क्यों 'हाजी अली दरगाह' की मजार तक नहीं जाती महिलाएं?
नई दिल्ली। आज सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक जारी रखी है। कोर्ट ने दरगाह बोर्ड की मांग पर यह आदेश जारी किया है।
इस मामले में कोर्ट ने कहा कि हाजी अली दरगाह बोर्ड ने जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा है। इसलिए फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।
लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर 'हाजी अली दरगाह' की मजार तक महिलाओं को जाने से रोका क्यों जाता है, महिलाओं का कहना है कि जब ऊपरवाले ने महिला और पुरूष में अंतर नहीं किया तो फिर लोगों ने मजार तक महिलाओं के जाने पर बैन क्यों किया है।
आपको बता दें कि साल 2011 से पहले महिलाएं मजार तक जाती थीं लेकिन साल 2011 में ट्रस्टियों ने महिलाओं के अंदर जाने पर पाबंदी लगा दी। जिसे हटवाने का प्रयास तृप्ति देसाई कर रही हैं।
जबकि बीबीसी की खबर के मुताबिक इस्लामिक लोगों का मानना है कि महिलाओं का मजार तक जाना गलत है क्योंकि दरगाह के ट्रस्टी मुफ़्ती मंज़ूर ने बीबीसी से कहा कि यह शरीयत के ख़िलाफ़ है इसलिए महिलाओं को मजार तक नहीं जाने दिया जाता है।
महिलाओं को बेपर्दा होकर घर से बाहर निकलना भी गलत है। महिलाओं को इबादत करने से कोई नहीं रोक रहा है लेकिन महिलाओं को मजार तक जाना और उनका हाजी साहब की मजार को छूना गलत है इस कारण उन्हें रोका गया है।













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