जानिए इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ और इससे जुड़े ऑपरेशन के बारे में
बेंगलुरु। भारत की इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, देश की इकलौती इंटेलीजेंस एजेंसी है जिसका मकसद दुश्मनों की साजिशों का पता लगाना है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन में होने वाली साजिशों को पता लगाकर देश की सुरक्षा को और बढ़ाना इस एजेंसी का जिम्मा है।
चीन के साथ वर्ष 1962 में हुए युद्ध के बाद इस एजेंसी का गठन किया गया था। तब से लेकर आज तक यह एजेंसी देश की सुरक्षा एजेंसियों को दुश्मन की साजिश के खिलाफ आगाह करने का काम करती आ रही है।
उस समय देश की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी ने इसका गठन किया था और वाराणसी के आरएन काओ रॉ के सबसे पहले चीफ थे।
आइए आपको इस एजेंसी से जुड़े कुछ खास तथ्यों के बारे में बताते हैं।

चीन और पाक की साजिश वजह
62 और फिर 65 की लड़ाई के बाद सरकार को महसूस हुआ कि एक ऐसी एजेंसी देश में होनी चाहिए तो पड़ोसी मुल्क में हो रही साजिश का पता लगाकर आतंकी हमलों को नाकाम कर सके। वाराणसी के आरएन काओ रॉ के सबसे पहले चीफ थे।

जब सियाचिन पर पाक की कब्जे की कोशिश
रॉ ने वर्ष 1984 में चेतावनी दी कि पाकिस्तान सियाचिन में सालतोरो पहाड़ी पर ऑपरेशन अबाबील के जरिए कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इसके तुरंत बाद इंडियन आर्मी की ओर से ऑपरेशन मेघदूत लांच किया गया। इसके तहत इंडियन आर्मी के 300 ट्रूप्स को इस जगह पर डेप्लॉयड किया गया।

रॉ की सबसे बड़ी नाकामयबी
23 जून 1985 को इंडियन एयरक्राफ्ट 747-237बी को 31,000 फीट की ऊंचाई पर ब्लास्ट कर दिया गया। आयरलैंड के पास हुए इस आतंकी हमले में 329 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस टेरर अटैक को रॉ की सबसे बड़ी नाकामयाबी माना जाता है क्योंकि यह अटैक उस समय हुआ जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था।

मालद्वीव में चला ऑपरेशन
रॉ की मदद से भारतीय सेना और वायुसेना ने नवंबर 1988 ने मालद्वीव्स में दूसरे देशों से आई सेनाओं को बाहर खदेड़ने में सफलता हासिल की थी। इंडियन एयरफोर्स की आगरा स्थित पैराशूट रेजीमेंट से गई बटालियन ने इसमें अहम योगदान दिया था। इस ऑपरेशन को ऑपरेशन कैक्टस नाम दिया गया और इसमें इंडियन नेवी भी शामिल थी।

सोवियत यूनियन को मिली मदद
पाकिस्तान और अमेरिका की मदद से जब अफगानिस्तान में तालिबान मजबूत होने लगा तो भारत ने नार्दन एलायंस और सोवियत यूनियन के साथ जाने का फैसला किया। रॉ पहली इंटेलीजेंस एजेंसी बनी जिसने कुंदुज एयरलिफ्ट की भूमिका को तय किया था। भारत ने करीब आठ से 10 मिलियन डॉलर की मदद से नॉर्दन एलायंस को लड़ाई के लिए हथियार दिए थे।

जब चीन में बैठे मुशर्रफ ने बनाई पूरी साजिश
रॉ ने ही कारगिल युद्ध से पहले उस समय पाक आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज की टेलीफोन पर हुई बातचीत को टैप किया था। उस समय मुशर्रफ बीजिंग में थे और अजीज इस्लामाबाद में थे। इस टैप के बाद यह साबित हो सका था कि पाक ने कारगिल में घुसपैठ की साजिश को अंजाम दिया था।












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