Ebola Guidelines: भारत में क्यों बढ़ा इबोला वायरस का खतरा? विदेशों से आने वाली फ्लाइट्स के लिए नई गाइडलाइंस

Ebola Guidelines In India: दुनिया अभी एक महामारी के दौर से ठीक से उबर भी नहीं पाई थी कि एक और जानलेवा इंटरनेशनल वायरस ने दस्तक दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' घोषित कर दी गई है।

इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए भारत सरकार का नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। भारत में इस वायरस का एक भी पैर न पड़ सके, इसके लिए डीजीसीए ने देश-विदेश की एयरलाइंस के लिए एक बेहद सख्त और नई गाइडलाइन (SOP) जारी कर दी है।

Ebola Guidelines In India

यह आदेश सीधे तौर पर उन सभी यात्रियों और विमानों पर लागू होगा, जो इबोला प्रभावित देशों से सीधे या फिर कनेक्टिंग फ्लाइट्स के जरिए भारत आ रहे हैं। सरकार किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहती, इसलिए एयरपोर्ट से लेकर फ्लाइट के अंदर तक के नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है। आइए समझते हैं कि अफ्रीका से आने वाले यात्रियों और विमानन कंपनियों के लिए अब क्या नए नियम तय किए गए हैं।

▶️ आखिर क्यों अचानक बढ़ा इबोला का खतरा? (What is Ebola Disease PHEIC Declaration)

अफ्रीका महाद्वीप के दो प्रमुख देशों-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला पैर पसार रहा है। इसी वजह से डब्ल्यूएचओ ने इसे 'इंटरनेशनल कंसर्न' यानी वैश्विक चिंता की जनस्वास्थ्य इमरजेंसी घोषित किया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के आकलन के मुताबिक, कांगो और युगांडा के अलावा उनके पड़ोसी देश जैसे साउथ सूडान से भी इस बीमारी के फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क है।

भारत की ओर से जारी इस नए सरकारी आदेश के मुताबिक, अब उन सभी एयरलाइंस को पूरी तरह जिम्मेदार बनाया गया है जो इन प्रभावित इलाकों से यात्रियों को लेकर भारत के किसी भी एयरपोर्ट पर पहुंचती हैं। सरकार का लक्ष्य साफ है कि वायरस से संक्रमित किसी भी संदिग्ध को एयरपोर्ट पर ही ट्रैक कर लिया जाए ताकि वह देश के भीतर दाखिल होकर आम आबादी में संक्रमण न फैला सके।

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▶️हर यात्री के लिए अब 'सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' हुआ जरूरी (Mandatory Self-Declaration Form (SDF) Rules)

अगर कोई भी मुसाफिर युगांडा, कांगो या साउथ सूडान से यात्रा शुरू करके या फिर वहां से ट्रांजिट (फ्लाइट बदलकर) होकर भारत आ रहा है, तो उसके लिए अब एक विशेष फॉर्म भरना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फॉर्म का नाम 'सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' (SDF) है। एयरलाइंस की यह कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वे भारत के रनवे पर फ्लाइट लैंड होने और यात्रियों के विमान से उतरने (De-boarding) से पहले ही यह फॉर्म हर हाल में भरवा लें और उसे कलेक्ट करें।

इस फॉर्म को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है।

🔷पार्ट 1 (पर्सनल जानकारी): इसमें यात्री को अपना नाम, फ्लाइट नंबर, सीट नंबर, पासपोर्ट नंबर, राष्ट्रीयता, उम्र और भारत आने की तारीख के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि उसने अपनी यात्रा कहां से शुरू की थी। साथ ही भारत का वैलिड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देना भी जरूरी है।

🔷पार्ट 2 (भारत का पता): यात्री को अगले 21 दिनों तक भारत में वह कहां ठहरने वाला है (चाहे घर हो, होटल हो या अस्पताल), उसकी पूरी सटीक जानकारी देनी होगी। विदेशी नागरिकों को अपने मूल देश का पता भी दर्ज करना होगा।

🔷पार्ट 3 (ट्रैवल और हेल्थ हिस्ट्री): इसमें साफ-साफ पूछा गया है कि क्या बीते 21 दिनों में आपने किसी प्रभावित देश की यात्रा की है? क्या आपके किसी पारिवारिक सदस्य ने किसी इबोला मरीज की देखभाल की है या आप किसी ऐसे अस्पताल गए थे जहां इबोला का इलाज चल रहा था? इसके अलावा, बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त, गले में खराश या शरीर पर चकत्ते (Rash) जैसे लक्षणों की हां या ना में घोषणा करनी होगी।

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▶️फ्लाइट के अंदर क्रू को करने होंगे ये बड़े ऐलान (Mandatory In-Flight Announcements for Passengers)

डीजीसीए ने निर्देश दिया है कि हवा में सफर के दौरान विमान के भीतर केबिन क्रू द्वारा बार-बार विशेष घोषणाएं की जाएंगी। इसका मकसद यात्रियों को डराना नहीं बल्कि जागरूक करना है। इन घोषणाओं में साफ कहा जाएगा कि अगर किसी भी यात्री को बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में तेज दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, शरीर पर दाने उठना या कहीं से ब्लीडिंग (खून बहना) होने जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो वह बिना छिपाए तुरंत फ्लाइट के क्रू मेंबर्स को इसकी जानकारी दें।

इसके अलावा, यात्रियों को यह भी याद दिलाया जाएगा कि विमान से उतरने के बाद उन्हें इमिग्रेशन और एयरपोर्ट पर बने हेल्थ काउंटर पर सीधे अपनी रिपोर्टिंग करनी है। अगर भारत पहुंचने के बाद 21 दिनों के भीतर भी इनमें से कोई लक्षण उभरता है, तो तुरंत तय किए गए सरकारी अस्पतालों से संपर्क करना होगा और एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर (APHO) को सूचना देनी होगी।

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▶️आसमान में अगर मिल जाए कोई संदिग्ध मरीज, तो क्या होगा (In-Flight Protocol for Suspected Ebola Cases)

सफर के दौरान यदि विमान के अंदर कोई यात्री बीमार पड़ जाता है और उसमें इबोला जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो पूरी फ्लाइट को खतरे में डालने के बजाय तुरंत एक सख्त 'कंटेनमेंट प्रोटोकॉल' लागू किया जाएगा। नए नियमों के तहत केबिन क्रू को इन 8 बातों का कड़ाई से पालन करना होगा:

🔷सिंगल केयरगिवर: बीमार यात्री की देखरेख के लिए पूरे स्टाफ के बजाय केवल एक ही केबिन क्रू मेंबर को जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि बाकी स्टाफ सुरक्षित रहे।

🔷सीट की अदला-बदली: संदिग्ध मरीज को तुरंत विमान के सबसे पिछले हिस्से (Rear End) में शिफ्ट कर दिया जाएगा ताकि दूसरे सह-यात्रियों से उसकी दूरी बनाई जा सके।

🔷खाली छोड़नी होंगी सीटें: मरीज के बैठने वाली जगह के आगे की तीन (3) रो (कतारें) और बगल की सीटों को पूरी तरह से खाली करवा दिया जाएगा।

🔷अलग वॉशरुम: उस बीमार यात्री के इस्तेमाल के लिए फ्लाइट का एक टॉयलेट रिजर्व कर दिया जाएगा, जिसमें कोई दूसरा पैसेंजर नहीं जा सकेगा।

🔷पीपीई किट की व्यवस्था: संक्रमित मरीज को तुरंत मास्क और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट दी जाएगी।

🔷पड़ोसियों को ट्रिपल-लेयर मास्क: बीमार मरीज के आगे, पीछे और बगल की तीन कतारों में बैठे सभी सह-यात्रियों को एयरलाइंस की तरफ से ट्रिपल-लेयर मास्क बांटे जाएंगे।

🔷डेटा शेयरिंग: लैंडिंग से पहले ही एयरपोर्ट हेल्थ टीम (APHO) को मरीज की सीट नंबर, उसके लक्षण, उसकी देखभाल करने वाले क्रू मेंबर का नाम और आसपास की 3 कतारों में बैठे लोगों की पूरी लिस्ट सौंपनी होगी ताकि उनकी 21 दिनों तक मॉनिटरिंग हो सके।

🔷कम्प्लीट सैनिटाइजेशन: जैसे ही विमान भारतीय सरजमीं पर उतरेगा, उसे तुरंत पूरी तरह से सैनिटाइज और डिसइंफेक्ट किया जाएगा।

▶️भारत लैंड होते ही कैसे होगी स्क्रीनिंग?( Arrival Protocol for Suspected Ebola Cases)

विमान जब भारतीय हवाई अड्डे पर लैंड करेगा, तो सामान्य दिनों की तरह यात्री सीधे बाहर नहीं निकल पाएंगे। एयरलाइंस को पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और एयरपोर्ट ऑपरेटर से तालमेल बिठाकर विमान को एक बिल्कुल अलग और सुरक्षित 'डेसिग्नेटेड बे' (अलग पार्किंग एरिया) में खड़ा करना होगा। इसके बाद 'सीक्वेंशियल डी-बोर्डिंग' यानी बारी-बारी से उतरने का नियम चलेगा। सबसे पहले उन यात्रियों को उतारा जाएगा जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं।

सबसे आखिर में संदिग्ध मरीज और उसकी देखभाल करने वाले फ्लाइट अटेंडेंट को बाहर निकाला जाएगा और रनवे पर ही सीधे मेडिकल हेल्थ टीम के हवाले कर दिया जाएगा। इसके साथ ही इमिग्रेशन काउंटर के पास एयरपोर्ट हेल्थ स्टाफ द्वारा सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी और उनके सेल्फ-डेकोरेशन फॉर्म को इकट्ठा किया जाएगा।

▶️इन एयरलाइंस पर रहेगा कड़ा पहरा, फ्लाइट में रखने होंगे ये खास सामान

डीजीसीए ने साफ किया है कि सभी विमानों में इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) के मानकों के अनुसार फर्स्ट-एड किट और 'यूनिवर्सल प्रिकॉशन किट' का होना अनिवार्य है। इसके अलावा, उड़ानों में ट्रिपल-लेयर मास्क, डिस्पोजेबल हैंड ग्लव्स, पीपीई किट्स, हैंड सैनिटाइजर और बायो-हजार्ड डिस्पोजल बैग्स का अतिरिक्त स्टॉक हर समय रिजर्व रखना होगा।

इन प्रमुख एयरलाइंस को किया गया है लिस्टेड:

डीजीसीए ने अपनी गाइडलाइन के एनेक्सचर-1 में उन सभी एयरलाइंस की सूची जारी की है जो कांगो और युगांडा से पैसेंजर्स को भारत लाती हैं।

कांगो रूट पर मुख्य रूप से इथियोपियन एयरलाइंस, केन्या एयरवेज, एयर तंजानिया, इजिप्टएयर, कतर एयरवेज, युगांडा एयरलाइंस, टर्किश एयरलाइंस, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और भारत की एयर इंडिया, इंडिगो और आकासा एयर शामिल हैं। वहीं, युगांडा से आने वाले रूट पर फ्लाईदुबई, एयर अरबिया, सलाम एयर, ड्रुक एयर, फ्लाइनास और केएलएम जैसी एयरलाइंस को भी इस सख्त घेरे में रखा गया है।

सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाली या लापरवाही बरतने वाली किसी भी एयरलाइन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सभी कंपनियों को तुरंत अपने फ्लाइट ऑपरेशंस और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ को ट्रेनिंग देने का निर्देश दिया गया है ताकि भारत को इबोला के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

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