Earthquake: क्या होता है भूकंप और जापान ने कैसे किया है अपने बचाव का प्रबंध
Earthquake: 14 नवम्बर 2022 को लगभग 03:42 पर अमृतसर में 4.1 मैग्नीट्यूड की तीव्रता वाले भूकंप की झटके महसूस किये गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने इस घटना की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल से साझा करते हुए कहा, 'यह भूकंप ज़मीन के 120 किमी गहरा था'।

पिछले एक हफ्ते में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी भूकंप के दो बार हल्के झटके महसूस किये गए थे। 12 नवंबर (शनिवार) को आया जोकि रात को 8:00 बजे के आसपास था और इस भूकंप का मुख्य केंद्र नेपाल का बझांग जिला था। वहां पर इसका मैग्नीट्यूड रिकॉर्ड किया गया।
इससे पहले 8 नवंबर (मंगलवार) को मध्यरात्रि लगभग 2:00 बजे दिल्ली में भूकंप आया था लेकिन उसका भी मुख्य केंद्र नेपाल का डोटी जिला था, इस भूकंप से नेपाल में 6 लोगों की मौत भी हो गई थी।
भूकंप क्यों आते है?
पृथ्वी का अचानक कांपना भूकंप कहलाता है हालाँकि इसकी अवधि बहुत कम समय तक ही रहती है। यह पृथ्वी के अंदर गहरे विक्षोभ के कारण होता है। भूकंप ऊर्जा छोड़ते हैं और भूकंपीय तरंगें पैदा करते हैं, जो हमें महसूस होने वाले कंपन का कारण बनती हैं। भूकंप केवल जमीन सतह पर ही नहीं आते, भूकंप समुद्र एवं महासागरों में भी आते हैं और यही सूनामी का कारण बनता है। भूकंप के कारण हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है, और कई भूकंप ऐसे भी होते हैं जो बिल्कुल महसूस भी नहीं होते हैं।
विश्व में लगभग 80% से अधिक बड़े भूकंप प्रशांत महासागर में 'रिंग और फायर' के किनारों के आसपास होते हैं, यह वह जगह है जहाँ पेसिफिक प्लेट आसपास की प्लेटों के नीचे दब रही है। 'रिंग ऑफ फायर' दुनिया का सबसे भूकंपीय और ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है।
भारत में इन भूकंपों को लेकर कितना जोखिम है?
अक्टूबर 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आने वाले 181 देशों में भारत का 90वां स्थान था। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारत सरकार के आंकड़ों की मानें तो पिछले 20 वर्षों में भारत ने 10 बड़े भूकंपों का सामना किया है और इनमें मरने वालों की संख्या लगभग 20,000 है। इसमें पाक अधिकृत कश्मीर के आंकड़े जोड़ दिए जाएं तो मृतकों की संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। NDMA का यह भी मानना है कि भारत का 59% से अधिक भूमि क्षेत्र मध्यम से गंभीर भूकंपीय खतरे में है।
भारत की बढ़ती आबादी और व्यापक अवैज्ञानिक निर्माण, जिसमें बहुमंजिला लक्ज़री अपार्टमेंट, विशाल कारखाने की इमारतें, विशाल मॉल, सुपरमार्केट के साथ-साथ गोदाम भारत को भूकंप के उच्च जोखिम में रखते हैं।
वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में बहुत गंभीर भूकंप आने की संभावना की चेतावनी दी है, जो भारत में लाखों लोगों के जीवन पर प्रभाव डाल सकता है। पूरे हिमालय बेल्ट को 8.0 मैग्नीट्यूड से अधिक के 4 भूकंप आए हैं जिसमें 1897 का शिलांग भूकंप, 1905 का कांगड़ा भूकंप, 1934 का बिहार- नेपाल भूकंप और 1950 का असम तिब्बत भूकंप शामिल है, और वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे भी ऐसे कई भूकंप आ सकते हैं।
21वीं सदी के सबसे बड़े भूकंप और उनमें हुई मौतों का आकंडा
विश्व में सबसे घातक भूकंपों की सूची में सबसे पहले पर आता है 26 दिसंबर 2004 को हिन्द महासागर में आया 9.1 मेग्नीट्यूड का भूकंप जिसने लगभग ढाई लाख के आसपास लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसका केंद्र इंडोनेशिया था और प्रभाव भारतीय तटों तक हुआ।
इससे बाद, साल 2010 में हैती में 7.0 मेग्नीट्यूड का भूकंप आया था और इसने लगभग 2,20,000 लोगो की जान ले ली। फिर 2008 में चीन में 7.9 मेग्नीट्यूड का भूकंप आया था और इसमें लगभग 87,587 लोगो की जान गई।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में भी 7.6 मेग्नीट्यूड का भूकंप आया था और इसमें 87,351 लोग अपने जान से हाथ धो बैठे। साल 2003 में ईरान में आये 6.6 मेग्नीट्यूड के भूकंप में लगभग 26,271 लोगो की जान चली गई। साल 2011 में जापान में लगभग 9.0 मेग्नीट्यूड के तीव्र भूकंप में 20,896 लोगो की जान गई।
इसी प्रकार, 26 जनवरी 2001 को भारत के गुजरात के भुज में आए भूकंप में लगभग 20,085 लोग अपनी जान गवा बैठे और 1,50,000 लोग घायल हुए। इसकी तीव्रता 7.7 मेग्नीट्यूड थी और इसकी अवधि लगभग 90 सेकंड थी। इसे भारत में अभी तक का सबसे बड़ा भूकंप माना गया है।
इस भूकंप ने बांधो, बंदरगाह, सड़कों, पुलों और स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ-साथ 3,00,000 से अधिक इमारतों को नष्ट कर दिया। अकेले गुजरात में, लगभग 8,00,000 इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। कच्छ, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट और सुरेंद्रनगर जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए। उस समय पर व्यापक क्षति के कारण 10,00,000 से अधिक परिवार घरों के बिना रह रहे थे।
सर्वाधिक भूकंप वाला देश जापान कैसे करता है मैनेजमेंट
विश्व में सबसे ज्यादा भूकंप जापान में आते हैं। जून 2022 में प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूरे विश्व में प्रतिवर्ष आए भूकंपों में से 10% सिर्फ जापान में ही आते हैं। जापान में हर साल 1,500 से भी अधिक भूकंप आते हैं।
जापान में सभी इमारतें भूकंप प्रतिरोधी है। वहां हर स्मार्टफोन भूकंप और सुनामी चेतावनी के सॉफ्टवेयर के साथ बना हुआ है। जापान में ट्रेनों का बहुत बड़ा नेटवर्क है और वहां पर हर ट्रेन भूकंप सेंसर से लैस है। स्कूलों में बच्चों को छोटी उम्र से ही भूकंप और सुनामी के बारे में ज्ञान दिया जाता है और हर महीने भूकंप से बचने के लिए ड्रिल कराई जाती है। और जापान ने ऐसी ही कई तैयारियां कर रखी है जिससे भूकंप से कम से कम नुकसान हो।
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