Salman Rushdie: जामा मस्जिद के शाही इमाम ने किया था सलमान रुश्दी की हत्या के फतवे का समर्थन
Salman Rushdie: अपनी पुस्तक सैटेनिक वर्सेज के साथ विवादों में आए अंग्रेजी लेखक सलमान रुश्दी ने अपनी इस किताब में कथित तौर पर कुरान की आयतों के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी थी। जिसके चलते दुनियाभर के कई इस्लामिक देश भड़क गये थे। इनका पूरा नाम अहमद सलमान रुश्दी है और जन्म 19 जून 1947 को मुंबई में हुआ। वह एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुए लेकिन खुद को नास्तिक बताते थे। 1981 के प्रकाशित अपने उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रन के लिए उन्हें उसे साल प्रतिष्ठित 'बुकर प्राइज' से सम्मानित किया गया। आपको बता दें कि उन्होंने कुछ समय के लिए एक अभिनेता के रूप में भी काम किया। बाद में वह विज्ञापन के क्षेत्र में आए और कॉपीराइटर के रूप में काम किया।
साल 1988 में उन्होंने एक और किताब लिखी जिसका नाम सैटेनिक वर्सेज था। इस किताब से वह दुनियाभर में और अधिक चर्चित हो गये। दरअसल, इस किताब में पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी कुछ बातों को लेकर मुस्लिम देशों ने आपत्ति थी। जिसके चलते उन्हें न सिर्फ नकारात्मक प्रतिक्रियाएं झेलनी पड़ी बल्कि कई देशों ने इस किताब पर प्रतिबंध भी लगा दिया। इन इस्लामिक मुल्कों को सबसे ज्यादा आपत्ति दो वैश्या किरदारों को लेकर थी। क्योंकि इन दोनों किरदारों का नाम पैगंबर मोहम्मद की दो बीबियों के नाम पर था।

ईरान ने जारी किया था फतवा
सैटेनिक वर्सेज को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने रुश्दी के खिलाफ मौत का फतवा जारी किया था। खुमैनी के फतवे के बाद दुनिया में राजनैतिक और कूटनीतिक संकट पैदा हो गया। प्रकाशन के बाद हुए विरोध- प्रदर्शनों में पूरी दुनिया में लगभग 59 लोग मारे गये। इसके बाद जान से मारे जाने की धमकियों की वजह से खुद सलमान रुश्दी 9 सालों तक छिपे रहे। जब सलमान रुश्दी से एक बार पूछा गया कि क्या वह धर्म में विश्वास करते है तो उन्होंने कहा यह मेरे लिए मिडनाइट चिल्ड्रेन के एक किरदार दादाजी की तरह है। सलमान रुश्दी ने कहा कि अगर मुझे इस उपन्यास के बारे में एक शब्द में कहना होगा तो मैं कहूंगा कि यह पूर्ण रूप से रूपांतरण के बारे में है। बदलाव के बारे में है। यह उस बदलाव के बारे में है जब दुनिया में किसी धर्म को लेकर नये विचार आते हैं।
जबकि अपनी मौत के मंडराते साये के बीच सलमान रुश्दी ने कहा था कि वह बहुत डरावना समय था और मुझे अपने साथ-साथ अपने परिवार के लिए डर लग रहा था। मेरा ध्यान बंटा हुआ था और कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं?
सबसे पहले राजीव गांधी ने लगाया था किताब पर बैन
हालात ऐसे हो गये थे कि ईरान और ब्रिटेन ने आपसी राजनयिक संबंध तक तोड़ लिए थे। दरअसल, पश्चिमी देशों में सलमान रुश्दी को समर्थन मिल रहा था। भारत दुनिया का पहला देश था जिसने इस उपन्यास को प्रतिबंधित किया। किताब प्रकाशन के एक महीने के भीतर ही भारत में प्रतिबंधित हो गई थी। तब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। रुश्दी के खिलाफ मुंबई में मुसलमानों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन पर पुलिस की कार्यवाही में 12 लोग मारे गये और 40 से अधिक घायल हुए थे। इसके बाद पाकिस्तान और कई अन्य इस्लामी देशों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। दक्षिण अफ्रीका में भी इस किताब पर प्रतिबंध लगा।
दिल्ली के शाही इमाम ने किया था ईरान का समर्थन
जब सलमान रुश्दी पर फतवा जारी हुआ तो दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्लाह बुखारी ने भी फतवे का समर्थन किया था और रूश्दी की हत्या के लिए लोगों को भड़काया। यही नहीं, उन्होंने तो इसके लिए ईनाम की घोषणा भी कर दी थी। हालांकि, इस दौरान दुनिया के कुछ मुसलमान नेता संयम बरतने की अपील कर रहे थे, जबकि अन्य ईरान के अयातुल्लाह के समर्थन में थे। सलमान ने मुसलमानों को आहत करने के लिए गहरी संवेदना जाहिर करते हुए माफी मांग ली थी। फिर भी अयातुल्लाह पर इसका कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने दोबारा सलमान रश्दी की हत्या का फतवा जारी कर दिया। यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि इस किताब का जापानी में अनुवाद करने वाले अनुवादक की भी हत्या हो चुकी है।
2022 में हुआ था जानलेवा हमला
इस किताब को लेकर आज भी चरमपंथी मुसलमानों में सलमान रश्दी के खिलाफ नाराजगी है। दरअसल, 2017 में ईरान में खुमैनी के उत्तराधिकारी अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक बयान में कहा था कि सलमान रश्दी की मौत का फतवा अभी भी प्रभावी है। जिसके बाद अगस्त 2022 में सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में चाकू से जानलेवा हमला हो गया। एक साहित्यिक कार्यक्रम में भाषण देने के लिए मंच की ओर जाते वक्त उनपर एक युवक ने जानलेवा हमला किया था। हमले में उनकी एक आंख और लिवर को नुकसान पहुंचा।
कुछ दिनों पहले मई 2023 में सलमान रश्दी अमेरिका में एक कार्यक्रम में नजर आये थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैं आप सब के बीच मौजूद हूं। मेरे साथ जिस तरह से हुआ था वहां से वापस नहीं आने की भी संभावना थी, लेकिन मैं आ गया। कार्यक्रम के दौरान पेन अमेरिका ने सलमान को पेन सेंटेनरी करेज अवार्ड से सम्मानित किया था।
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