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Illegal Fireworks: ‘हादसे होते रहे... लोग जिंदा जलते रहे’, अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में कब-कब हुए बड़े हादसे?

कहने के लिए तो यह भी एक बस हादसा ही है, लेकिन इस हादसे से कई बड़े सवाल भी जुड़े हैं। बीते 6 फरवरी को मध्यप्रदेश के हरदा में हुए सिलसिलेवार धमाकों से पूरा देश दहल उठा। मंगलवार को कुछ ही मिनटों में हुए धमाकों और आग की लपटों से घिरकर कम से कम 11 लोग लाशों के ढेर में बदल गए।

यह कोई पहला ऐसा हादसा नहीं है जो किसी पटाखा फैक्ट्री में हुआ है, ऐसी घटनाओं से हर साल अखबार के पन्ने रंगे हुए मिलते हैं। कानून के रखवालों ने बड़े हादसों से कोई सबक नहीं लिया, जिनमें अभी तक हजारों लोग जिंदा जल गए। यह जानना जरुरी है कि देश में इन अवैध पटाखा फैक्ट्रियों की वजह से कब-कब बड़े हादसे हुए और आखिर क्या है पटाखा फैक्ट्रियों के लिए नियम-कानून?

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अवैध पटाखा फैक्ट्रियों के कारण हुए कई बड़े हादसे

बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब जैसे कई राज्यों में समय-समय पर अवैध पटाखा फैक्ट्रियों की वजह से बड़े हादसे होते रहे हैं।

  • 15 सितंबर, 2005: तकरीबन दो दशक पहले बिहार के खुसरोपुर गांव में संचालित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। हकीम मियां नाम के एक शख्स ने अपने घर में ही अवैध पटाखा फैक्ट्री खोल रखी थी। 15 सितंबर को अचानक ही फैक्ट्री में विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि पास की दो अन्य फैक्ट्री भी चपेट में आ गई। कुछ ही देर में आसपास के कई घरों में आग लग गई। इस घटना में लगभग 35 लोगों की मौत हो गई थी।
  • 9 सितंबर, 2012: तमिलनाडु के शिवकासी की एक पटाखा फैक्ट्री में भी भयानक विस्फोट हुआ था। जिसकी वजह से फैक्ट्री में अलग रखा बारूद का ढेर भी चपेट में आ गया। कुछ ही मिनटों में पूरी फैक्ट्री जलकर खाक हो गई। इस भीषण विस्फोट में 54 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
  • 16 मई, 2023: पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के एगरा क्षेत्र में पटाखा बनाने की अवैध फैक्ट्री में भीषण विस्फोट होने से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों घायल हो गए थे। यह विस्फोट इतना जबरदस्त था कि जिस रिहायशी इमारत में अवैध फैक्ट्री थी, वह पूरी तरह से ढह गई। कुछ इसी तरह 27 अगस्त, 2023 को भी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के दत्तापुकुर थाना क्षेत्र में एक पटाखा फैक्ट्री में जबरदस्त ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में सात लोग मारे गए थे।
  • 17 अक्टूबर, 2023: तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के रंगापलयम और किचन्याकानपट्टी में दो अलग-अलग पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने से 11 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 अक्टूबर, 2023 को तमिलनाडु में अरियालुर जिले के विरागलुर में पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से 9 लोगों की जान चली गई और 5 घायल हो गए। इसी तरह 22 मार्च, 2023 में भी तमिलनाडु के कांचीपुरम में भी पटाखा बनाने वाले एक कारखाने में हुए विस्फोट से 9 कर्मचारियों की मौत हो गई और कम से कम 12 अन्य घायल हो गए थे।
  • 4 जुलाई, 2018: तेलंगाना के वारंगल में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद आग लग गई थी। आग के कारण फैक्ट्री के अंदर फंसे 10 मजदूरों की जलकर मौत हो गई थी। इस हादसे में सभी मृतकों के शव पूरी तरह से जलकर खाक हो गए थे । मरने वाले लोगों की पहचान तक करना मुश्किल हो गया था।
  • 4 सितंबर, 2019: पंजाब के बटाला में एक पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद आग लग गई। इस आग में 23 लोगों की जलकर मौत हो गई। साथ ही 27 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। बता दें कि गुरदासपुर के बटाला के एक आवासीय कॉलोनी में अवैध रूप से यह पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरी फैक्ट्री नष्ट हो गई।
  • 7 मई, 2022: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने के बाद आग ने तांडव मचा दिया। इस दर्दनाक हादसे में इस फैक्ट्री मालिक राहुल समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज करीब 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाकों की वजह से शवों के हिस्से 500 मीटर दूर तक बिखरे मिले थे।
  • 20 अप्रैल, 2023: गुजरात के अरवल्ली जिले में चल रही एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में चार मजदूर जिंदा जल गए थे। हालांकि, फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी के कारण कई मजदूरों को जिंदा बचा लिया गया था। इस हादसे में आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पांच किलोमीटर दूर से ही धुआं दिखाई दे रहा था।
  • 6 फरवरी, 2024: इस बार यह हादसा मध्य प्रदेश के हरदा में चल रही अवैध फैक्ट्री में विस्फोट के कारण हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इस हादसे में 11 लोग मारे गए, जबकि 174 से ज्यादा लोग घायल हैं। हादसे की जद में 60 से ज्यादा घर आए हैं। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि 40 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। ब्लास्ट के वक्त अवैध पटाखा फैक्ट्री में 15 टन विस्फोटक रखा था।

हालांकि, हादसे के बाद फैक्ट्री के मालिक राजेश अग्रवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। राज्य सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दिए और मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख और घायलों को 2-2 लाख का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसी बीच एक और खबर सामने आयी कि पटाखा फैक्ट्री को कुछ समय पहले अपर कलेक्टर ने सील कर दिया था। बावजूद नियमों की अनदेखी कर प्रशासन के नाक के नीचे इसका संचालन हो रहा था।

एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में तकरीबन 60 पटाखा फैक्ट्रियों में आग लगी थी, जिनमें 66 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। साल 2021 में भी 64 ऐसे ही हादसे हुए और इसमें 96 लोगों की मौत हुई। साल 2020 में 9 पटाखा फैक्ट्रियों में आग लग गई और हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। साल 2019 में 33 लोग, और साल 2018 में 71 लोग ऐसे ही हादसों में मारे गए।

पटाखा फैक्ट्री के लिए क्या नियम है?

पटाखा फैक्ट्री को संचालित करने के लिए कई तरह के नियमों का पालन जरूरी है। सबसे पहले फैक्ट्री के लिए कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। जमीन के आस-पास कोई रिहायशी इलाका नहीं होना चाहिए। साथ ही जिस स्थान पर पटाखा फैक्ट्री लगनी है, उसके आगे या पीछे 100 मीटर तक कुछ नहीं होना चाहिए।

पटाखा फैक्ट्री में काम करने वाले फोरमैन के पास एक्सप्लोसिव विभाग का लाइसेंस होना चाहिए। फायर डिपार्टमेंट और संबंधित थाने से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के बाद ही फैक्ट्री संचालित होती है। वहीं जिन कमरों में पटाखे पैक किए जाते हैं। उस कमरे से दूसरे कमरे के बीच की दूरी कम से कम तीन मीटर से 9 मीटर तक होनी चाहिए और वहां पर बिजली की तारों, गैस सिलेंडर यहां तक कि मोबाइल लेकर जाना मना होता है। पटाखे बनाने वाले कारीगरों का मेडिकल करवाना भी जरूरी है। इन सब नियमों के पालन के बाद ही पटाखा फैक्ट्री को संचालित किया जा सकता है।

अवैध पटाखा बनाने के खिलाफ देश में कानून बहुत कड़ा है। एक्सप्लोसिव एक्ट 1884 की धारा 9बी के मुताबिक अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाने पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। किसी बड़ी घटना होने पर और भी कई धाराएं लागू हो सकती हैं।

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