इतिहास के पन्नों से- पनकी वाला सिद्ध हनुमान मंदिर

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) यूं तो आपको उत्तर भारत के सभी बड़े-छोटे शहरों में बजरंग बली के मंदिर मिल जाएंगे, पर इनमें से कुछ प्राचीन हैं। इनमें हनुमान जी के भक्त हर रोज बड़ी तादाद में आते हैं। मंगलवार को ये संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

प्राचीन मंदिर

कानपुर के करीब पनकी में भी हनुमान जी का मंदिर इसी श्रेणी में आता हैं। इसमें रोज बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।मान्यता है कि हनुमान जी का ये मंदिर बेहद प्राचीन है। इधर आने वाले सभी भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं।

सारे के भक्त

कानपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजशेखर मिश्र कहते हैं कि पनकी के हनुमान मंदिर में सिर्फ कानपुर के आसपास के ही भक्त नहीं आते। इधर तो सारे देश से भक्त पहुंचते हैं। इधर आने वाले सभी भक्तों की हनुमानजी मुरादें पूरी करते हैं।

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400 साल पुराना

कहने वाले कहते हैं कि ये मंदिर करीब 400 बरस पुराना है। इसकी स्थापना श्रीश्री1008 महंत परषोतम दास जी ने की थी। कहते हैं, कानपुर शहर की स्थापना से पहले पनकी का हनुमान मंदिर स्थापित हो चुका था। ये कहा जाता है कि महंत जी एक बार चित्रकूट से लौट रहे थे।

तब जिस स्थान पर पनकी का मंदिर है, वहां पर उन्हें एक इस तरह की चट्टान दिखी जिस पर बजरंग बलि को देखा जा सकता था। बस, उन्होंने तब ही उस स्थान पर मंदिर का निर्माण करने का फैसला किया। अगर आप कानपुर या उसके आसपास के रहने वाले हैं तो आप बेशक इस मंदिर में जाकर बजरंगबली का आशीर्वाद ले चुके होंगे।

जरूर करें दर्शन

अगर आप कानपुर जाएं तो पनकी के हनुमान मंदिर में जरूर जाएं। ये कानपुर शहर से कुछ ही दूरी पर है। आपको मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी वगैरह भी मिल जाती है। पनकी के हनुमान मंदर में यूं तो रोज मेला सा लगा रहता है, पर मंगलवार को इधर भीड़ अधिक हो जाती है। सारे भक्त राम और हनुमान का ही नाम जप रह होते हैं।

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