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Hackers: अकाउंट हैक करके ट्रम्प की मृत्यु की घोषणा, पहले भी हैकर्स कर चुके हैं बड़े कारनामे

Hackers: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटे डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर का एकाउंट हैक कर झूठा दावा किया गया कि ट्रम्प की मृत्यु हो गई है। ट्वीट में कहा गया कि "मुझे यह घोषणा करते हुए दुख हो रहा है कि मेरे पिता डोनाल्ड ट्रंप का निधन हो गया है और मैं 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ूंगा।" इस ट्वीट को गलत बताने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक संदेश पोस्ट करके यह बताया कि वह अभी भी जीवित हैं।

जो हैकर्स सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया हस्तियों की निजी जानकारी, तस्वीरें आदि चुराना चाहते हैं, अथवा झूठी अफवाहें फैलाकर समाज में अव्यवस्था फ़ैलाकर अपनी ताकत प्रदर्शित करना चाहते हैं, वे यह सब सिर्फ मस्ती के लिए ही नहीं करते। बड़ी-बड़ी कंपनियों को हैक करके डाटा चुराकर उनसे फिरौती लेना हैकर्स को हैक करने के लिए उत्साहित करता है।

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हैक कैसे किया जाता है?

किसी भी वेबसाइट या सर्वर को हैक करने के दो तरीके है - पहला, फिजिकल और दूसरा कंप्यूटर के माध्यम से। फिजिकल हैकिंग में हैकर किसी अन्य (पेन ड्राइव या किसी स्टोरेज ड्राइव) के द्वारा सर्वर में एक मैलवेयर या वायरस डाल देता है, जिससे सभी फाइलें हैकर तक पहुंच जाती हैं।

इतिहास के सबसे बड़े साइबर हमले

1. सऊदी अरामको पर हमलाः 2012 में हुए इस हैक ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादन कंपनी 'सऊदी अरामको' के उत्पादन को कई दिनों तक प्रभावित किया। हैक "शमून" नामक वायरस द्वारा हुआ था, जिसका उद्देश्य डाटा ढूंढना और उसको नष्ट करना था। जिसमें उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिली। उन्होंने लगभग 30,000 कंप्यूटरों का डाटा नष्ट कर दिया था। जिसके कारण कंपनी का परिचालन प्रभावित हुआ। हालाँकि इस हमले का अरामको के नकदी प्रवाह पर सीमित प्रभाव पड़ा, लेकिन हैकर द्वारा दुनिया को प्रभावित करने वाले साइबर हमलों का यह एक प्रमुख उदाहरण रहा। इस हमले के पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान को हमलावर बताया, लेकिन ईरान ने यमन को दोषी ठहराते हुए इससे इंकार कर दिया था।

2. कोलोनियल पाइप लाइन रैनसमवेयर हमलाः 2021 में संयुक्त राज्य अमरीका की तेल पाइपलाइन 'कोलोनियल' के बुनियादी ढांचे पर सबसे बड़ा हमला हुआ, क्योंकि यह पाइपलाइन संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में गैसोलीन की सप्लाई करती है। इस हमले के चलते कंपनी को पाइपलाइन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिसके कारण वर्जीनिया जैसे राज्य सबसे अधिक प्रभावित हुए और चार्लोट में उनके 71 प्रतिशत गैस स्टेशनों में ईंधन खत्म हो गया। जिसके निवारण हेतु कंपनी ने एफबीआई के साथ मिलकर हैकरों से बातचीत की और बिटकॉइन के माध्यम से 4.4 मिलियन डालर की फिरौती का भुगतान किया, तब जाकर सिस्टम फिर से चालू हो सका।

3. भारत का एम्स हुआ हैकः भारत के सबसे बड़े और व्यस्त हॉस्पिटल नई दिल्ली स्थिति एम्स में गत 23 नवंबर 2022 को हैकर्स द्वारा सभी सर्वर को हैक कर लिया गया, जिसके कारण वहां के सभी कार्य ठप्प हो गये। जिससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि एम्स में सभी कार्य ऑनलाइन ही होते हैं। एम्स का सर्वर हैक होने के बाद इसे चिकित्सा सेक्टर का सबसे बड़ा हैकिंग माना गया, क्योंकि एम्स के पास 4 करोड़ मरीजों का डाटा है।

4. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र, सितंबर 2019 में भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कुडनकुलम से हैकर द्वारा डाटा चोरी किया गया। इसमें हैकर ने मैलवेयर द्वारा संयंत्र के आईटी नेटवर्क को हैक किया गया। डीट्रैक मैलवेयर के नाम से जाना जाने वाला मैलवेयर ने संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क से जानकारी एकत्र की। गनीमत ये रही कि हैकर को महत्वपूर्ण आंतरिक प्रणालियों तक पहुंच नहीं मिली, वे केवल इंटरनेट खोज इतिहास, ऑपरेटिंग सिस्टम, रजिस्ट्री डेटा और संक्रमित कंप्यूटर पर सक्रिय प्रक्रियाओं जैसी जानकारी प्राप्त करने में ही कामयाब रहे।

उपरोक्त प्रमुख हैकिंग घटनाओं के अलावा भी दुनिया भर में अनेकों ऐसी घटनाएं होती रहती है। जिसमें हैकर्स ने डाटा लीक द्वारा कई प्रमुख हस्तियों और कंपनियों को प्रभावित किया है। जिनमें फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकेरबर्ग, भारतीय अभिनेता अमिताभ बच्चन, प्रसिद्ध टीवी पत्रकार निधि राज़दान आदि शामिल हैं। इसके अलावा कई कंपनियों को हैक करके डाटा को चुराया गया है, जैसे एटी एंड टी वेंडर (9 मिलियन खाते), टी-मोबाइल (37 मिलियन खाते), जेडी स्पोर्ट्स (10 मिलियन), मायडील (2.2 मिलियन), ड्रॉपबॉक्स (लगभग 69 मिलियन खाते), फ्लैगस्टार बैंक (1.5 मिलियन) और ईबे (145 मिलियन) शामिल हैं।

किन देशों से आते हैं ज्यादातर हैकर

जब दुनिया में हैकर्स पर शोध किया गया तो यह देखा गया कि चीन में हैकरों की संख्या सबसे अधिक है। इंटरनेट पर आए दिन होने वाले साइबर हमलों के लिए चीन सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। क्योंकि विश्व में अपनी उपस्थिति और दबदबे को बरकरार रखने के लिए वहां की सरकार इन हमलों का समर्थन करती है, जिसके कारण चीन में विश्व के 41 प्रतिशत हैकर्स हैं।

हाल ही के कुछ वर्षों में रूस में भी हैकर्स की संख्या और वहां से होने वाले हमलों में बढोतरी देखी गई है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिकी चुनावों के दौरान डीएनसी के ईमेल को हैक करना था। अमेरिकी जांचकर्ताओं ने कहा कि रूसी हैकरों ने हिलेरी क्लिंटन के निजी कार्यालय में कर्मचारियों के ईमेल खातों के खिलाफ हमला किया। उसी समय या उसके आसपास, हैकरों ने क्लिंटन के चुनावी अभियान द्वारा इस्तेमाल किए गए 76 ईमेल पतों को भी निशाना बनाया। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर, रूस को कई हैकिंग घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। आईटी पेशेवरों का अनुमान है कि दुनिया भर में हैकिंग की 4.7 प्रतिशत घटनाएं रूस से होती हैं।

आज सरकारी एवं निजी संस्थान अपने कार्य को तेज़ व कुशलता से करने के लिए सभी काम कंप्यूटर के माध्यम से करते हैं और वैश्विक स्तर पर हैकर्स जिस तेज़ी से हमले को अंजाम देते है, उसमें भारत भी शामिल है। भारत में भी साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दुनिया के लगभग 2.3 प्रतिशत साइबर अपराधी भारत में हैं।

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