सिनेमा के शौक और सियासत के बीच माफिया बने डीपी यादव के अपराधों की पूरी कुंडली
नई दिल्ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और आपराधिक दुनिया में कुछ साल पहले तक खासा दखल रखने वाला बाहुबली डीपी यादव इन दिनों हत्या के एक मामले में जेल में बंद है। डीपी यादव का बड़ा बेटा विकास और भांजा विशाल यादव भी नीतीश कटारा हत्याकांड में जेल की सलाखों के पीछे हैं।

फिल्मों के शौकीन डीपी की फिल्मी कहानी
डीपी यादव के सितारे इन दिनों भले ही गर्दिश में हों लेकिन एक वक्त था जब नोएडा के शर्फाबाद में एक मामूली किसान के घर पैदा हुए इस शख्स के एक इशारे पर वेस्ट यूपी की राजनीति करवट बदल लेती थी। एक मामूली दूध के कारोबारी से पश्चिमी लेकर यूपी, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक में अपने बाहुबल का खौफ रखने वाले डीपी यादव की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है।
अकूत संपत्ति के मालिक और मजबूत कद-काठी के डीपी यादव को अपनी जवानी के दिनों में फिल्मों मे काम करने का भी बड़ा शौक था। कहा जाता है कि अक्सर डीपी यादव ट्रेन पकड़कर मुंबई चला जाया करता था। फिल्मों की दुनिया में जब डीपी यादव को कोई मुकाम नहीं मिला तो उसने पश्चिम यूपी में ही अपने पैर जमाने का फैसला किया।

दूध की डेयरी से 'खून' के सौदे तक
डीपी के कैरियर की शुरुआत हुई गाजियाबाद के जगदीश नगर में दूध की डेयरी से लेकिन डीपी को असली पहचान शराब के कारोबार से मिली। 1970 में डीपी यादव ने अवैध शराब का कारोबार शुरू किया। इस कारोबार ने रफ्तार पकड़ी और डीपी ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया। इसके बाद डीपी यादव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। शराब के कारोबार ने डीपी पर नोटों की बारिश करनी शुरू कर दी। दौलत बढ़ी तो क्राइम का ग्राफ भी साथ-साथ बढ़ने लगा। कारोबार और वर्चस्व को बढ़ाने की धुन में उसके हाथ खून से रंगते चले गए।

जुर्म के साथ खौफ भी बढ़ता गया
1990 की शुरुआत में डीपी के ठेके की शराब पीने से कुछ लोगों की मौत हो गई। 1992 में डीपी यादव के ऊपर दादरी के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या का आरोप लगा। लगातार बढ़ रहे मामलों के बीच डीपी यादव के खिलाफ हत्या के नौ मामले दर्ज किए गए। इनके अलावा हत्या के प्रयास के तीन, डकैती के दो, अपहरण और फिरौती के कई मामलों समेत, उत्पादन शुल्क एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हुए। यही नहीं, उस पर गैंगस्टर, आतंकी और विघटनकारी गतिविधियों के मामले में भी केस दर्ज हुए।

सपा के सहारे सियासी दुनिया में पहला कदम
कानून के शिकंजे से बचने और रसूख बनाए रखने के लिए डीपी के साथियों ने सलाह दी कि राजनीतिक सुरक्षा के बिना अब आगे चलना मुश्किल होगा। बस फिर क्या था, डीपी यादव ने सियासत की दुनिया में भी कदम रख दिया। डीपी यादव ने मुलायम सिंह यादव से दोस्ती बढ़ाई और सपा का दामन थाम लिया। सपा की साइकिल पर सवार डीपी यादव ने 1989 में विधानसभा का चुनाव जीता और मुलायम मंत्रिमंडल में जगह बनाई। इसके बाद डीपी का वर्चस्व बढ़ता गया और उसके खिलाफ लगे दर्ज मुकदमों की फाइलें दबती गईं।
शराब के कारोबार से आगे बढ़कर डीपी यादव ने शुगर मिल, पेपर मिल, होटल, रिसॉर्ट, टीवी चैनल, स्कूल, कॉलेज, खदान और कंस्ट्रक्शन के काम में हाथ डाला। राजनीतिक रसूख और बाहुबल के जरिए डीपी यादव का रुतबा लगातार बढ़ता जा रहा था।

नीतीश कटारा हत्याकांड से लगा बड़ा झटका
डीपी यादव को सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब साल 2002 में देश के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने उसके बेटे विकास यादव को दोषी करार दिया। डीपी यादव के बेटे विकास यादव और भांजे विशाल यादव को 25 साल की सजा सुनाई गई है।
2004 में डीपी यादव ने भाजपा का दामन थामा और राज्यसभा सांसद बन गया। हालांकि आलोचना होने पर भाजपा ने कुछ समय बाद उसे पार्टी ने निकाल दिया। डीपी यादव लोकसभा का सदस्य भी बना।

जब डीपी यादव बन गया यूपी का सबसे अमीर नेता
2007 में उसने यूपी में राष्ट्रीय परिवर्तन दल नाम से पार्टी बनाई और कुछ उम्मीदवार भी उतारे। विधानसभा चुनाव में बदायूं की सहसवान सीट से वो खुद जीता और इसी जिले की बिसौली सीट से उसकी पत्नी उर्मिलेश यादव विधायक बनी। हालांकि अक्तूबर 2011 में चुनाव खर्च का ब्यौरा न देने के चलते चुनाव आयोग ने उसकी पत्नी की सदस्यता रद्द कर दी। चुनाव के दौरान डीपी यादव ने कुल 26 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की, जिसके आधार पर वह उस वक्त यूपी का सबसे अमीर नेता बताया गया।

अखिलेश यादव ने डीपी को नहीं दिया मौका
2009 में डीपी यादव मायावती की बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गया और लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन वह चुनाव हार गया। उसने 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा छोड़ दी। डीपी ने सपा में फिर से शामिल होने के लिए हाथ-पैर मारे लेकिन अखिलेश यादव ने डीपी यादव को पार्टी में लेने से इंकार कर दिया। वह 2012 के चुनाव में अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।

2015 में सुनाई गई उम्रकैद की सजा
कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल में डीपी यादव को रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया। हालांकि हर बार वो कानून के शिकंजे से बचता गया। 2015 में डीपी यादव को महेंद्र भाटी हत्याकांड में शामिल होने के कारण उम्रकैद की सजा सुनाई गई। फिलहाल डीपी यादव का छोटा बेटा कुणाल कारोबार संभाल रहा है।
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