इन पांच बातों की वजह से चीन बन गया भारत का सिरदर्द
नई दिल्ली। देश में नई सरकार भी बन गई और पड़ोसियों के साथ रिश्ते बेहतर कर ने की दिशा में काम भी शुरू हो गया लेकिन पड़ोसी है कि अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार ही नहीं हैं।
एक ओर पाकिस्तान की ओर से लश्कर-ए-तैयबा का बढ़ता आतंक तो दूसरी ओर चीन की ओर से भी लगातार गुस्ताखियों को अंजाम दिया जा रहा है।
'पंचशील' के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर इस समय भारतीय उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी चीन के दौरे पर हैं।
उनकी वहां पर मौजूदगी के बावजूद चीन की ओर से लगातार ऐसी हरकतें हो रही हैं जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव पिछले कुछ दिनों में बढ़ गया है।
दोनों देशों के बीच हालात इस कदर चिंताजनक हो गए हैं कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री नबम टुकी ने केंद्र सरकार से चीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर डाली है।
एक नजर डालिए उन पांच हरकतों पर जिसकी वजह से सुरक्षा विशेषज्ञों को भी चिंताएं होने लगी हैं।

नक्शे की वजह से युद्ध के हालात
पिछले दिनों चीन ने अपना एक नया नक्शा जारी किया। इस नक्शे में उसने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया है जबकि जम्मू-कश्मीर के एक बड़े हिस्से को भी चीन का अंग बताया है। अमेरिकी अखबार ने तो यहां तक लिख दिया कि इस नक्शे की वजह से दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात पैदा हो सकते हैं।

पेंगोंग झील पर जताया हक
शनिवार को एक रिपोर्ट आई जिसमें कहा गया कि चीन ने एक बार फिर से घुसपैठ के प्रयास किये हैं। इस बार चीनी सैनिक जमीन के रास्ते नहीं आए बल्कि पानी के सहारे भारत में दाखिल हुए और लद्दाख स्थित मशहूर पेंगोंग झील पर अपना हक जताया।

भारत को घेरने की तैयारी
चीन ने अंतरराष्ट्रीय रेल लाइन से अपने सीमावर्ती प्रांत शिनजिआंग को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर पर शुरुआती शोध अध्ययन पर काम शुरू कर दिया है। भारत के लिए चिंताएं और भी बढ़ गई हैं क्योंकि यह रेललाइन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके से होकर गुजरेगी।

भारत की चिंताएं दोगुनी
पिछले वर्ष यानी फरवरी 2013 में पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर सामरिक दृष्टि से काफी अहम ग्वादर बंदरगाह चीन के हवाले कर दिया था। भारत ने इसे लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था। भारत में मौजूद सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो ग्वादर बंदरगाह चीन के हवाले करना भारत को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

14 बार घुसपैठ में कामयाब
वर्ष 2013 में चीन ने हर 14 दिनों के अंदर लद्दाख और आसपास के इलाकों में हर 14 दिन के अंदर घुसपैठ की। सुरक्षा और इंटेलीजेंस से जुड़े सूत्रों की मानें तो चीन की सेना अब इस क्षेत्र में एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। वह कभी जमीन, कभी हवा तो कभी पानी के बहाने घुसपैठ करने की कोशिशों में लगी ही रहती है।












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