Foreign Universities in India: भारत में पहले भी विदेशी विश्वविद्यालय मौजूद थे, जानें UGC के नये नियमों को
अब भारत में भी विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस खोलने का मार्ग UGC ने खोल दिया है। हालांकि, यह योजना कितनी सफल होगी यह तो समय ही बताएगा।

Foreign Universities in India: Foreign Universities Campus in India: देश में उच्च शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसलिए अब देश में ही रहकर विद्यार्थी विदेश की तर्ज पर शिक्षा पा सकें, इसके लिये 5 जनवरी 2023 को UGC ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है। जिसके तहत अब विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत में अपने कैंपस खोल सकेंगे।
भारत में मौजूद थे 'फेक' विदेशी विश्वविद्यालय
यह पढ़कर आपको जरुर थोडा अटपटा लगेगा लेकिन यह एक सच्चाई है। दरअसल, भारत में पहले भी कई विदेशी विश्वविद्यालयों ने अपने कैम्पस खोले थे लेकिन उसके लिये उन्होंने भारत सरकार से कोई अनुमति नहीं ली थी। राज्य सभा में 18 मई 2012 को दिये जवाब में यूपीए सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास राज्यमंत्री ई. अहमद ने बताया कि अभी देश में विदेशी विश्वविद्यालयों के आने और कैम्पस खोलने के नियमन पर कोई केंद्रीय कानून नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार को यहां तक नहीं पता था कि उस समय कितने विदेशी विश्वविद्यालय भारत में मौजूद हैं।
दरअसल, उस दौरान ऐसे कई विदेशी विश्वविद्यालय देश में चल रहे थे जोकि फेक अथवा गैरकानूनी थे। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय राज्यमंत्री ई. अहमद ने संसद को दी। उन्होंने मीडिया के हवाले से संसद में कहा कि दिल्ली में एक कमरे में 'कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड' नाम से फेक विदेशी विश्वविद्यालय चल रहा है।
बिना अनुमति वाले विदेशी विश्वविद्यालयों की रोकथाम का कानून
उच्च शिक्षा देने वाले विदेशी शिक्षण संस्थानों के प्रवेश और संचालन को विनियमित करने के लिये साल 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार एक बिल ले आई थी। इस बिल का नाम The Foreign Educational Institutions (Regulation of Entry and Operations) Bill, 2010 था। यह लोकसभा में पेश किया गया लेकिन वहां यह पारित न हो सका। इसके बाद उसे 13 मई 2010 में संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया जिसने 2 जून 2011 को अपनी रिपोर्ट पेश की। इसके बाद इस बिल पर किसी भी केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
AICTE दे सकती है विदेशी विश्वविद्यालयों को अनुमति
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की वेबसाइट के अनुसार वह विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में पढ़ाई कराने की अनुमति दे सकता है। यह व्यवस्था कई संस्थानों को collaboration यानि अनुबंध के आधार पर प्रदान की जाती है। इसमें सिर्फ उच्च तकनीकी एवं पेशेवर शिक्षा शामिल होती है। जैसे औरंगाबाद स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनजमेंट (IHM) का यूके की University of Huddersfield से बीए (Hons.) होटल मैनजमेंट में, और बीए Culinary Arts के लिये आपसी करार था। इन दोनों कोर्स के लिये क्रमशः 120 और 60 सीटें भी आरक्षित की गयी थी।
इसी प्रकार आंध्र प्रदेश स्थित श्रीनिधि इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी का अमेरिका के Vaughn College of Aeronautics & Technology से अनुबंध है। इसके तहत बीएस एयरलाइन मैनजमेंट, बीएस एअरपोर्ट मैनजमेंट और बीएस इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (Avonics option) जैसे कोर्स को अनुमति दी गयी हैं।
हालांकि, इन सभी विदेशी विश्वविद्यालयों को All India Council for Technical Education (AICTE) द्वारा बनाये गये फीस, एडमिशन, उद्देश्य, और पाठ्यक्रम सम्बन्धी नियमों का पालन करना जरुरी हैं। इन नियमों के अनुसार भारत में फिलहाल छह विदेशी विश्वविद्यालयों का भारतीय संस्थानों से अनुबंध हैं।
UGC का क्या कहना है
अभी तक UGC के पास विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैम्पस खोलने का कोई नियम नहीं था। हालांकि, 11 फरवरी 2021 को राज्य सभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए कहा था कि विश्व के 100 टॉप विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैम्पस खोलने की अनुमति दी जायेगी। हालांकि, यह कैसे संभव होगा इसकी कोई विस्तृत जानकारी उन्होंने नहीं दी थी।
अब UGC ने इसी पर एक ड्राफ्ट तैयार किया है। UGC के चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने दूरदर्शन को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताया कि यूरोप के कुछ देशों के विश्वविद्यालयों ने भारत में परिसर स्थापित करने में रूचि दिखायी है। उन्होंने कहा कि चूंकि विदेशी विश्वविद्यालय भारत सरकार से वित्तपोषित (फंडेड) संस्थान नहीं हैं, ऐसे में उनकी दाखिला प्रक्रिया, शुल्क ढांचे के निर्धारण में यूजीसी की भूमिका नहीं होगी। विदेशी विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके भारतीय परिसरों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, उनके मुख्य परिसर में दी जाने वाली शिक्षा के समान ही गुणवत्तापूर्ण हो। हालांकि, अगर उन्हें किसी तरह की मदद की जरूरत पड़ेगी तो विदेशी विश्वविद्यालय भारत में शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर अपना कैंपस स्थापित कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि विदेश से फंड का आदान-प्रदान विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत ही होगा।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया है कि इन विदेशी संस्थानों को विदेश या भारत से फैकल्टी और अन्य स्टाफ सदस्यों को नियुक्त करने के लिए पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की गयी है। हालांकि, भारतीय परिसर में पढ़ाने के लिए नियुक्त विदेशी फैकल्टी के सदस्य एक उचित अवधि के लिये ही रहेंगे। एम. जगदीश कुमार आगे कहते हैं कि एडमिशन के समय जो भी नियम कानून होंगे वो विदेशी विश्वविद्यालय खुद तय करेंगे, इसमें यूजीसी की भूमिका नहीं होगी। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति की व्यवस्था हो सकती है, जैसा कि विदेशों में विश्वविद्यालयों में होता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 क्या कहती है
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा भारत में आने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत सरकार की तरफ से कोई अलग से फंडिंग नहीं मिलेगी, उन्हें सब पैसा अपनी जेब से लगाना होगा। वैसे भारत में आने वाले विदेशी विश्वविद्यालय UGC के अंतर्गत आएंगे लेकिन एडमिशन और फीस की प्रक्रिया में UGC की भूमिका नहीं होती है। हालांकि यहां से प्रदान की गई डिग्री और प्रमाण-पत्र राष्ट्रीय विश्वविद्यालय या संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई संबंधित डिग्री और प्रमाण-पत्र के समान ही होती है।
हर साल बिलियन डॉलर जाता है बाहर
UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार से यह पूछा गया कि क्या यूजीसी ने कभी कोई रिसर्च किया है कि विदेशी संस्थान भारत में निवेश करने में रुचि रखते हैं? तब उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि साल 2022 में 4.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन के लिए विदेश गए थे, जिससे 28-30 बिलियन डॉलर विदेश जाने का अनुमान है। वहीं कई ऐसे विश्वविद्यालय हैं जिन्होंने रूचि दिखाई है।
जुलाई 2021 में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने संसद में जानकारी दी थी कि विदेशों में भारत के 11 लाख 33 हजार 749 छात्र पढ़ रहे हैं। उसके मुताबिक कनाडा में सबसे ज्यादा दो लाख 15 हजार 720 छात्र, अमेरिका में दो लाख 11 हजार 930 छात्र, ऑस्ट्रेलिया में 92 हजार से ज्यादा और सऊदी अरब में लगभग 81 हजार, सूडान में दस और ब्राजील में सबसे कम 4 भारतीय छात्र मौजूद थे।
इन विश्वविद्यालयों ने भारत आने से किया मना
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मई 2022 में ABP में छपी एक खबर के मुताबिक यूजीसी द्वारा 60 से अधिक देशों के भारतीय राजदूतों के साथ संपर्क किया गया कि वे वहां के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से बात कर भारत में विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने के लिये राजी करें। मगर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो ने देश में अपना कैंपल खोलने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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