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Happiness in India: दुनिया के सबसे खुशहाल और संतुष्ट लोगों में शामिल हैं भारतीय

एक अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग रिसर्च कंपनी इप्सोस (Ipsos) ने अपने एक वैश्विक शोध में बताया है कि भारत दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में से एक है।

Global Happiness 2023 report Indians are also happiest and satisfied people in the world

Happiness in India: एक बहुराष्ट्रीय मार्केटिंग रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इप्सोस (Ipsos) ने हाल ही में 'ग्लोबल हैप्पीनेस 2023 - लाइफ सेटिस्फेक्शन एक्रोस द वर्ल्ड' (Global Happiness 2023 - Life Satisfaction Across the World) नाम से एक एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट को कंपनी ने दुनिया के 32 देशों के नागरिकों का अध्ययन कर तैयार किया है।

इन देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, थाईलैंड, ब्राजील, मलेशिया, भारत, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, कोलंबिया, पेरू, मेक्सिको, चिली, अर्जेंटीना, पोलैंड, इटली, अमेरिका (USA), दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, इंडोनेशिया, बेल्जियम, कनाडा, सिंगापुर, स्पेन, स्वीडन, जर्मनी, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन (UK), चीन, पुर्तगाल, हंगरी शामिल हैं।

इप्सोस ने इन देशों के 75 वर्ष से कम आयु के 22,508 वयस्कों से ऑनलाइन पता किया कि वे कितने खुश है? यह सर्वे 22 दिसंबर 2022 से 6 जनवरी 2023 के बीच किया गया था। जिसमें खुलासा हुआ कि भारत में 84 प्रतिशत लोग अपने जीवन से खुश हैं। दरअसल, इन 32 देशों के सर्वे में भारत 5 सबसे खुशहाल देशों में पाया गया है। भारत के अलावा चीन, सऊदी अरब, नीदरलैंड, और ब्राजील भी टॉप-5 में हैं।

महामारी के दौरान फैली थी मायूसी

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले 11 सालों में भारत का हैप्पीनेस रेट सबसे कम 2020 में था। उस दौरान यह 66 प्रतिशत पहुंच गया था। तब भारत पूरी दुनिया सहित कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा था। यही नहीं, बीते 11 सालों में भारत का हैप्पीनेस रेट सबसे ज्यादा 2011 में था। उस साल भारत का हैप्पीनेस रेट सर्वाधिक 89 प्रतिशत था।

जरुरत के समय 'साथ'

इस रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई प्रश्नों पर राय एकत्रित की गयी है। जैसे भारत में 68 प्रतिशत इस बात से खुश हैं कि जरूरत पड़ने पर उनके करीबी दोस्त अथवा रिश्तेदार मदद करते हैं। इस मामले में सबसे ज्यादा खुश नीदरलैंड के 82 प्रतिशत लोग हैं। जबकि सबसे कम खुश जापान के 54 प्रतिशत, ब्राजील के 58 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया के 61 प्रतिशत नागरिक हैं।

व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां

रिपोर्ट के मुताबिक व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों को लेकर 85 प्रतिशत भारतीय खुश हैं। इस मामले में भारत के बाद संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और चीन के लोग हैं। जबकि शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम को लेकर मात्र 45 प्रतिशत जापानी ही खुश रहते हैं।

अपनी बात को खुलकर कहने वाले

किसी भी बात को खुलकर कहने की आजादी के मामले में 76 प्रतिशत भारतीय खुश हैं। जबकि ब्रिटेन जैसे विकसित देश में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत है। यूरोप के अन्य बड़े देश भी इस मामले में भारत से पीछे है। गौरतलब है कि फ्रांस में 72 प्रतिशत, स्वीडन में 74 प्रतिशत, पोलैंड में 61 प्रतिशत और इटली में 74 प्रतिशत लोग खुलकर अपनी बात कह सकते हैं। जबकि अपनी बात को खुलकर कहने में सबसे नाखुश तुर्किये के लोग हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वहां सिर्फ 57 प्रतिशत लोग ही इस आजादी का फायदा उठा सकते हैं।

धार्मिक एवं अध्यात्मिक आस्था

अपने धार्मिक अथवा आध्यात्मिक जीवन को लेकर भारत में 84 प्रतिशत लोग खुश रहते हैं। वहीं अमेरिका में 76 प्रतिशत और ब्रिटेन में 64 प्रतिशत लोग अपने धार्मिक जीवन से संतुष्ट हैं। इस विषय में सबसे ज्यादा खुश इंडोनेशिया के 93 प्रतिशत नागरिक हैं। जबकि सबसे कम खुश दक्षिण कोरिया के 50 प्रतिशत लोग हैं।

देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा

देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भारत में 70 प्रतिशत लोग खुश हैं। गौरतलब है कि अमीर देश माने जाने वाले पुर्तगाल में आर्थिक हालातों को लेकर मात्र 12 प्रतिशत लोग खुश हैं। जबकि 85 प्रतिशत सऊदी अरब की जनता को देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा है। वहीं फ्रांस में 28 प्रतिशत, ब्रिटेन में 19 प्रतिशत और अमेरिका में मात्र 34 प्रतिशत लोग अपने-अपने देशों के आर्थिक हालातों से संतुष्ट हैं।

राजनैतिक एवं सामाजिक स्थिति

भारत की राजनैतिक एवं सामाजिक स्थिति को लेकर 72 प्रतिशत भारतीय संतुष्ट हैं। इस मामले में सबसे कम खुश अर्जेंटीना के मात्र 17 प्रतिशत लोग हैं। यही नहीं, अमेरिका और ब्रिटेन में भी लोगों को अपने यहां के राजनैतिक और सामाजिक हालातों से संतुष्टि नहीं है। गौरतलब है कि अमेरिका में यह आकंडा 50 प्रतिशत और ब्रिटेन में 27 प्रतिशत है।

शिक्षा के मामले में भी भारत खुशहाल!

भारत में शिक्षा के स्तर को लेकर 84 प्रतिशत लोग खुश हैं। गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे टेक्नोलॉजी और साइंस अग्रणी देशों के नागरिक अपने देश की शिक्षा व्यवस्था से नाराज हैं। जापान में 60 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में मात्र 50 प्रतिशत नागरिक अपने-अपने देशों की शिक्षा व्यवस्था से खुश हैं।

यह भी पढ़ेंः World Happiness Report: वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट और भारत-विरोधी पश्चिमी देशों का एजेंडा

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