क्या आप जानते हैं- भगवान राम भी थे बॉडी बिल्डर

Lord Rama
लखनऊ। भगवान राम के बारे में आपने पढ़ा जरूर होगा, उनके तमाम कैलेंडर व तस्वीरें देखी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान राम की बॉडी कैसी रही होगी? एक सूर्यवंश के क्षत्रिय परिवार में जन्में भगवान राम बलशाली थे, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन क्या उनका शरीर किसी बॉडी बिल्डर जैसा था या सामान्य पुरुष की तरह? तो जवाब है बॉडी बिल्डर! आप को जानकर हैरत होगी कि भगवान राम के पेट पर थ्री पैक्स थे और बाइसेप्स व ट्राइसेप्स का तो जवाब नहीं।

आप यह पढ़ कर हंस रहें होंगे और सोच रहें होगे कि क्या मैने उनको देखा है? तो जवाब है नहीं। लेकिन हां पढ़ा जरूर है, वो भी प्रसिद्ध ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित्रमानस में। रामचरितमानस में भगवान राम के शरीर का वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार उनका शरीर गठीला और थ्री पैक वाला था।

आजकल फिटनेस का समय है लोग अपने शरीर को गठीला बनाने पर विशेष ध्यान दिया करते हैं। बालीवुड से हालीवुड तक के हीरो हों या विलेन, सभी के शरीर पर थ्री पैक से लेकर सिक्स पैक दिखते हैं। दरआसल पैक कहते हैं पेट के गठीले स्वभाव को और यह शरीरिक आभा आती है पेट पर पड़ी लार्इनों के कारण। जब बॉडी शो में पहलवान लोग अपने शरीर को कर्इ प्रकार से उदवलित कर दिखाते हैं तो उनके पेट पर कुछ लार्इनें आकार ले लेती हैं और यही होता है पैक। वैसे सबसे बेहतर थ्री पैक होता है और अधिकतम सिक्स। किसी भी बॉडी बिल्डर को अगर आप ध्यान से देखें तो उसके पेट पर तीन ही पकितयां दिखती हैं।

बहरहाल हम अपने मुद्दे पर वापस आते हैं और देखें कि भगवान राम का शरीर थ्री पैक वाला था। रामचरित्रमानस के सबसे अंतिम सोपान यानि की उत्तरकांड में एक प्रसंग आता है जब काकभुशुणिड गरुड़ जी को भगवान राम की कथा सुनाते हैं। एक बार भगवान विष्णु के वाहन पक्षिराज गरुड़ ने भगवान राम की युद्ध में नागपाश में बंध जानें पर सहायता की थी, तो उनको भ्रम हो गया कि अगर ये सर्वशक्ति‍मान हैं तो राम को एक गरुड़ की क्यों आवश्यकता पड़ गयी और इसी भ्रम को समाप्त करने के लिए वे काकभुशुणिड के पास गये।

"मोहि भयउ अति मोह प्रभु, बंधन रन महुं निरखि, चिदानंद संदोह राम बिकल कारन कवन"

इसी संदेह को दूर करने के प्रसंग में उत्तरकांड में काकभुशुणिड ने गरुडजी को तमाम कथा सुनायी है। उसी दौरान उन्होंने भगवान के शरीर का वर्णनन भी किया है। उत्तरकांड के दोहा नम्बर 73 में गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं

"रेखा त्रय सुदंर उदर नाभी रुचिर गंभीर।
उर आयत भ्राजत बिबिध बाल बिभूषन चीर।।

यानि की उदर पर तीन सुंदर रेखांए हैं, नाभि सुंदर और गहरी है, विशाल वक्ष स्थलपर अनेकों प्रकार के बच्चों के आभूषण और वस्त्र सुशोभित है। वैसे पूरी रामचरित्र मानस में गोस्वामी जी ने भगवान के शरीर का कर्इ बार वर्णन किया है जो बहुत ही रोचक है। आजकल जिम का जिस प्रकार से चलन बढ़ गया है, उससे पता चलता है कि शरीर कि फिटनेस को लेकर लोग ज्यादा जागरुक हुए हैं रही सही कसर कुछ ऐसे हीरों लोगों ने पूरी कर दी है। जो अकसर अपनी बॉडी दिखाया करते हैं।

तमाम लोग जब किसी जिम के अंदर प्रवेश करते हैं तो उन्हें अरनॉल्ड स्वारजेनेगर, माइकल केफालियेनस, आदि जैसे बॉडी बिल्डरों के पोस्टर दिखाई देते हैं, एक बार उनके मन में आता है कि बॉडीबिल्डिंग इन विदेश‍ियों की देन है, जबकि भारत का सच तो यह है कि यह भगवान राम के जमाने से चली आ रही है। वीर हनुमान और उनके बाद भीम के शरीर की व्याख्या भी तमाम ग्रंथों में मिलती है।

खैर अगर आप भी पैक्स बनाने के लिये प्रेरित हो चुके हैं तो भारतीय रेल में कार्यरत और वेट लिफटर संजीव गोसार्इ की इस बात को जरूर याद रख‍ियेगा कि आजकल लोग पैक के दिवाने हैं और इसके लिए मेहनत भी करते हैं, लेकिन उनको, खानपान से लेकर शरीरिक व्ययाम पर ध्यान देना चाहिये। श्री गोसांर्इ ने बताया कि इन सबसे ज्यादा आवश्यक बात तो यह है कि ऐसे लोगों को उचित गुरु की देखरेख में यह काम करना चाहिये। बिना उचित मार्ग दर्शन के यह हानिकारक भी हो सकता है।

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