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FDI in India: भारत में बढ़े विदेशी निवेशक, जानिए किस देश से कितना आया निवेश

भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में $83.57 बिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल किया जो अब तक किसी भी वित्त वर्ष में सबसे अधिक है।

FDI in India Foreign investors increase know how much investment came from which country

FDI in India: उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2022-23 में अप्रैल-दिसंबर के दौरान $13,077 मिलियन के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ सिंगापुर, भारत का सबसे बड़ा निवेशक रहा है।

दरअसल बीते आठ-नौ सालों के दौरान भारत सरकार द्वारा उठाये गये मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के अच्‍छे परिणाम मिले हैं, जिसने देश में एफडीआई प्रवाह को नयी गति दी है। वहीं सरकार द्वारा लगातार एफडीआई नीति की समीक्षा और इसमें बदलाव किया जा रहा है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत एक आकर्षक और निवेशकों के लिए उपयोगी स्‍थान हो। एफडीआई नीति में सुधार के बाद अब कोयला खनन, अनुबंध निर्माण, डिजिटल मीडिया, एकल ब्रांड खुदरा व्यापार, नागरिक उड्डयन, रक्षा, बीमा और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश किया जा रहा है।

क्या होता है एफडीआई?

एफडीआई का मतलब होता है Foreign Direct Investment यानि हिंदी में इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहा जाता है। एफडीआई का अर्थ यह है कि अगर भारत से बाहर का कोई व्यक्ति या कंपनी भारत की किसी कंपनी में निवेश कर सकता है या अपनी खुद की कंपनी लगा सकता है। वहीं कोई विदेशी निवेशक भारतीय कंपनी के शेयर या बांड को खरीद सकते हैं। इसे ही हम एफडीआई कहते है। यहां एक और बात बता दें कि निवेश करने पर जो भी लाभ होगा, वह लाभ और मूलधन को विदेशी निवेशक अपने देश में वापस ले जा सकता है, इसे 'रिपार्टिएबल बेसिस' कहा जाता है।

वहीं एफडीआई दो प्रकार (ग्रीन फील्ड निवेश और पोर्टफोलियो निवेश) के होते हैं। ग्रीन फील्ड निवेश के तहत दूसरे देश में एक नयी कंपनी की स्थापना की जाती है। जबकि पोर्टफोलियो निवेश के तहत जिस देश में निवेश करना है, वहां की कोई कम्पनी के शेयर खरीद लिए जाते हैं या उस देश की कंपनी का अधिग्रहण किया जाता है।

इन 10 देशों ने भारत ने किया बड़ा निवेश

DPIIT द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2022-23 में अप्रैल-दिसंबर के दौरान $13,077 मिलियन एफडीआई के साथ सिंगापुर, भारत का सबसे बड़ा निवेशक है। जबकि मॉरीशस ने $4,731 मिलियन, अमेरिका ने $4,957 मिलियन, संयुक्त अरब अमीरात ने $3,101 मिलियन, नीदरलैंड ने $2,157 मिलियन, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) ने $1,608 मिलियन, जापान ने $1,430 मिलियन, साइप्रस ने $1,154 मिलियन, केमैन आइलैंड ने $624 मिलियन और जर्मनी ने $350 मिलियन निवेश किया हैं।

पीआईबी के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में निवेश करने वाले शीर्ष निवेशक देशों के मामले में सिंगापुर 27% के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद 18% के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर आता है और 16% के साथ मॉरीशस तीसरे स्थान पर आता हैं।

2021-22 में कितना एफडीआई आया

पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में $83.57 अमेरिकी बिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल किया जो अब तक किसी भी वित्त वर्ष में सबसे अधिक है। वर्ष 2014-15 में भारत में केवल $45.15 बिलियन का एफडीआई आया था, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में $83.57 बिलियन का एफडीआई अब तक का सर्वाधिक सालाना एफडीआई है। इसने यूक्रेन में युद्ध और कोविड-19 महामारी के बावजूद पिछले वर्ष के $1.60 बिलियन के एफडीआई को पीछे छोड़ दिया है। वित्‍त वर्ष 2003-04 की तुलना में भारत के एफडीआई में 20 गुना वृद्धि हुई है, जब एफडीआई केवल $4.3 बिलियन था।

पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान रिपोर्ट किए गए कुल एफडीआई का विवरण इस प्रकार है। वित्त वर्ष 2018-19 में $62 बिलियन, वित्त वर्ष 2019-20 में $74.39 बिलियन, वित्त वर्ष 2020-21 में $81.97 बिलियन, वित्त वर्ष 2021-22 में $83.57 बिलियन निवेश किया गया है।

इसके अलावा, भारत विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए एक पसंदीदा देश के रूप में तेजी से उभर रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2020-21 ($12.09 बिलियन) की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 ($21.34 बिलियन) में विनिर्माण क्षेत्रों में एफडीआई इक्विटी में 76% की वृद्धि हुई है।

इन क्षेत्रों और राज्यों में किया गया भारी निवेश

डीपीआईआईटी के मुताबिक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले नौ महीनों में सबसे ज्यादा $8,068 मिलियन पूंजी लगाई गई। उसके बाद सेवा ($6,559 मिलियन), कारोबार ($4,145 मिलियन), रसायन ($1,515 मिलियन), वाहन उद्योग ($1,275 मिलियन) और निर्माण (बुनियादी ढांचा) गतिविधियों ($1,221 मिलियन), ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स ($1,818 मिलियन), टेलिकॉम्यूनिकेशन ($696 मिलियन) का निवेश किया गया है।

वहीं पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश में 'कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर' क्षेत्र में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश देखने को मिला है जहां करीब 25% हिस्सेदारी के साथ क्रमशः सेवा क्षेत्र (12%) और ऑटोमोबाइल उद्योग (12%) का स्थान है।

'कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर' क्षेत्र के तहत, वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान सबसे ज्यादा एफडीआई 53% कर्नाटक में आया तो दिल्ली में 17%, और महाराष्ट्र में भी 17% रहा। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान सबसे ज्यादा एफडीआई प्राप्त करने वाला राज्य कर्नाटक है जहां 38% एफडीआई आया है।

इसके बाद 26% के साथ महाराष्ट्र और 14% के साथ दिल्ली का स्थान है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान कर्नाटक के अधिकांश इक्विटी प्रवाह 'कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर' (35%), ऑटोमोबाइल उद्योग (20%) और शिक्षा' (12%) क्षेत्रों में रिपोर्ट किये गये हैं।

भारत में टैक्स हेवन देशों का एफडीआई?

डीपीआईआईटी के द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में तीन बड़े टैक्स हेवन देशों (सिंगापुर, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात) से निवेश आया। फॉर्चुन इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2000 और जून 2022 (22 वित्तीय वर्ष) के बीच, 86% से अधिक का एफडीआई 20 टैक्स हेवन देशों का है। जिसमें से 49% मॉरीशस और सिंगापुर के माध्यम से, यूएस के माध्यम से 9.2%, यूके के माध्यम से 5.3%, केमैन द्वीप और संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से 2.4%, साइप्रस के माध्यम से 2% और 1.5% स्विट्जरलैंड के माध्यम से निवेश किया गया है। वहीं फॉर्चुन इंडिया, आरबीआई के हवाले से लिखता है कि वित्त वर्ष 2014 से वित्त वर्ष 2022 तक 10 टैक्स हेवन देशों के द्वारा भारत में 85% एफडीआई किया गया है।

यहां आपको बता दें कि 'टैक्स हेवन' उन देशों को कहते हैं जहां अन्य देशों की अपेक्षा बहुत कम कर लगता है या बिलकुल टैक्स नहीं लगता है। ऐसे देश कालाधन जमा करने के लिए जाने जाते हैं। ये देश टैक्स में किसी प्रकार की पारदर्शिता नहीं रखते, न ही किसी प्रकार की वित्तीय जानकारी को साझा करते हैं। दुनिया भर की अमीर इन टैक्स हेवन देशों या द्वीपों में अपना काला धन ले जाते हैं और वहां से अन्य देशों में निवेश करते हैं।

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