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Interview: उपराष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुँचाने वालों पर कार्रवाई हो: तीरथ सिंह रावत

Tirath Singh Rawat Interview: संसद में हंगामा मचा हुआ है। लोक सभा और राज्य सभा में हंगामे के लिए विपक्ष के 150 से अधिक सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति ने सांसदों के व्यवहार को लोकतान्त्रिक मूल्यों को खिलाफ तो बताया ही है, साथ में जानबूझ कर संसदीय कार्यवाही में व्यावधान डालने की साजिश भी बताया है। जबकि विपक्ष का कहना है कि संसद की सुरक्षा में हुई चूक पर प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के बयान की मांग करना, उनका जायज अधिकार है, जिसे पूरा करने के बजाय सत्ता पक्ष उनकी आवाज दबाने के लिए उन्हें सदन से निलंबित करवा रहा है।

इस बीच उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ ने एक वीडियो का हवाला देते हुए खुद के, किसानों के और जाट जाति के काँग्रेस और विपक्ष द्वारा अपमान किए जाने का मुद्दा उठा दिया है, जिस पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी विपक्ष की आलोचना की है। क्या अब यह संसद का गतिरोध किसी बड़े आंदोलन का स्वरूप ले सकता है? क्या इस को मुद्दा बनाकर ही एनडीए और इंडिया गठबंधन चुनाव में उतरेंगे? आखिर यह मुद्दा किस करवट बैठेगा? इस पर वनइंडिया ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावत से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं, उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।

exclusive interview of Tirath Singh Rawat comment on vice president jagdeep dhankhar mimicry

प्रश्न: संसद में विपक्ष ने गतिरोध पैदा किया और उसके बाद लोकसभा और राज्यसभा से विपक्ष के अनेक सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। क्या यह किसी रणनीति के तहत किया गया है या उपजी परिस्थितियों का यह परिणाम है?

रावत : विपक्ष हर समय विरोध की मुद्रा में है। आज नहीं है यह, हमेशा से ही यही कर रहे हैं। ना उनके पास कोई मुद्दा है ना इशू। इसलिए वे भटक रहे हैं। विकास और देश के अन्य मुद्दे पर उनको सदन में बहस पर आना चाहिए। बहुत सारे क्षेत्रीय मुद्दे भी हैं। सांसदों को अपनी बात रखने के लिए जनता भेजती है। पर अभी जो घटना घटी है, वह सबके सामने है। हंगामा मचाने वालों को बाहर निकालना मजबूरी थी। उन्होंने मजबूर किया स्पीकर साहब को। भारतीय जनता पार्टी लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से चलती है। सदन चलाने की भी एक संवैधानिक व्यवस्था है। इसी के तहत सबको बोलना, अपनी बात रखने की परंपरा है। विपक्ष के लोग विषय से हट कर सीधे वेल में आ गए और कारवाई में अवरोध पैदा करने लगे। मजबूरी में स्पीकर को निलंबन का कदम उठाना पड़ा।

प्रश्न: संसद की सुरक्षा में सेंध लगी और इस पर विपक्ष के नेता गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे हैं, फिर बयान क्यों नहीं दे रहे हैं गृह मंत्री?

रावत : देखिए हर चीज की एक प्रक्रिया है। जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया, वो अच्छा नहीं हुआ। उन लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान हो, इसकी कोशिश हो। पीछे भी ऐसी घटनाएं हुईं हैं। इस घटना पर भी स्पीकर साहब ने सदन में पूरा वक्तव्य दिया है। सभी दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके घरों में भी दबिश दी गई। लापरवाह सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जांच भी बिठाई गई है। इस पर सर्वदलीय बैठक हुई और सभी ने वहाँ प्रक्रिया पर सहमति व्यक्त की। जब सब निर्णय हो गया तो पता नहीं क्यों विपक्ष फिर से विरोध पर आ गया। जब जांच जारी है, तो किसी बयान की क्या जरुरत है। इस समय कोई बयान देने का सवाल ही नहीं उठता।

प्रश्न : सदन के बाहर राज्यसभा के सभापति की भाव भंगिमा का मजाक उड़ाने वाला वीडियो आया है। भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है, ऐसा क्यों?

रावत : संसद के बाहर उपराष्ट्रपति की नकल और उनके प्रति असम्मान का भाव दिखाना विपक्ष के लिए कतई शोभा नहीं देता। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने उपराष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुँचाई है। इस प्रकार के लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी इतने महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं और वे उपराष्ट्रपति के मजाक उड़ाये जाने का वीडियो बना रहे थे। क्या वे किसी टूरिज़्म स्पॉट पर गए थे। वो सांसद होने की गरिमा नष्ट कर रहे थे।

प्रश्न : बीजेपी और एनडीए ने इसे जाट के अपमान का मुद्दा बनाया है, वहीं कॉंग्रेस कह रही है कि खड़गे को दलित होने के कारण सदन में नहीं बोलने दिया जाता। यह तो जातिवादी आरोप प्रत्यारोप हो गया?

रावत : यह विषय को भटकाने की काँग्रेस की चाल है। जहां तक संसद में बोलने की बात है, वह विषय ही अलग है। कौन बोलेगा और कितना बोलेगा, यह सदन में पार्टियों के नेता तय करते हैं। सदन में बोलने में जाति धर्म की बात कहां आ गई। सदन के नेता की बात है यह, चेयरपर्सन की भूमिका इसमे कहां है? लेकिन इसमें यदि काँग्रेस घुसती है तो यह लोकतंत्र और देश के लिए अच्छा नहीं है।

प्रश्न: लेकिन इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी प्रतिक्रिया दी है। क्या उपराष्ट्रपति के मखौल को बीजेपी बड़ा मुद्दा बनाएगी?

रावत : निश्चित रूप से, यदि इस तरह के विषय आएंगे, तब भाजपा चुप नहीं बैठेगी। उपराष्ट्रपति के संवैधानिक पद का यदि माखौल उड़ाया जाएगा तो जनता भी इनको जवाब देगी। जनता देख रही है कि ये सांसद हैं और किस तरह का इनका चरित्र है। मैं कह सकता हूँ कि जब से चुनाव परिणाम आया है और तीन राज्य भाजपामय हुए हैं, उससे ये बौखला गए हैं। उसी बौखलाहट में ये कुछ भी बोल रहे हैं।

प्रश्न : अब इंडिया गठबंधन ने खड़गे को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया है। वह दलित वर्ग से आते हैं। क्या इससे बीजेपी की चुनौती बढ़ेगी?

रावत : प्रधानमंत्री मोदी के सामने इस समय केवल चार ही जातियाँ युवा वर्ग, महिला, किसान, और गरीब हैं। उनके उत्थान के लिए वह दिन रात एक किए हुए हैं। ये ईश्वरीय मुद्दे हैं। यह देश और विदेश का हर आदमी जानता है कि केवल मोदी जी ही इस समय सबका भला कर सकते हैं। इसलिए किसी के उम्मीदवार बनने से कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर उनमें एका भी नहीं है। आपने देखा कि पिछले विधान सभा चुनाव में इनके बीच क्या हुआ। अखिलेश ने इनके बारे में क्या कहा। टिकट बंटवारे के समय फिर इनमें सिर फुटौअल होना है। दरअसल ये सब लोग डरे हुए लोग हैं। इन्होंने देश को लूटा है। इसलिए डर कर एक साथ आए हुए हैं। ये लोग मिलकर भी 100 का आकड़ा नहीं छू पाएंगे।

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