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Haifa Day: हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह देवली, जिन्होंने तोपों का मुकाबला तलवार से कर युद्ध जीता था

23 सितंबर 1918 का दिन। प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था। एक तरफ तुर्की, ऑस्ट्रिया और जर्मनी की सेनाएं थी, जिनके पास आधुनिक तोप, बम, बंदूक टैंक व हथियार आदि थे। तो दूसरी ओर युद्ध के मैदान में अंग्रेजो की तरफ से लड़ रहे भारतीय सैनिक। उनके पास हथियारों के नाम पर सिर्फ तलवार और भाला था‌। भारत के इन घुड़सवार सैनिकों ने केवल तलवार और भाले के दम पर आधुनिक हथियारों से सुसज्जित दुश्मन सेना का न सिर्फ सामना किया बल्कि उन्हें परास्त कर युद्ध के मैदान से भागने को मजबूर कर दिया।

भारतीय सेना के मेजर दलपतसिंह देवली के नेतृत्व में सैनिकों को तोपों का मुकाबला तलवार से करते देख अंग्रेज दंग रह गए थे। उनकी वीरता की यह पराकाष्ठा देखकर तत्कालीन इजरायल सरकार ने उन्हें मरणोपरांत हाइफा हीरो के टाइटल एवं कई युद्ध पदक से सम्मानित किया। नई दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन में भी उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।

Haifa Day

ब्रिटिश सेना की तरफ से लड़े थे भारतीय
यह प्रथम विश्व युद्ध का वह समय था जब भारतीय जवानों ने तुर्की सेना के खिलाफ जंग लड़ते हुए इजरायल के हाइफा शहर को आजाद कराया था। इजरायल के हाइफा में ब्रिटिश सेना की मदद के लिए भारतीय सैनिकों को भेजा गया था। इसमें हैदराबाद, मैसूर और जोधपुर के सैनिक शामिल थे। इन्हें युद्धबंदियों की देखभाल के लिए काम पर लगाया गया। बाद में मैसूर और जोधपुर की घुड़सवार सैन्य टुकड़ियों को मिलाकर एक खास यूनिट तैयार की गई। जिसका काम हाइफा को आजाद करवाना था।

जोधपुर के मेजर दलपत सिंह ने भारतीय सैनिकों के दल का नेतृत्व किया और तुर्की सेना को पराजित कर केवल डेढ़ घंटे में हाइफा पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध में भारत के 44 सैनिक शहीद हुए थे। 26 वर्षीय मेजर दलपतसिंह की बहादुरी देखकर अंग्रेज सेनाधिकारी दंग रह गए थे। दुश्मन की गोलियों और बारूद से छलनी होने के बावजूद दलपतसिंह ने जीत सुनिश्चित करने के बाद ही सांसें छोड़ी।

हाइफा को चूंकि 23 सितंबर को ही आजाद कराया था और इसी दिन मेजर दलपत सिंह शहीद हुए थे। इसलिए इस दिन को हाइफा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं हाइफा को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाने पर मेजर दलपत सिंह को 'हीरो ऑफ हाइफा' के खिताब से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें विक्टोरिया क्रॉस मैडल व मिलिट्री क्रॉस से भी सम्मानित किया गया।

इजराइल की किताबों में है भारतीय सैनिकों की वीरता की कहानियां
हाइफा ने भारतीय सैनिकों के बलिदान को अमर करने के लिए साल 2012 में उनकी बहादुरी के किस्सों को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया। करीब 402 सालों तक तुर्कों की गुलामी में रहे शहर को आजाद कराने में भारतीय सेना की भूमिका को याद करते हुए नगर पालिका द्वारा हर साल एक समारोह आयोजित किया जाता है।

इजरायल की स्कूलों के कोर्स में भी यह युद्ध और हाइफा हीरो को शामिल किया गया है। वहीं हाइफा विजय के उपलक्ष्य में तत्कालीन वायसराय ने दिल्ली में वायसराय भवन के सामने युद्ध स्मारक का निर्माण करवाया। बाद में भारत सरकार ने इसे हाइफा चौक का नाम दिया। यह तीन मूर्ति भवन के सामने स्थित है।

राजस्थान सरकार ने किया हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह स्मृति बोर्ड का गठन
हाइफा की लड़ाई में राजपूताने की सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति मेजर दलपत सिंह ने किया था। हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह का जन्म 26 जनवरी 1892 को पाली जिले के देवली गांव में हुआ। उन्होंने 1910 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में शामिल होकर अपनी सेवाएं शुरू कीं। वर्तमान राजस्थान सरकार ने विभिन्न समाजों की साधने की कड़ी में हाइफा हीरो मेजर दलपत सिंह स्मृति बोर्ड का गठन किया है। बोर्ड का उद्देश्य रावणा राजपूत समेत चार जातियों को मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराना और इनके पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सुझाव देना है। यह बोर्ड "राजस्थान राज्य मेजर दलपत सिंह (हाइफा स्मृति) कल्याण बोर्ड" के नाम से जाना जाएगा।

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