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India Post Payments Bank: बढ़ रहा है पोस्ट ऑफिस से चल रहे भारतीय डाक भुगतान बैंक का उपयोग

जहां पारंपरिक भारतीय बैंक लोगों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं, वहीं आईपीपीबी आमजन के अंदर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है और भारत के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार ऊंचाईयों को छू रहा है।

customers use of Indian Postal Payment Bank of post office banking benefits

India Post Payments Bank: वित्तीय वर्ष 2023-24 की प्रारंभिक बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं भारत सरकार ने पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) योजना के लिए वर्ष 2023 की अप्रैल-जून तिमाही में ब्याज दर को 0.70 प्रतिशत बढ़ा दिया है। यह अभी तक 7 प्रतिशत थी। इस प्रकार टैक्स सेविंग एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर भारतीय डाक विभाग अधिकतम 7.70 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। जबकि बैंकों में अधिकतम 7.60 प्रतिशत ब्याज दर है। यानि लंबी अवधि के जमा धन पर भारतीय डाक विभाग अपने ग्राहकों को बैंकों से भी ज्यादा ब्याज दर दे रहा है और यह दर 1 अप्रैल 2023 से ही लागू है।

भारतीय डाक विभाग

ईस्ट इंडिया कंपनी ने क्रांतिकारियों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा 1766 में 'कंपनी मेल' नाम से डाक सेवा प्रारंभ की। वॉरेन ने ही 1774 में कोलकाता के अंदर एक प्रधान डाकघर बनवाया। जबकि 1 अक्टूबर 1854 में तत्कालीन वायसराय लार्ड डलहौजी ने उस समय के 701 डाकघरों को मिलाकर इस डाक सेवा का केंद्रीकरण किया तथा रेल डाक सेवा का भी प्रारंभ इसी वर्ष हुआ।

वहीं 1877 में पार्सल सेवा, 1879 में पोस्ट कार्ड, 1880 में मनीआर्डर, 1911 में एयरमेल सेवा, 1935 में इंडियन पोस्टल आर्डर, 1972 में पिन कोड़ व 1986 में स्पीडपोस्ट का शुभारंभ हुआ। फिलहाल भारतीय डाक सेवा 1.56 लाख से भी अधिक डाकघरों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डाक प्रणाली है। जिसमें से लगभग 75 प्रतिशत डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।

भारतीय डाक भुगतान बैंक (आईपीपीबी)

भारतीय डाक भुगतान बैंक, भारतीय डाक विभाग द्वारा संचालित पेमेंट बैंक है। जिसकी शुरूआत 1 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। पेमेंट बैंक - वे बैंक होते है जो एक सीमित स्तर तक ही बैंकिंग सुविधा देते हैं। जैसे चालू खाता व बचत खाता खोलना, लिमिट में पैसा जमा करना, निकालना व ट्रांसफर करना, एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड के साथ-साथ ऑनलाईन अथवा मोबाईल बैंकिंग आदि की सुविधा भी देते हैं। इसके अलावा भी भारतीय डाक भुगतान बैंक अन्य बैंकों की सुविधाएं भी अपने ग्राहकों को उलब्ध कराता है, जिसमें वह भारतीय बैंकों के एक प्रतिनिधि (एजेंट) के रूप में कार्य करता है।

आज जहां व्यक्ति एक मोबाईल क्लिक पर ही बैंकिग की लगभग सभी सुविधाएं प्राप्त कर रहा है, तो इस टैक्नॉलोजी में भारतीय डाक भुगतान बैंक कहां तक सफल होता है, यह एक देखने वाली बात है। 1 सितंबर 2018 में 650 शाखाओं व 3250 सेवा केंद्रों के साथ इसकी शुरूआत हुई। जो वर्तमान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 136,078 डाकघर बैंकिंग एक्सेस प्वाइंट्स पर चल रही है। साथ ही साथ द्वार सेवा बैंकिंग प्रदान करने के लिए 2 लाख से भी अधिक पोस्टमैन/ग्रामीण डाक सेवक कार्यरत है।

आईपीपीबी के ग्राहकों व जमा धन का बढ़ता दायरा

अपने पहले वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत तक आईपीपीबी में ग्राहकों की संख्या 55.7 लाख पहुंच गई, जिनके खातों में ₹95 करोड़ (31 मार्च 2019 तक) जमा हुए। वहीं वर्ष 2019-20 में ग्राहकों की संख्या बढ़कर 2.36 करोड़ पहुंच गई तथा खातों में जमा धन में भी काफी उछाल आया, जो ₹855 करोड़ हो गया।

वर्ष 2020-21 में कोरोना महामारी के उपरांत भी आईपीपीबी के प्रति काफी रूझान देखा गया। उस दौरान आईपीपीबी के ग्राहकों की संख्या 83 प्रतिशत बढ़कर ₹4.31 करोड़ हो गई तथा जमा धन में भी 169 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई, जो ₹2300 करोड़ हो गयी।

इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी यह वृद्धि जारी रही। जिसके कारण आईपीपीबी के ग्राहक 22.04 प्रतिशत बढ़कर 5.26 करोड़ तक पहुंच गये तथा जमा धन भी 60.48 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ ₹3691 करोड़ रूपये हो गया।

आईपीपीबी का भुगतान में भी बढ़ा क्षेत्र

अब अगर हम आईपीपीबी के तहत लेनदेन की बात करें तो दिसंबर 2018 तक एनईएफटी (NEFT) से 20695 ट्रांजेक्सन द्वारा ₹120.706 करोड़ की निकासी की गई तथा 5943 ट्रांजेक्सन द्वारा ₹20.196 करोड़ द्वारा जमा किये गये।

वहीं दिसंबर 2022 तक एनईएफटी द्वारा ग्राहकों ने 497161 ट्रांजेक्सन से ₹19366.74 करोड़ रूपये की निकासी तथा 1553692 ट्रांजेक्सन से ₹9698.46 करोड़ रूपये जमा किये गये।

मार्च 2023 तक निकासी की ट्रांजेक्सन तो घटी, लेकिन राशि की निकासी में काफी वृद्धि दर्ज की गयी। यह विगत महीनें 442876 ट्रांजेक्सन से ₹22234.19 करोड़ की निकासी थी। हालांकि इस महीने जमाकर्त्ताओं में काफी वृद्धि हुई और 1874464 ट्रांजेक्सन द्वारा ₹10073.34 करोड़ जमा किये गये।

आईपीपीबी व बैंक में अंतर

भारतीय डाक भुगतान बैंक कॉमर्शियल बैंक

आईपीपीबी एक प्रकार से पेमेंट (भुगतान) बैंक है, जहां चालू व बचत खाते तो खुलते हैं लेकिन लोन व क्रेडिट कार्ड नहीं दिया जाता। भारतीय बैंक लोगों के चालू व बचत खाते खोलने के साथ-साथ उन्हें लोन व क्रेडिट कार्ड भी प्रदान करते हैं।

आईपीपीबी लोगों को लगभग 3 लाख डाकियों द्वारा बैंकिंग सुविधा घर-घर तक प्रदान करती है। अधिकतर सरकारी बैंकों की तरफ से ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में निजी बैंक ऐसी सुविधाएं देते हैं।

आईपीपीबी में जीरो बैलेंस पर खाता खोलने की सुविधा मिलती है। जिस कारण ग्राहक को खाता रखरखाव पर कोई जुर्माना नहीं देना पड़ता। अधिकांशतः बैंक न्यूनतम जमा राशि 1000 से लेकर लाख रुपये लेते हैं। यह राशि खाते में कम होनेपर खाताधारक पर जुर्माना भी लगाया जाता है। कुछ मामलों जैसे जनधन खातों के अंतर्गत न्यूनतम राशि रखना अनिवार्य नहीं है।

आरबीआई के दिशा-निर्देशानुसार आईपीपीबी में दिन की समाप्ति पर अधिकतम 1 लाख रूपये अपने बचत खाते में रख सकते है। अगर 1 लाख से ज्यादा होता है तो उसको डाकघर बचत खाते में भेजा जा सकता है। भारतीय बैंकों में बचत खाते में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।

आईपीपीबी अपने ग्राहकों को चेक बुक नहीं देता। बैंक अपने ग्राहकों को चेक बुक प्रदान करते हैं।

आईपीपीबी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने का एक अच्छा विकल्प है। भारतीय बैंक अधिकतर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में हैं।

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