिली आज़ादी की सांसों के लिए काम करें
इसके अलावा भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में अपना योगदान देकर, गरीबों को शिक्षा दिलाने में मदद करके, सड़क पर पड़े किसी घायल को अस्पताल पहुंचा कर, देश के प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद न करके, विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति में अपना योगदान देकर, देश की राजनीति से जुड़कर भी देशभक्ति दिखाई जा सकती है।
आजादी का मोल चुकाइये
हो सकता है कि इस काम में आपको थोडा अधिक समय देना पड़े, थोड़ी अडचनें भी आयें आपके सामने लेकिन विरासत में मिली आज़ादी की सांसों के लिए इतना काम तो किया ही जा सकता है. है न.. ।













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