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Cockroach Startups: क्या हैं कॉकरोच स्टार्टअप, और क्यों यूनिकॉर्न को छोड़ निवेशक दे रहे इन पर ध्यान

स्टार्टअप की दुनिया में अब कॉकरोच स्टार्टअप ने जगह बनानी शुरू कर दी है, क्योंकि यूनिकॉर्न की ओर निवेशकों का ध्यान कम होना शुरू हुआ है।

Cockroach Startups What are cockroach startups, and why investors are paying attention

2016 में देश में कुल स्टार्टअप की संख्या महज 471 थी लेकिन 2022 तक इनकी संख्या बढ़कर 72,993 हो गयी। इस आंकड़े से आसानी से समझा जा सकता है कि भारत में स्‍टार्टअप की एक क्रांति आ चुकी थी। इसके बाद 2022 में ही मंदी और महंगाई का दौर आया और इसका असर फंडिंग पर भी पड़ा। दरसअल, 2021 में स्टार्टअप्स को मिली 41 अरब डॉलर की फंडिंग 2022 में घटकर 26 अरब डॉलर रह गयी। इसी के चलते देश में कॉकरोच स्टार्टअप बढ़ने लगे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इनमें विपरीत हालात में भी खर्च में कटौती करके कारोबार को बढ़ाने की क्षमता होती है।

क्या होता है कॉकरोच स्टार्टअप
विज्ञान के अनुसार कॉकरोच, डायनासोर से भी 32 करोड़ साल पहले से इस धरती पर मौजूद हैं। कॉकरोच की एक खूबी होती है कि वे किसी भी तरह की स्थिति को सहन कर सकते हैं। यहां तक कि बिना सिर के भी एक कॉकरोच 7 दिनों तक जीवित रह सकता है। यह बिना खाने के भी 30 दिन तक जिंदा रह सकते हैं। ठीक इसी तरह 'कॉकरोच स्टार्टअप' भी कम तनख्वाह, कम खर्चे और कम बजट वाले कारोबार होते हैं। साथ ही बाजार की स्थितियों में बदलाव के साथ ये भी बदलते हैं। इनमें जल्द ही कैश-फ्लो पॉजिटिव बनने की संभावना होती है। वहीं अगर आप के पास एक रियल प्रोडक्ट या सर्विस है तो आप अपने बिजनेस को हर मुसीबत में बचा सकते हैं।

पैसा बचाने में माहिर
किसी भी स्टार्टअप को खड़ा करने में पैसा खर्च करना होता है लेकिन कॉकरोच स्टार्टअप फिक्स्ड एसेट में इंवेस्ट करने से बचते हैं। इसके फाउंडर अपने लिये वर्किंग स्पेस को खरीदने के बजाय को-वर्किंग स्पेस को रेंट पर लेकर पैसा बचाते हैं। इस तरह से बचे पैसों से किसी टेलेंटेड एम्प्लोई को हायर कर सकते है। कॉकरोच स्टार्टअप का नेचर एडप्टेबल होता है क्योंकि उनके पास एक रियल प्रोडक्ट और सर्विस होती है, जो उन्हें मुसीबत में भी सर्वाइव करने की ताकत देती है।

रेवेन्यू ग्रोथ पर जोर
कॉकरोच स्टार्टअप का फोकस हमेशा रेवेन्यू ग्रोथ पर होता है। इसके लिए यह अपने प्रॉडक्ट या सर्विस से जल्द पैसा बनाने की कोशिश में रहते हैं। इनका यह उत्पाद या सेवा मुश्किल हालात में भी पैसा बनाने में लगा रहता है। एक बात और कि कॉकरोच स्टार्टअप तेजी से ग्रोथ नही करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे स्टार्टअप के फाउंडर पैसा नहीं कमाना चाहते हैं। इसका मतलब यह है कि वे अपने पैसे को इंवेस्ट करने के लिए सही समय और सही कंडीशन का इंतजार करते हैं।

इन्वेस्टर हो रहे जागरूक
एक तरफ जहां स्टार्टअप कंपनियों को यूनिकॉर्न होने के लिये एक बिलियन डॉलर या उससे अधिक के मूल्यांकन की जरूरत होती है। इन कंपनियों का झुकाव विकास, प्रसिद्धि और धन की ओर अधिक होता है। साथ ही इन तीनों कारकों के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। मगर बढ़ती आर्थिक गिरावट के कारण निवेशक अब अपने पैसे के बारे में अधिक जागरूक हो गये हैं। निवेशक अब किसी और विश्वसनीय ऑप्शन की तलाश कर रहे हैं। यह विश्वसनीयता कॉकरोच स्टार्टअप्स के भीतर है। क्योंकि ये स्टार्टअप किसी भी परिस्थिति को संभालने में सक्षम होते हैं।

ये होता है यूनिकॉर्न स्टार्टअप
जब कोई कंपनी जो एक छोटे से आइडिया के साथ शरू की गई हो। वह तरक्की करती है और कंपनी को फायदा होता है। एक समय आता है जब उस कंपनी की वैल्यूएशन 1 बिलियन या इससे अधिक हो जाती है तो यह स्टार्टअप यूनिकॉर्न कहलाता है।

आंकड़ों की बात करें तो भारत में 2020 में 11 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न के क्लब में शामिल हुए । इसके बाद 2020 के अंत तक देश में कुल यूनिकॉर्न की संख्या 33 पहुंच गयी थी। फिर 2021 में 44 नए यूनिकॉर्न बने। वर्ष 2022 की बात करें तो इस समय देश में 100 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप हो चुके हैं। नियो बैंकिंग प्लेटफॉर्म 'ओपन' भारत का 100 वां यूनिकॉर्न स्टार्टअप है।

जमाना कॉकरोच बनने का
यूनिकॉर्न कंपनियों ने बाजार में अपना हिस्सा बना लिया है लेकिन अब पूंजी बाजार से लगभग निकल चुकी है। उसके साथ ही बाजार में जो आर्थिक गिरावट आई है, उससे यूनिकॉर्न कंपनियों का तेज ग्रोथ का सपना खत्म होता दिख रहा है। इसलिए इस समय आपको कॉकरोच की तरह बनने की जरूरत है। आर्थिक बाजार जुए के खेल की तरह है। कुछ भी कभी भी बदल सकता है। इसलिए किसी भी स्टार्टअप को शुरू करने से पहले अपने आप से पूछें कि क्या आप जरूरत पड़ने पर अपना या अपने स्टार्टअप का बैकअप लेने में सक्षम हैं? यदि नहीं, तो कॉकरोच की तरह शांत और धैर्यवान तरीके से अपना स्टार्टअप चुन सकते हैं।

कॉकरोच स्टार्टअप में ध्यान देने वाली कुछ बातें
कॉकरोच शब्द का उपयोग एक ऐसे स्टार्टअप के लिये किया जाता है, जिसमें खर्चों पर नियंत्रण द्वारा फंडिंग में मंदी के दौरान जीवित रहने की क्षमता होती है। इसमें महत्वपूर्ण ये है कि इसमें एक निवेशक को कुछ बातों पर ध्यान देना होता है। इसमें (1) रणनीति के हिस्से के रूप में स्थिरता और सामाजिक प्रभाव पर विचार करना, (2) धैर्य रखना और 2-3 साल में बाहर निकलने की उम्मीद न करना और (3) आपके ज्ञान और नेटवर्क के रूप में कॉकरोच स्टार्टअप इन्वेस्टर्स को स्मार्ट मनी प्रदान कर सकता है।

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