Deaths of Russians: क्या है रूसी नेताओं और अमीरों की रहस्यमयी मौतों का राज?

कम्युनिस्ट देशों में पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ बोलने वालों को हमेशा के लिये शांत कर दिया जाता है। रूस भी अभी तक साम्यवादी तानाशाही की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया है।

Deaths of Russians secret of mysterious deaths of Russian leaders

Deaths of Russians: हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विरोध करने वाले एक राजनेता पावेल एंतोव की रहस्यमयी मौत हो गयी। गौरतलब है कि यह घटना उड़ीसा के रायगढ़ में हुई। दरअसल, पावेल भारत में अपना 65वां जन्मदिन सेलिब्रेट करने आये हुये थे। यूक्रेन से युद्ध शुरू होने के बाद पावेल कई मौकों पर पुतिन की आलोचना कर चुके थे। सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि पावेल एंतोव राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक पार्टी से जुड़े रहे। लेकिन इस साल जून में पावेल एंतोव ने यूक्रेन हमले को लेकर पुतिन का विरोध किया था।

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तरह की रहस्यमयी मौतों में रूस की खुफिया एजेंसियों और उनके जासूसों का हाथ हो सकता है। SVR, FSB और FSO, GUSP यह सभी रूस की खुफिया एजेंसियां हैं। ये एजेंसियां अपनी पूर्ववर्ती KGB से निकली हैं और आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा ये एजेंसियां उच्च पदस्थ नेताओं को सुरक्षा देने का भी काम करती हैं। काले सूट पहने और कानों में इयरफोन लगाये इनके ऑफिसर्स परछाईं की तरह दिन-रात राष्ट्रपति पुतिन के साथ रहते हैं।

वैसे पुतिन का विरोध करने वालों के इस तरह मरने की खबर सामने आना अब कोई बड़ी बात नहीं रह गयी है क्योंकि हम आपको ऐसी ही अनेक घटनाओं के बारे में बतायेंगे जिसमें राष्ट्रपति पुतिन का ज्यादा विरोध करने वालों को रहस्यमयी मौत का शिकार होना पड़ा।

खुद भी जासूस रह चुके हैं राष्ट्रपति पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को सोवियत संघ के लेनिनग्राड में हुआ था, जिसे अब सेंट पीटर्सबर्ग कहा जाता है। कहा जाता है कि बचपन में पुतिन की अक्सर अपने से बड़े लड़कों से लड़ाई होती रहती थी। इसी वजह से उन्होंने मुकाबला करने के लिये जुड़ो सीखा। 1975 में पुतिन ने सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी KGB को जॉइन किया। इसके बाद 1980 में उन्हें जर्मनी के ड्रेसडेन में एजेंट के तौर पर तैनात किया गया था।

करीब 16 सालों तक जासूसी का काम करने के बाद पुतिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सक्रिय तौर पर राजनीति में आ गये। इसके बाद 1991 में व्लादिमीर पुतिन का रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन से संपर्क स्थापित हुआ और राजनीति में वे अपनी जगह बनाते चले गये। 1999 में येल्तसिन ने पुतिन को रूस का प्रधानमंत्री बनाया। 31 दिसंबर 1999 को येल्तसिन ने राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया और पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। 26 मार्च 2000 को पुतिन ने पहला राष्ट्रपति चुनाव जीता। इसके बाद मार्च 2004 में पुतिन दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गये। 2012 में तीसरी बार और मार्च 2018 में पुतिन चौथी बार राष्ट्रपति बने।

जुलाई 2020 में पुतिन ने रूस के संविधान में संशोधन कर दिया। इस संशोधन से पुतिन को 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने की ताकत मिल गयी है। पुतिन 2024 में फिर से दो बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकते हैं। रूस में 2024 के बाद 2030 में राष्ट्रपति चुनाव होंगे। इस तरह पुतिन चाहें तो 2036 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

पहले हुई कई मौतें भी रहस्य में

बोरिस नेम्तसोव - 2015 में यूक्रेन में रूस की सैन्य भागीदारी के खिलाफ एक रैली में शामिल होने के कुछ घंटों के बाद ही रूस के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता बोरिस नेम्तसोव की गोली मार कर हत्या कर दी गयी। नेम्तसोव ने साल 2011 में चुनाव में हुए घोटाले को लेकर भी पुतिन के खिलाफ रैली निकाली थी।

सर्गेई मैग्निट्स्की - रूस में हो रही टैक्स चोरी को लेकर सर्गेई मैग्निट्स्की नाम के एक वकील की 2009 में पुलिस हिरासत में मौत हो गयी थी। पुलिस ने उसे इसलिये पकड़ा था क्योंकि सर्गेई मैग्निट्स्की ने सरकार के साथ-साथ पुलिस पर भी टैक्स चोरी का आरोप लगाया था।

नतालिया एस्टेमिरोवा - चेचन्या में अपहरण और हत्याओं पर रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार नतालिया एस्टेमिरोवा की भी गोली मारकर हत्या कर दी गयी। 28 फरवरी 1958 में जन्मी नतालिया ने मानवाधिकारों के हनन पर काम किया था। हैरान कर देने वाली बात यह है कि नतालिया की मौत के 9 दिन बाद मास्को के पुश्किन स्क्वायर में उनकी याद में एक कार्यक्रम रखा गया। इस कार्यक्रम के आयोजक सहित कुछ लोगों को शांति भंग करने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

अलेक्जेंडर लिट्विनेंको - अलेक्जेंडर लिटविनेंको पूर्व केजीबी एजेंट था। इसकी मौत साल 2006 में एक कप चाय पीने के तुरंत बाद हो गयी। ऐसा अंदेशा है कि अलेक्जेंडर को लंदन में दो रूसी एजेंटों ने जहर दिया था और वे रूसी एजेंट सरकार के इशारों पर काम करते थे।

सर्गेई युशेनकोव - सर्गेई युशेनकोव का मानना था कि 1999 में एक बम विस्फोट के पीछे पुतिन सरकार का हाथ था। जिसके बाद, सर्गेई की मॉस्को में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गयी।

अब तक 20 अमीर रूसी कारोबारियों की मौत

अब तक रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सबसे पहले लियोनिट सुलमैन की मौत हुई थी जो ट्रांसपोर्ट ऑफ गाजप्रोम नाम की कंपनी के डायरेक्टर थे। 30 जनवरी 2022 को अपने घर के बाथरूम में उनकी लाश मिली थी। इसके बाद फरवरी में तीन, मार्च में एक, अप्रैल में दो, मई में दो, जुलाई एक, सितंबर में पांच, नवबंर में एक और दिसंबर में चार मौतें हुई हैं। सभी अरबपतियों की मौत का एक सबसे बड़ा कनेक्शन यह है कि सभी राष्ट्रपति पुतिन के करीबी थे।

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    इनमें मिखाईल वॉटफोर्ड, लियोनिट सुलमैन, एलेकजेंड ट्यूकालोव, व्लादीस्लाव अयायेव, व्लादीमीर ल्याकशेव, सर्गेई प्रोतोसेन्या, यूरी वोरोनोव, रविल मैगानोव, एलेकजेंडर वुजाकाउ, दमित्री जेलेनोव, व्लादीमीर वाइडनोव, ग्रिगोरी कोचेनोव, व्याचेस्लाव तरण, पावेल चेलनिकोव, अनातोली गेराशचेंको, व्लादिमीर सुंगोर्किन, इवान पेचोरिन,रवील मगानोव, डैन रैपोपोर्ट, यूरी वोरोनोव जैसे बड़े बिजनेसमैन के नाम शामिल हैं।

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