#APJAbdulKalam: 'कलाम' कभी नहीं मर सकते क्योंकि हर कलमे में हैं 'कलाम'...

नई दिल्ली। भारत मां के सपूत, मिसाइल मैन, राष्ट्र पुरुष, राष्ट्र मार्गदर्शक, महान वैज्ञानिक, महान दार्शनिक, सच्चे देशभक्त.... ना जाने कितनी उपाधियों से पुकार जाता था भारत रत्न डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम को। वे सही मायने में भारत रत्न थे।

गीता में कहा गया है कि जो आया है वो जायेगा...इसलिए अपने कर्मों पर ध्यान दें, शरीर चला जायेगा और कर्म यहीं रह जायेंगे, शायद इसलिए ही गीता के बताये आदर्शों पर चलने वाले एपीजे अब्दुल कलाम ने जीवन पर्यन्त केवल अपने कर्मों पर ही ध्यान दिया जिसके कारण ही आज उनके चले जाने के बाद भी उनके आदर्श आज भी हमारे साथ मौजूद हैं।

देश के महान व्यक्तित्व से मिलने का सौभाग्य

देश के महान व्यक्तित्व से मिलने का सौभाग्य

देश के महान व्यक्तित्व से मिलने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ था साल 2010 में, अपनी किताब की एक प्रदर्शनी के दौरान हैदराबाद के रामोजी फिल्मसिटी के मेहमान बने थे कलाम। हमेशा जिन्हें टीवी और किताबों में देखा था, उन्हें अपने सामने पाकर मुझे यकीन नहीं हो रहा था, लोग अभिनेता और अभिनेत्रियों के आटोग्राफ लेने और उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए होड़ मचाते हैं लेकिन ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी राजनीतिक और वैज्ञानिक के लिए लोग ऐसा कर रहे थे।

अंत का मतलब नई शुरूआत

अंत का मतलब नई शुरूआत

उस होड़ में मैं भी शामिल थी, काफी जदोजहद के बाद मेरा भी नंबर आया, कलाम साहब ने मेरा नाम पूछा और बोला बेटा क्या करती हो? मैंने अपना नाम बताया और कहा आज मेरा यहां आखिरी दिन है, जिसके बाद एपीजे कलाम साहब ने कहा..end is new start..मतलब अंत का मतलब नई शुरूआत होता है।

सिर पर हाथ फेरकर कहा

सिर पर हाथ फेरकर कहा

मैं जब तक उनकी बातों को सोचती तब तक उन्होंने कागज पर मेरे लिए all the best लिख दिया था फिर सिर पर हाथ फेरकर कहा god bless you और आगे बढ़ गये किसी और से मुखातिब होने और उसे सही राह दिखाने के लिए।

अगर इंसान का नजरिया इस तरह का हो तो

अगर इंसान का नजरिया इस तरह का हो तो

चंद सेकंड की उस मुलाकात और अल्फाज ने मेरे दिल-दिमाग में नई ऊर्जा का संचार कर दिया, ना जाने क्यों मुझे ऐसा लगा कि वाकई कितनी सही बात कही है इन्होंने, अगर इंसान का नजरिया इस तरह का हो तो फिर इंसान तो कभी निराश और परेशान हो ही नहीं सकता।

वो तो हर कलमे में मौजूद हैं..

वो तो हर कलमे में मौजूद हैं..

तो इस तरह की सोच के मालिक थे अब्दुल कलाम...अपने भाषणों, अपनी किताबों और अपनी बातों से ना जाने उन्होंने कितने कलामों को जन्म दिया होगा इसलिए मेरी नजर में कलाम तो कभी मर ही नहीं सकते.. वो तो हर कलमे में मौजूद हैं.. और शायद यही उनका कमाल भी है।

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