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Death Anniversary of Dr Bhimrao Amebedkar: आधुनिक भारत के निर्माता 'बाबा साहब'

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    नई दिल्ली। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर उस शक्स का नाम है, जिन्होंने भारतीयों को एक नई पहचान और हक दिया, संविधान निर्माता और आधुनिक सोच के मालिक अंबेडकर साहब ने ही देश में पहली बार आरक्षण की नींव रखी थी। आज गुजरात चुनाव में पाटिदार एक नया संग्राम खड़ा किए हैं, लेकिन सच तो यही है कि आज जिसकी बातें वो कर रहे हैं, वो बातें बरसों पहले बाबा साहब ने कह रखी थी। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का मूल नाम भीमराव था। उनके पिताश्री रामजी वल्द मालोजी सकपाल महू में ही मेजर सूबेदार के पद पर एक सैनिक अधिकारी थे। अपनी सेवा के अंतिम वर्ष उन्‍होंने और उनकी धर्मपत्नी भीमाबाई ने काली पलटन स्थित जन्मस्थली स्मारक की जगह पर विद्यमान एक बैरेक में गुजारी।

    बाबा साहब

    बाबा साहब

    बाबा साहब के नाम से लोकप्रिय अंबेडकर विधिवेत्ता ,अर्थशास्त्री ,राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया। श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे।

    1990 में, भारत रत्न

    1990 में, भारत रत्न

    उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने विधि ,अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञानं के शोध कार्य में ख्याति प्राप्त की, जीवन के प्रारम्भिक करियर में वह अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे एवम वकालत की। बाद का जीवन राजनीतिक गतिविधियों में बीता। 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। 1990 में, भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मरणोपरांत अम्बेडकर पर सम्मानित भी किया गया था।

    15 अगस्त 1947

    15 अगस्त 1947

    अपने सत्य लेकिन विवादास्पद विचारों के बावजूद अंबेडकर की छवि एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी जिसके कारण जब, 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने बाबा साहेब को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    संविधान मसौदा समिति

    संविधान मसौदा समिति

    29 अगस्त 1947 को, अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। उनके द्वारा तैयार किया गया संविधान पाठ में संवैधानिक गारंटी के साथ व्यक्तिगत नागरिकों को एक व्यापक श्रेणी की नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा प्रदान की।

     26 जनवरी 1950

    26 जनवरी 1950

    संविधान पाठ में धार्मिक स्वतंत्रता, अस्पृश्यता का अंत और सभी प्रकार के भेदभावों को गैर कानूनी करार दिया गया। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया।

    Read Also: Biography: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन दर्शन

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    English summary
    December 6 is observed every year all over India as Mahaparinirvan Din, the death anniversary of Dr Babasaheb Ambedkar. He was an economist, politician and social reformer and was considered as The Father of the Indian Constitution.

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