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FIFA World Cup 2022: एयरपोर्ट से लेकर होटल और स्टेडियम बनाने पर कितने डॉलर खर्च कर दिए कतर ने?

FIFA World Cup 2022: इन दिनों दुनिया में फीफा वर्ल्डकप का रोमांच सर चढ़ कर बोल रहा है। कतर में आयोजित हो रहे इस फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर हर तरफ जश्न का माहौल है। दुनिया भर से हजारों की तादाद में फैंस भी इस आयोजन में शामिल होने के लिए लगातार कतर पहुंच रहे हैं।

FIFA World Cup 2022 in Qatar expenses on airport hotel stadium

आयोजकों का अनुमान है कि इस टूर्नामेंट को देखने लगभग 1.8 मिलियन से ज्यादा लोग आ सकते हैं। फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक इस आयोजन की तैयारी में कतर ने 220 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 18000 अरब रुपये) की भारी-भरकम रकम खर्च कर दी है। जबकि कतर वित्त मंत्री का कहना है कि हर सप्ताह 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च किये गए थे।

फीफा की मेजबानी पर पहले कितनी रकम खर्च हो चुकी है?

2018 में हुए फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी रूस को मिली थी। जिसमें 94 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इससे पहले 2014 में ब्राजील फीफा वर्ल्ड कप का मेजबान देश था और इस आयोजन में ब्राजील ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। 2010 में साउथ अफ्रीका ने इसकी मेजबानी की और 29 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रकम खर्च की। 2006 में जर्मनी ने 35 हजार करोड़ रुपये आयोजन में खर्च किए।

2002 में साउथ कोरिया और जापान में आयोजन हुआ। दोनों देशों ने मिलकर 57 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। 1998 में फ्रांस मेजबान देश था और उसने 18.7 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे। 1994 में अमेरिका ने 407 करोड़ रुपये इस आयोजन में खर्च किए थे।

वर्ल्ड कप के लिए 12 सालों से तैयारी कर रहा था कतर

कतर ने FIFA WORLD CUP के लिए 7 नए स्टेडियम तैयार किए और एक पुराने स्टेडियम को वर्ल्डकप के अनुरूप तैयार किया है। इन सभी में कुल मिलाकर 385,416 (तीन लाख 85 हजार) दर्शकों के बैठने की क्षमता है - लुसैल स्टेडियम (क्षमता- 80,000), अल बेत स्टेडियम (क्षमता- 60,000), स्टेडियम 974 (क्षमता- 40,000), खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम (क्षमता- 45,416), एजुकेशन सिटी स्टेडियम (क्षमता- 40,000), अल थुमामा स्टेडियम (क्षमता- 40,000), अल जनुब स्टेडियम (क्षमता- 40,000) और अहमद बिन अली स्टेडियम (क्षमता- 40,000)। इन सभी स्टेडियमों को बनाने में कतर ने 6.5 से 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किये है।

इन सभी में स्टेडियम 974 सबसे अलग है क्योंकि इसे 974 शिपिंग कंटेनरों से बनाया गया है। इसलिए इसका नाम भी स्टेडियम 974 रखा गया है। सभी स्टेडियमों को ठंडा करने के लिए कतर ने एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग कुलिंग सिस्टम भी खरीदे हैं। साथ ही स्टेडियम के मैदान में लगी घास को अमेरिका से मंगाया गया है।

समुद्र में तैरता होटल

इन स्टेडियमों के अलावा खिलाडियों और फैंस के रुकने के लिए 100 से ज्यादा होटल बनकर तैयार हैं जोकि सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। सबसे दिलचस्प दोहा के समुद्री तट पर मौजूद एक क्रूज शिप है जिसे फाइव स्टार होटल बना दिया गया है। इसमें 21 फ्लोर हैं जिसमें कुल 33 बार और कैफे सहित 13 डाइनिंग वेन्यू हैं। इसके अलावा 14 स्विमिंग पूल इसके अन्दर मौजूद हैं। इस क्रूज में करीब 7000 लोगों के रुकने की क्षमता है और वर्ल्ड कप के दौरान यह दोहा के समुद्री तट पर ही मौजूद रहेगा। ये एक फ्लोटिंग होटल की तरह है।

हमद इंटरनेशनल एयरपोर्ट

कतर ने दुनियाभर के फैंस के कतर आने के लिए एक नए एयरपोर्ट को खोल दिया है। इसका नाम हमद इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जोकि अब कतर का मुख्य एयरपोर्ट बन गया है। इसने दोहा स्थित दोहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जगह ले ली है। सालाना 58 मिलियन पैसेंजर्स की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट को स्काईट्रक्स वर्ल्ड एयरपोर्ट अवार्ड ने दुनिया के सबसे बढ़िया एयरपोर्ट का दर्जा दिया है।

सुरक्षा के इंतजाम

सुरक्षा के लिए कतर ने 2017 में यूरोप की सबसे बड़ी सुरक्षा कंपनी से 24 फाइटर जेट्स, 9 अत्याधुनिक हॉक एमके-167 ट्रेनिंग जेट 65 हजार करोड़ रुपए में खरीदने का अनुबंध किया हैं। इसके अलावा ब्रिटेन से उसकी 2012 ओलिंपिक वाली विशेष सुरक्षा तकनीक भी मांगी गयी है। कतर का नेशनल सिक्योरिटी सेंटर ड्रोन, CCTV और सेंसर के जरिए देश की निगरानी करेगा।

कतर पर लगे आरोप - मजदूरों को उनके काम के नहीं दिए पैसे

इतना पैसा बहाने के बाद भी कतर पर मानवीय अधिकारों के हनन के कई आरोप लगते रहे है। ऐसी रिपोर्ट्स मौजूद हैं, जिनके अनुसार निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को मेहनताना नहीं दिया गया अथवा कम दिया गया। यही नहीं, मजदूरों को तय समय से अधिक जबरन काम करवाया गया और उस अतिरिक्त समय का भी उन्हें पैसा नहीं दिया गया।

आरोप है कि निर्माण कार्यों के दौरान कई मजदूरों की मौत हुई, लेकिन कतर ने इनकी कोई सुध नहीं ली। मजदूरों की मौत के बाद कतर के कानून के मुताबिक उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना था, लेकिन उसमें भी घपलेबाजी के आरोप हैं।

फरवरी 2021 में गार्डियन अखबार के मुताबिक कतर ने जब से वर्ल्ड कप के लिए बोली जीती थी तब से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के 6,500 प्रवासी कामगारों की कतर में मौत हो चुकी है। श्रम अधिकार समूह फेयरस्क्वेयर का कहना है कि मरने वालों में से कई वर्ल्ड कप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे थे।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशल की 2021 की एक रिपोर्ट कहती है कि कतर में काम करने वाले लोगों का शोषण व्यवस्थागत रूप से होता है। क्योंकि वहां काम करने जाने वाले लोग अपने मालिकों के रहमोकरम पर होते है। लोग अपने मालिकों की इजाजत के बिना नौकरी नहीं बदल सकते और इसकी प्रक्रिया भी बेहद पेचीदा है।

यह भी पढ़ें: FIFA World Cup 2022 से जुड़ी ये खास बातें, आपको कर देंगी हैरान

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