Democracy in Thailand: 12 बार तख्तापलट हो चुका है थाईलैंड में, अब बनेगी लोकतांत्रिक सरकार? जानें पूरा इतिहास
थाईलैंड में पिटा लिमजरोएनरात देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन उनकी राह सेना के रहते आसान नहीं होगी।

दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित 513,115 वर्ग किलोमीटर (198,115 वर्ग मील) में फैला सफेद हाथियों का देश थाईलैंड इन दिनों आम चुनावों के कारण दुनियाभर की सुर्खियों में है। क्योंकि यहां एक बार फिर से लोकतंत्र के लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। उम्मीद है कि 42 वर्षीय विपक्षी नेता पिटा लिमजरोएनरात देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। उनकी पार्टी मूव फॉरवर्ड यहां हुए संसदीय चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
पिटा लिमजरोएनरात ने 15 मई को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए लोगों से कहा कि वह थाईलैंड के 30वें प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आप चाहे मुझसे सहमत हों या असहमत, मैं आपका प्रधानमंत्री बनूंगा। आपने मुझे वोट दिया या नहीं, मैं आपकी सेवा करूंगा।
बता दें कि लोकतंत्र समर्थक विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ सेना समर्थित दल को चुनावों में हरा दिया है। इन चुनावों में थाईलैंड की जनता ने लोकतांत्रिक विपक्षी पार्टियों पर भरोसा जताया है। लेकिन, सालों से सेना के दवाब में चलने वाले देश में प्रधानमंत्री बनने के लिए अब भी बहुत से पेच हैं।
किस पार्टी को मिला कितना वोट?
बैंकॉक पोस्ट की खबर के मुताबिक 14 मई (रविवार) को हुए आम चुनावों में करीब 75 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटर्स ने वोट डाले। जिसमें 500 लोकसभा सीटों वाले थाईलैंड की संसद में मूव फॉरवर्ड पार्टी को 36 प्रतिशत वोट के साथ 152 सीटें प्राप्त हुईं। फेयु थाई पार्टी को 27 प्रतिशत वोट के साथ 141 सीटें मिली। उसके बाद तीसरे नंबर पर भूमजैथाई पार्टी को 70 सीटें मिली और चौथे नंबर पर पलांग प्रचारथ पार्टी रही जिसे 40 सीटें मिली हैं। जबकि निवर्तमान प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा की 'यूनाइटेड थाई नेशनल पार्टी' को करीब 11 प्रतिशत मत मिले और वह इस लिस्ट में पांचवे स्थान पर है। उन्हें 36 सीटें प्राप्त हुईं हैं।
सरकार बनाने के लिए सेना का अजीब कानून?
भले ही लोकतंत्र को लेकर विपक्षी दलों की अगुवाई करने वाले दल मूव फॉरवर्ड पार्टी और फेयु थाई पार्टी ने 500 सीटों में 293 सीटें जीत ली हैं लेकिन अभी भी यह नहीं कहा जा सकता है कि दोनों मिलकर सरकार बना ही लेंगे? क्योंकि थाईलैंड में सरकार बनाने के लिए सेना ने बहुत ही अजीब नियम बना रखे हैं।
थाईलैंड की संसद में 500 सीटें हैं और चुनाव परिणाम जारी होने के बाद अब जुलाई महीने में संसद की बैठक होगी। इस संसद सत्र में 500 नये सांसदों के अलावा 250 सीनेट के सदस्य भी रहेंगे, जो मिलकर सरकार का गठन करेंगे। थाईलैंड की यही प्रक्रिया वहां लोकतंत्र का गला घोंट रही है। क्योंकि, सीनेटर्स जो होते हैं उसका चयन सेना अथवा सैन्य सरकार करती है। यानि 250 सीनेटर्स कौन होंगे, यह सेना तय करेगी। इसलिए जाहिर सी बात है, वह सेना का ही साथ देंगे। ऐसी स्थिति में अब चुनाव जीतकर भी एमएफपी और फू थाई पार्टी को छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर होना पड़ेगा। इस हिसाब से देखें तो 500+250 यानि 750 में से प्रधानमंत्री बनने के लिए नेशनल असेंबली से 376 वोट चाहिए होंगे।
2017 में लाया गया था नया संविधान
6 अप्रैल 2017 को थाईलैंड में 20वां संविधान लाया गया। नये संविधान ने चुनाव प्रक्रिया में सुधारों की शुरुआत करते हुए संसदीय चुनावों के संचालन का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके तहत थाई संसद में प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की तरह सीनेट सदस्य जनता द्वारा सीधे नहीं चुने जाएंगे।
नये संविधान के तहत 250 सीटों के सदस्यों में से 194 सीनेटरों का चयन वर्तमान सत्ताधारी सैन्य सरकार द्वारा किया जाएगा, जिसे नेशनल काउंसिल फॉर पीस एंड ऑर्डर (एनसीपीओ) के रूप में भी जाना जाता है। वहीं छह सीटें सशस्त्र बलों के नेताओं, सुप्रीम कमांडर, रक्षा मामले के स्थायी सचिव और राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख के लिए आरक्षित हैं। शेष 50 सीनेटरों को विशेष पैनल द्वारा चुना जाता है और इनमें 10 पेशेवर और सामाजिक समूह हैं। जिनमें नौकरशाह, शिक्षक, न्यायाधीश, किसान और निजी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक की विस्तृत पृष्ठभूमि की जांच होती है, इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा इन्हें अनुमोदित किया जाता है।
इस नये संविधान में यह भी तय किया गया कि नया सीनेट नवनिर्वाचित प्रतिनिधि सभा के साथ बैठक करेगा। इसके अलावा थाईलैंड के अगले प्रधानमंत्री को चुनने के लिए सदन के सभी 500 सदस्यों के साथ-साथ 250 गैर-निर्वाचित सीनेटर भी वोट में शामिल होंगे। इस तरह जिस उम्मीदवार को संसद के दोनों सदनों में संयुक्त बहुमत प्राप्त होता है, उसे प्रधानमंत्री के रूप में चुना जाएगा।
प्रयुत चान ओचा को चुनौती देने वाले नेता कौन हैं?
इस चुनाव में मूव फॉरवर्ड और फिऊ थाई जैसे दलों से प्रयुत चान-ओचा की पार्टी को कड़ी चुनौती दी है। दोनों पार्टियां सैन्य शासन का विरोध करती रही हैं। मूव फॉरवर्ड पार्टी का नेतृत्व पिटा लिमजरोएनरात कर रहे हैं, जबकि फेयु थाई पार्टी का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेतोंगतार्न शिनावात्रा कर रही हैं।
दरअसल साल 2006 में सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके पांच साल बाद साल 2011 में उनकी रिश्तेदार यिंगलुक शिनावात्रा प्रधानमंत्री बनी थीं, लेकिन 2014 में प्रयुत चान-ओचा ने तख्तापलट कर उन्हें भी सत्ता से हटा दिया था। उस समय प्रयुत चान-ओचा थाईलैंड की सेना के कमांडर-इन-चीफ थे और तख्तापलट के बाद से वह देश के प्रधानमंत्री है।
प्रधानमंत्री बनने पर प्रयुत ने बदला संविधान
प्रयुत चान-ओचा प्रधानमंत्री पद पर रहने के बाद साल 2017 में संविधान को बदल दिया फिर 2019 में चुनाव करवाया। इस चुनाव में फेयु थाई पार्टी सबसे अधिक सीट जीती थीं लेकिन उसके चिर प्रतिद्वंद्वी सेना समर्थित पलांग प्रचारथ पार्टी ने प्रयुथ चान-ओचा के साथ गठबंधन कर लिया और वो फिर से प्रधानमंत्री बन गये। उसके बाद एक अब फिर चुनाव हुआ है और इस बार प्रयुत चान-ओचा और उसे समर्थन देने वाली पार्टी को ज्यादा सीटें नहीं मिली हैं। हालांकि, उसे सीनेटर्स के वोट जरूर मिल सकते हैं।
1932 से अब तक 12 बार हुआ तख्तालपट
वाशिंटगट पोस्ट की रिपोर्ट की माने तो साल 1932 के बाद से अब तक थाईलैंड में 12 बार तख्तापलट किया जा चुका है। 1932 से यहां ज्यादातर सैन्य शासन रहा है। बीच-बीच में लोकतांत्रिक सरकारें भी आई हैं। 1990 के बाद से लोकतंत्र मजबूत होता हुआ भी दिखा लेकिन यहां सैन्य प्रभाव खत्म नहीं हुआ। साल 1932, 1933, 1947, 1951, 1957, 1958, 1971, 1976, 1977, 1991, 2006 और 2014 में सेना ने तख्तापलट किया था।
थाईलैंड का राजा रहेगा प्रमुख?
आज भी थाईलैंड में संवैधानिक राजशाही है। 2017 में नये संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि थाईलैंड हमेशा सरकार के लोकतांत्रिक शासन में राज्य के प्रमुख के रूप में राजा के अभिप्राय को दृढ़ता से कायम रखने का इरादा रखता है। हालांकि, राजा के पास कुछ खास शक्तियां नहीं दी गई है। चक्री वंश के 10 राजा महा वाजीरालोंगकोर्न अभी राजगद्दी पर 2016 के अंत से विराजमान हैं।
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