Miracle Surgeries: धरती पर डॉक्टर ही भगवान, जानिए डॉक्टरों के ये पांच अद्भूत ऑपरेशन
इजराइल में डॉक्टरों की एक टीम ने 12 वर्षीय बच्चे की गर्दन से अलग हो चुके सिर को फिर जोड़कर एक चमत्कार कर दिखाया है।
द टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई 2023 को इजराइल के हडासा मेडिकल सेंटर के सर्जनों ने मीडिया को बताया कि वेस्ट बैंक के एक फिलिस्तीनी बच्चे सुलेमान हसन को गंभीर हालत में हवाई मार्ग से ईन केरेम के हाडासा अस्पताल की ट्रॉमा यूनिट में लाया गया था।

'बच्चे का सिर, गर्दन से उखड़ गया था'
कार की चपेट में आने पर सुलेमान का सिर, गर्दन की महज कुछ नसों से जुड़ा रहा लेकिन रीढ़ की हड्डी के शीर्ष कशेरुक से अलग हो गया था। बच्चे की सर्जरी टीम का हिस्सा रहे आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. ओहद इनाव ने द टाइम्स ऑफ इजराइल से बातचीत में बताया कि यह बेहद जटिल सर्जरी थी। हमें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि हम इसमें सफल हो पाएंगे या नहीं। लेकिन हमने हार नहीं मानी, इस जटिल सर्जरी में कई घंटे लग गये लेकिन अब रिजल्ट देख पूरी टीम बेहद प्रसन्न हैं।
बच्चे को दे दी गयी छुट्टी
रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना जून 2023 की है लेकिन हाडासा अस्पताल के डॉक्टरों ने इस घटना को जुलाई तक सार्वजनिक नहीं किया था। दरअसल सर्जनों का मानना था कि बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद बेहद कम थी। उसकी रिकवरी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। हालांकि, फिलहाल बच्चे को उपचार के बाद अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। लेकिन, वह अभी अस्पताल के संपर्क में बना रहेगा।
जब डॉक्टरों ने दांत को बनाया आंख
साल 1997 में मार्टिन जोन्स, जो एक ब्रिटिश स्क्रैप यार्ड कार्यकर्ता है, अपनी आंखों की रोशनी खो बैठे। यह उस समय की घटना है जब पिघले हुए एल्यूमीनियम के टब में उनके मुंह के सामने अचानक से विस्फोट हो गया था। डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2009 में डॉक्टरों की एक टीम ने उनके आंखों में रोशनी देने के लिए एक बेहद ही रेयर प्रोसिजर का इस्तेमाल किया। डॉक्टर्स ने उनके मुंह से दांत को निकालकर उसके साथ ऑप्टिकल लेंस को उनकी आंखों पर फिक्स किया। इस दांत को जोन्स के आई सॉकेट में फिट किया गया। वह अब अपनी एक आंख से दुनिया को देख सकते हैं। डॉक्टर्स की ओर से इस पूरे ट्रीटमेंट में कुल चार महीने लगे थे।
पैर की हड्डी से बना दिया नया जबड़ा
मई 2023 में आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में एक कैंसर पीड़ित मरीज का लगभग 7 घंटे तक जटिल ऑपरेशन कर उसकी जान बचायी। दरअसल तंबाकू खाने से हुए कैंसर के कारण एक व्यक्ति का जबड़ा खराब हो गया था। डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करते हुए उसके पैर की हड्डी से नया जबड़ा बना दिया था।
सफल ऑपरेशन के बाद मीडिया को ईएनटी रोग विभाग के डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया था कि तंबाकू खाने की वजह से मरीज का जबड़ा, गाल और जीभ तक संक्रमण फैल गया था। जबड़ा पूरी तरह खराब हो गया। ऐसे में ईएनटी, प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की टीम बनाकर ऑपरेशन किया गया। घुटने से नीचे दो हड्डियां होती हैं, एक हड्डी में से 8.5 सेमी हिस्सा काटकर नया जबड़ा बनाया गया। इसके लिए हड्डी को सबसे पहले जबड़े का आकार दिया गया और हड्डी में रक्त का प्रवाह करने के लिए गर्दन की नस से माइक्रोवस्कुलर विधि से जोड़ा गया। इसे फ्री टिश्यू ट्रांसफर रिकंट्रक्शन कहा जाता है।
गर्भ में ही कर दी बच्चे की ब्रेन सर्जरी
मई 2023 में अमेरिका में डॉक्टरों की एक टीम ने गर्भ में ही बच्चे की ब्रेन सर्जरी की। यह दुनिया का पहला ऐसा मामला था, जहां गर्भ में ही बच्चे की ब्रेन सर्जरी की गयी हो। यह अभूतपूर्व सर्जरी ब्रिघम, वीमेन हॉस्पिटल और बोस्टन चिल्ड्रन्स अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम ने की है।
सीएनएन के मुताबिक सर्जरी करने वाले डॉक्टर डेरेन ओरबाक ने बताया कि यह बच्ची जन्म से पहले ही ब्रेन की रेयर कंडीशन वेन ऑफ गैलेन मालफॉर्मेशन (VOGM) से जूझ रही थी। यह नसों से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी है। जिसमें खून, दिमाग से कोशिकाओं से होता हुआ नसों में पहुंचता है। कोशिकाएं पतली होती हैं और ये खून के प्रवाह को धीरे करती हैं, जिससे नसों में खून आराम से पहुंचता है।
लेकिन, जिस बच्चे की सर्जरी की गई, उसकी कोशिकाएं विकसित नहीं हो पाईं थी। इस कारण उसके दिमाग से सीधे नसों में खून का प्रवाह हो रहा था। इससे दिमाग में चोट लगने, नसों में गड़बड़ी होने या फिर दिल का दौरा पड़ने का खतरा था। डॉक्टरों ने गर्भावस्था के 34वें हफ्ते में यह सर्जरी की है, यह अपने तरह की दुनिया में पहली सर्जरी है।
एक इंसान के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई सूअर की किडनी
अक्टूबर 2021 में अमेरिका के न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लैंगोन हेल्थ मेडिकल सेंटर में सर्जनों ने एक इंसान के शरीर में सुअर की किडनी (गुर्दे) का ट्रांसप्लांट करने में सफलता हासिल की थी। इसे लेकर 'अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रांसप्लांटेशन' में 20 जनवरी, 2022 को इस किडनी ट्रांसप्लांट की रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी।
किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर इस बात की जांच करना चाहते थे कि ब्रेन डेड मरीज का शरीर किडनी रिसीव करने के बाद कैसी प्रतिक्रिया करता है, क्योंकि एक जानवर का अंग एक इंसान में ट्रांसप्लांट किया गया था। हालांकि, सूअर की किडनी इंसान के शरीर में इंसान की सामान्य किडनी की तरह काम कर रही थी। जिसने सही तरीके यूरिन का फ्लो बनाये रखा और इंसान के शरीर ने किडनी को रिजेक्ट नहीं किया था।
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