Eid: ईद का चाँद देखने में इतना फर्क क्यों?
Eid: 2024 के ईद-उल-फितर को लेकर फिर से दुविधा है। कहीं 10, तो कहीं 11 अप्रैल को ईद मनाई जा रही है। ईद की तारीख चंद्रमा दिखाई देने पर निर्भर करती है। दुनिया में भौगोलिक स्थितियों के आधार पर ईद की तारीख बदलती रहती है।
दुनिया के 1.8 अरब मुसलमानों के लिए एक साथ चाँद देखना संभव नहीं है। ईद-उल-फितर आमतौर पर हिजरी (इस्लामी चंद्र कैलेंडर) के 10वें महीने शव्वाल के पहले तीन दिनों में मनाया जाता है, जो रमजान के ठीक बाद आता है। रमज़ान के दौरान मुसलमान रोज़ा रखते हैं, जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज़ करते हैं।

ईद और तारीखों का विवाद
ईद की सटीक तारीखों का निर्धारण हमेशा बहस और विवाद का विषय रहा है। कुछ इस्लामी विद्वान अमावस्या को भौतिक रूप से देखने के बजाय खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हैं। तो कुछ लोग ईद मनाने का फैसला अपनी आँखों से चाँद देखने के बाद ही करते हैं।
विभिन्न देशों में चंद्रमा देखने के भी अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। कुछ चाँद देखने की जानकारी पर्यवेक्षकों से लेते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो कुछ सऊदी अरब से इसकी घोषणा का इंतजार करते हैं। मुसलमानों का सबसे पवित्र स्थल मक्का सऊदी अरब में ही है। लेकिन शिया मुस्लिम, ईरान का अनुसरण करते हैं। इराक में, जहां शिया और सुन्नी दोनों वर्गों की जनसंख्या है, वे अपने अपने मौलवियों की घोषणाओं का पालन करते हैं।
तुर्की, रमज़ान की शुरुआत और समाप्ति की तारीख खगोलीय गणनाओं के आधार पर तय करता है। यूरोप के अधिकतर मुसलमान अपने अपने मजहबी नेताओं की दी तारीखों का पालन करते हैं। एक तथ्य यह भी है कि यदि किसी देश में चंद्रमा का दीदार नहीं हो पाता तो वहाँ के मुसलमान अपने निकटतम मुस्लिम-बहुल देश में तय तारीखों का पालन कर लेते हैं। इसलिए दुनिया भर में ईद की तारीखें अलग-अलग होती हैं।
रमजान में अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं मुसलमान
इस्लाम में रमज़ान को दुनिया के सभी मुसलमानों के लिए अल्लाह का उपहार माना जाता है। यह वह महीना है जिसमें मुसलमान अपने सभी गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगते हैं। इस महीने में मुसलमान सुबह से शाम तक रोज़ा रखते हैं। इस महीने गरीबों की तकलीफों का एहसास अमीर मुसलमान करते हैं और ज़कात अदा करते हैं। जकात गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दी जाने वाली सहायता रकम है।
रमज़ान का पूरा महीना समाप्त होने पर ईद मनाते हैं। यह एक तरह से बलिदानों और अच्छे कामों के लिए जश्न का दिन होता है। इस दिन लोग अच्छे कपड़े पहनते हैं, स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करते हैं अपने से छोटों को ईदी (उपहार) देते हैं। सभी रिश्तेदार एक दूसरे के घर मिलने भी जाते हैं।
पाकिस्तान में सेना तय करती है ईद की तारीख
पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां रमज़ान और ईद का चांद दिखना काफी विवादास्पद विषय होता है। एक प्रांत के लोग देश के बाकी हिस्सों की तुलना में एक दिन पहले ही ईद मनाते हैं। विज्ञान और तकनीक के साथ धार्मिक विद्वानों का काफी विवाद होता है। हालांकि वहाँ के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चंद्र कैलेंडर के साथ पाकिस्तान की पहली आधिकारिक चंद्रमा-दर्शन वेबसाइट भी लॉन्च की है।
पाकिस्तान में चंद्रमा देखने के विवाद को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बाकायदा एक कानून लाया गया है। ईद के निर्णय पर राष्ट्रीय सहमति बनाने का ही यह एक प्रयास है। ईद की तारीख तय करने में पाकिस्तान की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी, पाकिस्तान मौसम विभाग, पाकिस्तान एयरफोर्स और पाकिस्तान नेवी अपनी अपनी इनपुट देते हैं। इसमें रुएत-ए-हलाल समिति की मदद ली जाती है।
कुरान में चाँद देखने की प्रक्रिया
परंपरावादी मुसलमान मानते हैं कि कुरान और सुन्नत के मार्गदर्शन के अनुसार अपने शहर या देश में चाँद देखने के बाद ही रमजान का उपवास शुरू और खत्म कर सकते हैं। कुछ मुस्लिम संप्रदाय धार्मिक रूप से सऊदी अरब का अनुसरण करते हैं और उन्हीं के साथ रमज़ान की शुरुआत और समाप्ति करते हैं।
कई हदीसें मौजूद हैं जिनमें कहा गया है कि एक ही प्रायद्वीप का हिस्सा होने के बावजूद चांद देखने में भिन्नता के कारण मदीना और मक्का में अलग-अलग दिनों में रमज़ान और ईद की घोषणा हो सकती है। कुछ मुस्लिम विद्वानों का यह भी कहना है कि कुरान में ऐसी कोई आयत या सुन्नत नहीं है जो यह दर्शाता हो कि चांद देखते समय हमें सऊदी अरब का अनुसरण करना चाहिए।
सऊदी अरब के विद्वान इब्न अल-उथैमीन ने ही लिखा है कि चाँद को देखने का सिद्धांत केवल स्थानीय स्तर पर लागू होना चाहिए। वैसे सऊदी अरब में पिछले कई वर्षों से चंद्रमा को देखने के तरीके को कठिन विज्ञान पर आधारित कर दिया है। उस आधार पर खुली आँखों से चाँद को देखने की संभावना काफी कम हो जाती है। कई बार यह भी देखा गया कि जिन मुसलमानों ने सऊदी घोषणा के बाद ईद मनाई, उन्हें बाद में एक छूटे हुए रमज़ान के रोज़े की भरपाई करनी पड़ी, क्योंकि स्थानीय स्तर पर चाँद बाद में दिखा और उनका रमजान टूटा हुआ मान लिया गया।
खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा पश्चिम में सूर्य के करीब और पहले दिखाई देता है। पूर्वी देशों में एक प्रकार से त्रिकोणीय रूप में दिखता है। वैसे चंद्रमा सबसे पहले भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में दिखाई देता है, लेकिन रमजान गर्मियों में आता है तो यह मकर रेखा के पास के देशों में सबसे पहले दिखाई देता है। इसलिए मेडागास्कर, मोजाम्बिक, जाम्बिया, नामीबिया, उराग्वे, चिली, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया इसे देखने वाले पहले देश हैं। चाँद को सऊदी अरब में उसी कैलेंडर तिथि पर नहीं देखा जा सकता।
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