Assam Floods: पानी में डूबा ‘असम’, आखिर क्यों बार-बार आती है बाढ़?
Assam Floods: असम के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण फिर से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण एक बड़ा इलाका जलमग्न हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने असम के लिए 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया है। साथ ही अगले कुछ दिनों में राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना भी जताई है।
बता दें कि लगभग 3 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले राज्य असम में एक तिहाई से ज्यादा जनता हर साल सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित होती है। अब सवाल यह है कि आखिर क्यों हर साल असम में बाढ़ आती है? क्या है नदियों की भूमिका? लोगों को राहत दिलाने के क्या-क्या प्रयास हो रहे हैं? चलिए विस्तार से समझने की कोशिश करते है।

असम में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
असम सरकार की जल संसाधन वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक मानसून के दौरान 50 से अधिक छोटी-छोटी नदियां ब्रह्मपुत्र और बराक नदी में मिलती हैं। इसी के चलते राज्य में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। दरअसल, असम में बाढ़ और कटाव की समस्या देश के दूसरे किसी भी राज्य से कहीं ज्यादा होती है।
राष्ट्रीय बाढ़ आयोग (आरबीए) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक असम का कुल क्षेत्रफल 78.523 लाख हेक्टेयर है। जिसमें 31.05 लाख हेक्टेयर (39.58%) बाढ़ संभावित क्षेत्र माना गया है। जो देश के कुल बाढ़ संभावित क्षेत्र का अकेला 9.40% है। रिकॉर्ड के अनुसार बाढ़ से हर साल औसतन 9.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होता है। गौरतलब है कि पूरे देश का बाढ़ प्रभावित क्षेत्र लगभग 10.2% है।
असम में क्यों आती है बाढ़?
असम में बाढ़ आने का सबसे बड़ा कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है। असम का उत्तरी हिस्सा भूटान और अरुणाचल प्रदेश से लगा है, जोकि पहाड़ी इलाके हैं। पूर्वी हिस्सा नागालैंड, पश्चिमी हिस्सा पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश और दक्षिणी हिस्सा त्रिपुरा, मेघालय तथा मिजोरम से मिलता है। वहीं असम देश का एक ऐसा राज्य है जो पूरी तरह से नदी घाटियों पर बसा हुआ है। असम का कुल क्षेत्रफल 78,438 स्क्वायर किलोमीटर है। जिसमें से 56,194 स्क्वायर किलोमीटर ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी में है। बाकी का बचा 22,244 स्क्वायर किलोमीटर का हिस्सा बराक नदी की घाटी में है। यानी असम पूरी तरह नदी घाटी पर बसा हुआ है। लिहाजा वहां बाढ़, मिट्टी के कटाव और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है।
तिब्बत के पठारों पर जमी बर्फ और हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से भी ब्रह्मपुत्र पर बने बांधों का जलस्तर बढ़ जाता है। हकीकत यही है कि असम में बाढ़ के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार ब्रह्मपुत्र नदी ही है। कई छोटी-छोटी नदियां तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश से होते हुए असम में प्रवेश करती हैं, तो पहाड़ी इलाके से सीधे मैदानी इलाके में आ जाती हैं, जिसकी वजह से बाढ़ आ जाती है। हर साल मानसून में चीन, भूटान, नेपाल और पड़ोसी राज्यों से छोड़े गये पानी के कारण भी असम में नदियों पर बने तटबंध टूट जाते हैं और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आपको बता दें कि भारत में ब्रह्मपुत्र पर चार बड़े बुनियादी ढांचे (बांध) बनाये गये हैं। जिसमें सुबनसिरी लोअर डैम, रंगानदी डैम, रंगित डैम और दिबांग डैम शामिल है।
कब-कब आई बाढ़?
असम सरकार की वेबसाइट के मुताबिक आजादी के बाद से असम ने 1954, 1962, 1972, 1977, 1984, 1988, 1998, 2002, 2004 और 2012 में बड़ी और भयंकर बाढ़ों का सामना किया था। जबकि तकरीबन हर साल बाढ़ की तीन से चार लहरें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को तबाह कर देती है। असम में बाढ़ के कारण औसतन सालाना नुकसान ₹200 करोड़ आंका गया है। साल 1998 में लगभग ₹500 करोड़ का नुकसान हुआ था। जबकि साल 2004 के दौरान यह लगभग ₹771 करोड़ आंका गया था।
नदी किनारे कटाव एक बड़ी समस्या
पिछले छह दशकों से नदियों के किनारों का कटाव एक गंभीर मुद्दा रहा है। साल 1950 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा 4.27 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पहले ही नष्ट हो चुकी है, जो राज्य के क्षेत्रफल का 7.40% है। इस कटाव की वजह से हर साल औसत नुकसान लगभग 8,000 हेक्टेयर भूमि का होता है। तट कटाव के कारण कहीं-कहीं ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 15 किलोमीटर तक बढ़ गयी है।
ब्रह्मपुत्र नदी के बढ़ते चौड़ीकरण पर विभिन्न समयों में सर्वे किये गये हैं। उसके मुताबिक पहला सर्वे 1912 से 1928 के बीच किया गया गया था। तब यह 3,870 स्क्वायर किलोमीटर था। इसके बाद दूसरा सर्वे 1963 से 1975 के दौरान किया गया, तब नदी का साइज बढ़कर 4,850 स्क्वायर किलोमीटर हो गया। इसके बाद तीसरा सर्वे साल 2006 के दौरान किया गया तब यह 6,080 स्क्वायर किलोमीटर हो गया। इसका मतलब कि ब्रह्मपुत्र नदी का दायरा भी पहले की अपेक्षा बढ़ता जा रहा है।
बाढ़ को लेकर सरकार की योजना
असम में बाढ़ को लेकर साल 2022 में संसदीय समिति को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जानकारी दी गयी थी कि बाढ़ की समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए नदियों और उनकी सहायक नदियों पर अलग-अलग जगह स्टोरेज का इंतजाम करना होगा। साथ ही, ब्रह्मपुत्र पर बने तटबंध काफी पुराने हो चुके हैं। इसलिए नये सिरे से तटबंध बनाने होंगे।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा बताया गया कि ब्रह्मपुत्र बोर्ड में 2016 से बड़ी संख्या में सेवानिवृति हो रही है, जबकि नई भर्तियां बंद हैं। इसलिए बोर्ड में 161 तकनीकी पद स्वीकृत है, लेकिन 61 खाली हैं और 254 गैर तकनीकी पद स्वीकृत हैं, जबकि 168 पद खाली हैं। इस कमी की वजह से ब्रह्मपुत्र बोर्ड का काम भी प्रभावित हो रहा है।
इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक असम में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ब्रह्मपुत्र ड्रेजिंग की एक परियोजना को मंजूरी दी गयी थी। लेकिन यह परियोजना अभी तक शुरू नहीं हुई है।












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