आखिर चुनावों के ठीक पहले ही मुलायम को क्यों याद आये कारसेवक?

लखनऊ। बीते बीस घंटे से एक खबर ने सर्खियां पकड़ी हुई है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने उस जुर्म के लिए माफी मांगी है जो कि उन्होंने आज से 25 साल पहले किया था। जी हां हम बात कर रहे हैं कारसेवकों की।

आखिर राम मंदिर के तारीखों का ऐलान स्वामी कैसे कर सकते हैं?

गौरतलब है सपा नेता मुलायम सिंह ने कहा है कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने का उन्हें दुख है, लेकिन धर्मस्थल को बचाना भी बहुत जरूरी था इसलिए ऐसा करना पड़ा लेकिन मुझे इस बात का काफी अफसोस है। मालूम हो कि तत्कालीन समय में मुलायम सिंह यूपी के मुखिया थे और उनके इस आदेश के कारण फायरिंग में 16 कारसेवकों की मौत हो गई थी।

25 साल बाद मुलायम से जताया अफसोस

क्या था वो मसला और क्यों किया था मुलायम ने वो फैसला और आज उस बात के लिए माफी मांगने का क्या मतलब है इस बात को जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

अग्रणों का वोट हासिल करने की कोशिश

अग्रणों का वोट हासिल करने की कोशिश

मुलायम सिंह के इस बयान पर राजनीति शुरू हो गई है, सपा नेता के इस बयान पर लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि यह सब हिंदुओं को आकर्षित करने और अग्रणों का वोट पाने के लिए मुलायम ने किया है क्योंकि अगले साल यूपी में चुनाव है।

भाजपा से निपटने की कोशिश

भाजपा से निपटने की कोशिश

पिछले काफी समय से बीजेपी भी राम मंदिर का मु्द्दा उछाल रही है इसी कारण बीजेपी से निपटने के लिए ही मुलायम सिंह ने यह माफी वाली चाल चली है यह बात भी टीवी चैनलों पर चल रही बहस में निकलकर सामने आ रही है।

बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद

बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद

अयोध्या के बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद है, हिंदू कहते हैं वहां मंदिर था तो मुस्लिम कहते हैं कि वहां नमाज पढ़ी गई थी और इसी कारण 30 अक्टूबर 1990 को हजारों रामभक्तों ने मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार का विरोध करते हुए अयोध्या में प्रवेश किया और विवादित ढांचे के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया।

गोली चलाने का आदेश

गोली चलाने का आदेश

जिसके कारण 2 नवंबर 1990 को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें कोलकाता के राम कोठारी और शरद कोठारी (दोनों भाई) सहित 16 कारसेवकों की मौत हो गई थी।

मुलायम सिंह यादव ने इस्तीफा दिया

मुलायम सिंह यादव ने इस्तीफा दिया

जिस पर काफी बवाल मचा और इसी कारण 4 अप्रैल 1991 को दिल्ली के वोट क्लब पर अभूतपूर्व रैली हुई और इस रैली के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस्तीफा दिया।

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