जीका-बंदर से इंसानों में अाया वायरस, जीका के बारे में खास तथ्य
वाशिंगटन। इबोला के बाद अब दुनिया पर जीका का खतरा बढ़ गया है। लैटिन अमेरिका के 20 देशों को इसने अपनी चपेट में ले रखा है और अब भारत भी इसकी जद में आ सकता है।
सूत्रों की मानें तो भारत सरकार की ओर से जल्द ही इस वायरस से जुड़ी एक एडवाइजरी जारी की जा सकती है।
जीका वायरस एक ऐसा खतरनाक वायरस है जो मच्छरों के जरिए शरीर में पहुंचता है। इस वायरस के शरीर में दाखिल होने से शरीर में कई तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
अगर कोई महिला गर्भवती है और यह वायरस उसके शरीर में पहुंच जाए तो फिर उसका बच्चा एक भयानक विकार का शिकार हो सकता है।
इस वायरस के गर्भस्थ शिशु के शरीर में पहुंचने पर उसके मष्तिष्क का विकास नहीं हो पाता है। ब्राजील में इस वायरस से संक्रमित गर्भवती महिलाओं ने छोटे सिर वाले बच्चों को जन्म दिया है।
इस वायरस के खतरनाक प्रभावों को देखते हुए अब ब्राजील और लैटिन अमेरिका के एक देश एल सल्वाडोर ने महिलाओं को ऑर्ड्स दिए हैं कि वह वर्ष 2018 से पहले गर्भ न धारण करें।
आइए आज आपको इस वायरस और इससे होने वाले बुखार से जुड़े 10 तथ्यों के बारे में बताते हैं।

बंदरों में दिखा पहला वायरस
यह वायरस सबसे पहले बंदरों में देखा गया था। वर्ष 1947 में यूगांडा स्थित जीका के जंगलों में जो बंदर थे वह इस वायरस से संक्रमित थे और इसी वजह से इस वायरस का नाम जीका पड़ा था।

बंदरों से पहुंच गया इंसानों में
वर्ष 1954 में पहली बार इंसानों के शरीर में इस वायरस के लक्षण देखे गए। हालांकि कई दशकों तक कभी भी यह वायरस मानव जाति के लिए बड़े खतरे के तौर पर सामने नहीं आया। इस वजह से कभी भी वैज्ञानिकों ने इसकी वैक्सीन को डेवलप करने के बारे में नहीं सोचा।

फिर लैटिन अमेरिका बना निशाना
इस वायरस को वर्ष 2007 में कैरीबियन कंट्री माइक्रोनेशिया के एक आईलैंड याप में देखा गया और यहां से यह वायरस लैटिन अमेरिकी देशों की ओर बढ़ता गया। दिसंबर 2015 में लैटिन अमेरिकी देश प्यूर्टो रिको में इसका पहला लक्षण दिखा।

एडीज मच्छर इसके कैरियर
जीका आरएनए वायरस से संबंधित है। डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर डॉक्टर होत्ज कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को इस वायरस से संक्रमित मच्छर काट लेता है तो उस व्यक्ति में इसके वायरस आते हैं। इसके बाद जब कोई और मच्छर उन्हें काटता है तो उस मच्छर में फिर से यह वायरस प्रवेश कर जाता है। इस तरह से यह वायरस एक जगह से दूसरी जगह फैल जाता है।

उत्तर और दक्षिण अमेरिका पर ज्यादा खतरा
डब्लूयएचओ ने इस बीमारी को लेकर पूरी दुनिया में अलर्ट जारी कर दिया है। यह अलर्ट खासतौर पर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी देशों के लिए है। ब्राजील की सरकार की ओर से कहा गया है कि यह उनके देश में फैली अब तक की सबसे खतरनाक बीमारी है।

बच्चों का मस्तिष्क रह जाता है छोटा
मच्छरों के जरिए फैलने वाले इस वायरस से बच्चों में मस्तिष्क का विकास रुक जाता है और मस्तिष्क का आकार भी सामान्य से भी छोटा हो जाता है। ब्राज़ील में अक्टूबर से अब तक इसके 4,120 संदिग्ध केस आ चुके हैं। इनमें से 270 की लैब टेस्ट में पुष्टि हो चुकी है। बताया जा रहा है कि करीब 40 लाख लोग इसके शिकार हो सकते हैं।

हो सकता है पैरालायसिस भी
वायरस की वजह से होने वाले बुखार से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है, आंखों में सूजन होती है, उसे ज्वांइट पेन रहता है और साथ ही शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। कभी-कभी तो इसके लक्षण कुछ लोगों में नजर ही नहीं आजे हैं। कभी-कभी इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति पैरालायसिस का शिकार भी हो सकता है।

माइक्रोसिफेली के शिकार होते शिशु
इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं पर होता है। वायरस की वजह से उनके गर्भ में पल रहे शिशुओं में माइक्रोसिफेली नामक बीमारी होने का डर रहता है। इस बीमारी की वजह से शिशुओं के मस्तिष्क का विकास पूरा नहीं हो पाता है और उनका सिर छोटा रह जाता है।

ओबामा ने की रिसर्च में तेजी की अपील
इस बीमारी का इलाज अभी तक दुनिया तलाश नहीं पाई है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से अपील की गई है कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन तलाशने की अपील की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी वैक्सीन तैयार होने में कम से कम दो वर्ष का समय लगेगा। लेकिन एक दशक बाद वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंच पाएगी।

सरकार ने की अपील
क्योंकि इसका इलाज आने में अभी दो वर्षों का समय लगेगा इसलिए ब्राजील के साथ ही लैटिन अमेरिकी देश एल सल्वाडोर की सरकार ने महिलाओं से अपील की है कि वे अगले दो वर्षों यानी वर्ष 2018 से पहले गर्भ न धारण करें।

अमेरिकी विशेषज्ञों की आशंका
वर्जीनिया अमेरिका के लीडिंग न्यूरोलॉजिस्ट जिम फ्रैड्ररिक्स की मानें तो ट्रैवलर्स के साथ इस वायरस के आने की संभावना काफी कम है। वह कहते हैं कि एक एडल्ट मच्छर बहुत ही नाजुक होता है और उसकी मौत की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में इस वायरस की संभावना भी घट जाती है।
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