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Goods and Services Tax: मुख्यमंत्री रहते मोदी ने किया था GST का विरोध, अब है सरकारी कमाई का बड़ा जरिया

चाहे आप किसी रेस्टोरेंट में खाना खाये या अपने क्रेडिट कार्ड की पेमेंट करें, GST तो आपको देना ही पड़ेगा। अब यह एक ऐसा शब्द बन गया है जोकि हर कदम पर आपके साथ जुड़ चुका हैं।

Goods and Services Tax Source of Revenue for Government of India

Goods and Services Tax: मोदी सरकार ने 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया था। पर क्या आप जानते हैं कि GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) का वास्तविक आइडिया मोदी सरकार का नहीं था। बल्कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वे GST का विरोध भी कर चुके थे। दरअसल, GST जैसी एक व्यवस्था 1986 में उस समय की मौजूदा राजीव गांधी की सरकार के समय आया था। तब मोडीफाइड वैल्यू एडेड टैक्स यानी 'मॉड वैट' व्यवस्था लागू की गयी थी। इसका काम था अलग-अलग जगहों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को कम करना। उसके बाद से दर्जनों बार टैक्स की व्यवस्था में सुधार किया गया उसके बाद हमें मिला GST।

कैसा रहा साल 2022 का GST कलेक्शन

GST कब और कैसे शुरू हुआ उसकी जानकारी करने से पहले 2022 में GST से सरकार को कितनी कमाई हुई, उसके आंकड़ों पर नजर डालते हैं। अप्रैल में 167,540 करोड़ रूपये GST कलेक्शन रहा था। मई में GST का कलेक्शन140,885 करोड़ रूपये रहा। इसके बाद जून के महीने में GST कलेक्शन 144,616 करोड़ रूपये का रहा। वही जुलाई में 148,995 करोड़ रूपये का GST कलेक्शन हुआ। अगस्त में GST कलेक्शन 1.44 लाख करोड़ रुपये रहा। सितंबर में GST कलेक्शन 147,686 करोड़ रुपये रहा। अक्टूबर में कुल GST संग्रह 151,718 करोड़ रुपये हुआ। वही GST से सरकार को नवंबर महीने में 1.46 लाख करोड़ रुपये की कुल कमाई हुई।

स्कूली बच्चों से लेकर बड़े सब देते हैं GST

अब बात करते है आखिर GST से सरकार इतनी भारी आमदनी कहां से करती है? दरअसल, हमारी दिनचर्या में उपयोग होने वाले लगभग सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर GST लगता है। मतलब हम अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को टैक्स देते हैं। जैसे यदि आप शेविंग का ब्लेड खरीदते हैं तो आपको 18 प्रतिशत GST देना पड़ता है। इसके साथ ही बच्चों के इस्तेमाल की चीजें जैसे पेंसिल, शार्पनर तक पर 18 प्रतिशत GST लगता है।

लेदर का कोई सामान आप खरीदते हैं तो आपको 12 प्रतिशत GST देना पड़ता है। वहीं यदि आप घूमने के शौकीन हैं तो यदि आप एक हजार से ऊपर का कमरा बुक करते हैं तो आपको 12 प्रतिशत GST भरना ही पड़ेगा। आप सेनेटरी नेपकिन भी खरीदते हैं तो आपको 12 प्रतिशत GST देना अनिवार्य होगा। कुरियर से कोई सामान यदि आप मंगवाते हैं तो आपको 18 प्रतिशत GST भरना पड़ेगा। क्रेडिट कार्ड के खर्च को EMI में बदलना क्रेडिट कार्ड की सेवा का ही हिस्सा है और इसलिये इसके ब्याज पर 18 प्रतिशत की दर से GST लागू होती हैं।

इसके साथ ही सरकार ने कुछ कंपनियों को राहत भी दी हैं। इसमें 20 लाख से कम कमाई करने वाली कंपनियों को GST भरने की जरूरत नहीं होती। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह रकम 10 लाख रुपये निर्धारित है।

GST की शुरुआत कैसे हुई

केंद्र सरकार ने साल 2000 में एक समिति का गठन किया और उस समय के प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेई ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्तमंत्री असीम दासगुप्ता को इस समिति का अध्यक्ष बनाया। इस समिति का काम GST का ड्राफ्ट तैयार करना था। 2004 में समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। साल 2004 में वित्त मंत्रालय के सलाहकार रहे विजय एल केलकर ने देश हित में एक कर यानि एक टैक्स का सुझाव दिया। इसके दो साल बाद 2006 में बजट भाषण के दौरान वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने 2010 से GST को देश में लागू करने की घोषणा की लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के मतभेद के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था।

इसके बाद जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो GST लागू करने के प्रयासों में तेजी हो गयी। आखिरकार, 2016 में GST को राज्‍यसभा और फिर लोकसभा से अनुमति मिल गयी। GST को 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के रूप में अधिनियमित किया गया था। इसके बाद 12 अगस्त 2016 को असम GST विधेयक की पुष्टि करने वाला पहला राज्य बना। फिर बिहार और झारखंड GST को अपनाने वाले दूसरे और तीसरे राज्य बन बने। इसके साथ ही सरकार ने GST को देश में सही ढंग से लागू करने के लिए एक GST परिषद का गठन किया गया था जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री, और राज्‍यों के वित्‍त मंत्रियों को शामिल किया गया था।

मोदी कर चुके थे GST का विरोध

जी हां, आपको यह बात थोड़ी अटपटी लग रही होगी कि जिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल में GST लागू हुआ था वे एक समय में GST के विरोधी रहे थे। उनके साथ-साथ मुख्यमंत्री शिवराज चौहान भी इस कड़ी का हिस्सा थे। नरेंद्र मोदी ने एक भाषण के दौरान कहा था कि "GST का सवाल है तो गुजरात और बीजेपी का रवैया शुरू से ही साफ है, GST कभी सफल नहीं हो सकता।" हालांकि, जैसे ही नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता संभाली, GST को लेकर उनके विचार बदल गये। फरवरी 2014 के एक ट्वीट में मोदी ने कहा था, "GST पर मैंने ये साफ कह दिया है कि बीजेपी इसके खिलाफ नहीं है, लेकिन बिना अच्छे आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के GST को लागू करना मुश्किल होगा।"

कनाडा से आया है भारत में GST

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    कनाडा दुनिया का पहला ऐसा देश था, जिसने 1991 मे अपने यहां दोहरा GST मॉडल (Dual GST Model) लागू किया था। बाद में, भारत ने भी 2017 में कनाडा की तर्ज पर ही Dual GST Model लागू किया। भारत में 2012 में उस समय के बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और कई राज्यों के वित्त मंत्री कनाडा दौरे पर गए थे और GST पर अध्ययन किया था। दोहरे GST में केन्द्र और राज्य को कर वसूलने की पावर होती है। कनाडा में GST की दर 13 से 15 प्रतिशत के बीच है।

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