Poverty in India: कैसे कम हुई भारत में बहुआयामी गरीबी, जानें उन योजनाओं के बारे में
How multidimensional poverty reduced in India, know about those schemes
Poverty in India: यूएनडीपी की बहुआयामी गरीबी की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2005-06 तक 64.5 करोड़ लोग गरीब थे, जो वर्ष 2019-21 तक मात्र 23 करोड़ ही रह गये। यानि इन 15 वर्षों में 41.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल गये। अर्थात भारत में गरीबी में रिकार्ड 64.34 प्रतिशत कमी आई है। दरअसल, हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने विश्व की बहुआयामी गरीबी पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें उसने भारत की प्रशंसा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने पिछले 15 वर्षों में अपना यहां गरीबों की संख्या में भारी कमी की है, जो दुनिया भर के सभी देशों में सबसे ज्यादा है।
क्या होती है बहुआयामी गरीबी
यूएनडीपी द्वारा दुनिया में गरीबी मापने का एक पैमाना होता है, यह दुनिया के सभी देशों के लिए एक समान होता है। जिसमें देश के बारे में अनेक बातों को शामिल कर गरीबी को मापा जाता है। इसे ही बहुआयामी गरीबी कहते हैं। इस पैमाने में देश में कुपोषण व बाल मृत्यु दर कितनी है, रसोई ईंधन कौन सा प्रयोग होता है, देश में स्वच्छता, पीने का पानी, बिजली उपलब्धता, मकानों की स्थिति, शिक्षा का स्तर आदि विषय शामिल होते हैं।

भारत में गरीबी की स्थिति
यूएनडीपी के अनुसार भारत में वर्ष 2005-06 में 64.5 करोड़ लोग गरीब थे, जो उस समय कुल जनसंख्या का करीब 55 प्रतिशत था। वहीं करीब दस वर्ष बाद यानि 2015-16 में भारत में गरीबों की संख्या घटकर 37 करोड़ (कुल संख्या का 27.7 प्रतिशत) रह गयी थी। इसके उपरांत 2019-21 तक यानि इस पांच साल (2015-16 से 2019-21 तक) के कालखंड में भारत ने अपनी गरीबी को बहुत तेजी के साथ कम किया है। जो घटती हुई 2019-21 में सिर्फ 23 करोड़ (कुल जनसंख्या का 16.4 प्रतिशत) ही रह गई।
यूएनडीपी ने गरीबों को मापने के कुछ मापदंडों के भी आंकड़े जारी किये हैं। जैसे वर्ष 2005-06 के दौरान भारत में बाल मृत्यु दर 4.2 प्रतिशत व कुपोषण 44.3 प्रतिशत था। जिसमें 2015-16 तक काफी गिरावट दर्ज हुई, जिसमें बाल मृत्यु दर 2.2 प्रतिशत तथा कुपोषण 21.1 प्रतिशत रह गया। इसके साथ-साथ 2019-21 तक इन आंकड़ों में और गिरावट देखी गई, जिसमें बाल मृत्यु दर 1.5 प्रतिशत, कुपोषण 11.8 प्रतिशत ही रह गया।
यानि कुल मिलाकर 2005-06 से 2019-21 के इस 15 वर्ष के कालखंड में भारत ने अपनी गरीबी में काफी गिरावट दर्ज की है। इन 15 वर्षों में भारत ने 41.5 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला अर्थात गरीबी में रिकार्ड 64.34 प्रतिशत कमी हुई।
क्यों कम हुई भारत में गरीबी?
भारत सरकार की अनेक ऐसी योजनाएं है, जो भारत की बहुआयामी गरीबी को दूर करने में सहायक सिद्ध हुई हैं। ये योजनाएं आज विश्व पटल पर विख्यात हो चुकी है। वर्तमान भारत सरकार का गरीबी उन्मूलन (बहुआयामी गरीबी के निर्धारक तत्वों) पर विशेष ध्यान रहा है, जिसके कारण ही भारत में बहुआयामी गरीबी में रिकार्ड गिरावट दर्ज हुई है।
उदाहरण के लिए अगर हम गरीबों को मकान उपलब्धता की बात करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण दोनों) से लगभग 3 करोड़ पक्के घर बनाए जा चुके हैं। यूएनडीपी के अनुसार वर्ष 2015-16 में भारत की 23.5 प्रतिशत जनसंख्या पक्के और सुविधाजनक घरों से वंचित थी, वहीं 2019-21 में 13.6 प्रतिशत लोगों के पास पक्के व सुविधाजनक मकान नहीं है।
भारत सरकार की दूसरी महत्वाकांक्षी योजना 'हर घर नल से जल' ने भी बहुआयामी गरीबी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूएनडीपी के अनुसार 2019-21 में मात्र 2.7 प्रतिशत जनसंख्या ही पेयजल से वंचित थी। इसके साथ-साथ स्वच्छता की बात करें तो पिछले 8-9 वर्षों में लगभग 11 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है। जिसके कारण स्वच्छता में भी काफी सुधार हुआ है। इसके अलावा 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (योजना के तहत मार्च 2023 तक 9.59 करोड़ गैस कनेक्शन और कुल गैस कनेक्शन 31.26 करोड़) से गरीबी को स्वच्छ रसोई ईंधन उपलब्ध हुआ है।
पोषण के संदर्भ में भी सरकार करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है। जिसके चलते गरीब लोगों के लिए भुखमरी की संभावनाएं शून्य हो चुकी हैं। आज देश के दूर-दराज के गांवों तक भी बिजली पहुंच चुकी है। उपरोक्त बातों के अध्ययन से ही यूएनडीपी ने भारत की प्रशंसा की है और दुनिया को संदेश भी दिया है कि बहुआयामी गरीबी को दूर करने के लिए दुनिया को भारत से सबक लेना चाहिए।
क्या है यूएनडीपी
यूएनडीपी यानि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, एक संगठन है जिसकी स्थापना 22 नंवबर 1965 में हुई थी और इसका मुख्यालय न्यूयार्क में स्थित है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य दुनिया के लगभग सभी देशों से गरीबी तथा असामनता को दूर करना है। यूएनडीपी सभी देशों के विकास के लिए उचित प्रयास करता है, जिसमें यूएनडीपी सभी देशों की नीतियों, उनके नेतृत्व कौशल और क्षमताओं का विकास आदि लक्ष्य की प्राप्ति हेतु आवश्यक सहायता भी प्रदान करता है। जिसमें यूएनडीपी गरीबी दूर करने, कानूनी शासन और संस्थानों के निर्माण तथा लोकतांत्रिक शासन के निर्माण में अपनी भागीदारी देता है, जिसके चलते लोगों के जीवन में उचित परिवर्तन लाया जा सके।
यूएनडीपी देश की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, रसोई ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, मकान, परिसंपत्तियां आदि का अध्ययन कर, उससे उस देश की गरीबी का निष्कर्ष निकालती है।
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