Dattopant Thengadi Jayanti: कौन थे दत्तोपंत ठेंगड़ी जिन्होंने देश के सबसे बड़े मजदूर और किसान संगठन बना दिए?
Dattopant Thengadi Jayanti, भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी की आज 102वीं जयंती है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दत्तोपंत ठेंगड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने अधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा, "भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ के संस्थापक, श्रद्धेय स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की जयंती पर कोटिश: नमन् करता हूं! किसानों और असमर्थों के उत्थान के माध्यम से राष्ट्र की उन्नति के लिए आपने जो अद्वितीय कार्य किये हैं, उसके लिए यह पावन भूमि सदैव आपकी ऋणी रहेगी।"

कौन थे दत्तोपंत ठेंगड़ी?
दत्तोपंत ठेंगड़ी का जन्म 10 नवंबर 1920 को महाराष्ट्र के वर्धा के आरवी गांव में हुआ। उनका वास्तविक नाम दत्तात्रेय ठेंगड़ी था। स्वदेशी और मजदूरों के हितों पर भारत सरकार ने ठेंगड़ी को उनके सामाजिक कार्य के लिए पद्म भूषण भी दिया लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया था। ठेंगड़ी ने सौ से भी अधिक छोटी बड़ी पुस्तकों का लेखन भी किया और राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर उनके अनेक भाषण आज भी पढ़े और सुने जाते हैं।
समाज एवं राष्ट्र सेवा में समर्पित जीवन
दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, ग्राहकों, वकीलों, आर्थिक विकास एवं पर्यावरण के हितों में काम करने वाले अनेक संगठनों की स्थापना की और संस्थापक सदस्य रहे। गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी संगठन आज राष्ट्र व्यापी स्वरूप ले चुके हैं और प्रत्येक संगठन से लाखों की संख्या में लोग जुड़े हुए है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संस्थापक सदस्य रहे दत्तोपंत ठेंगड़ी ने अपने जीवन काल में भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, पर्यावरण मंच, स्वदेशी जागरण मंच जैसे अनेक संगठनों की स्थापना की थी। इनके अलावा ठेंगड़ी अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत और भारतीय विचार केंद्र जैसे संगठनों के संस्थापक सदस्य भी रहे।
स्वतंत्रता संग्राम में वे 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' के सक्रिय सदस्य रहे। मजदूर संगठन का काम सीखने के लिए उन्होंने 'इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस' में भी काम किया और इसके कार्यकारी सचिव की भूमिका भी निभाई।
वर्ष 1964 से 1976 तक ठेंगड़ी भारतीय जनसंघ की तरफ से राज्यसभा सांसद रहे। ठेंगडी ने 1975 में आपातकाल विरोधी आंदोलन के दौरान अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अनेक राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों का मार्गदर्शन भी किया।
वैश्वीकरण के एकतरफा स्वरूप का विरोध
दत्तोपंत ठेंगड़ी वैश्वीकरण के एकतरफा स्वरूप के समर्थन में नहीं थे। 1990 से 2000 के दौर में जब भारत अमीर देशों के दवाब में वैश्वीकरण की नीति को अपना रहा था तब ठेंगड़ी ने भारत के हित में आर्थिक नीतियों पर राष्ट्रीय सहमति हेतु 'स्वदेशी जागरण मंच' नाम का संगठन बनाया। दत्तोपंत ठेंगड़ी का मानना था कि पश्चिमी देश केवल पूंजी का वैश्वीकरण करना चाहते हैं क्योंकि वह उनके पास अधिकता में हैं लेकिन भारत जैसे देश के पास श्रम की उपलब्धता है, उसका वैश्वीकरण क्यों रोका जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्म-निर्भर भारत अभियान" के पीछे दत्तोपंत ठेंगड़ी की ही विचारधारा है। उन्होंने साल 2020 में अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, "मैं दत्तोपंत ठेंगड़ी जी को उनकी जन्मशताब्दी के विशेष अवसर पर नमन करता हूं। उन्हें राष्ट्रीय प्रगति और हमारे श्रमिकों के कल्याण के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।"
दत्तोपंत ठेंगड़ी की 14 अक्टूबर 2004 को मृत्यु हो गई। देश विदेश के कई बड़े राजनेता और समाजसेवी उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें स्मरण करते हुए कहा था कि "ठेंगडीजी से मेरा पुराना नाता रहा है। मैं भोपाल की बैठक में मौजूद था जिसमें भारतीय मजदूर संघ बनाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि "ठेंगड़ी जी ने जो कुछ भी लिखा है, उसे हम सभी को पढ़ना चाहिए। मुझे लगता है कि यह लंबे समय तक हमारा मार्गदर्शन करेगा"।
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