Chinese Manjha: कितना खतरनाक है चाइनीज मांझा, पक्षी-इंसान दोनों के लिए बना मुसीबत

पूरे देश में चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध लगा हुआ है, बावजूद इसके यह देशभर में चोरी-छिपे बिक रहा है। हर साल ये चाइनीज मांझा हजारों पक्षियों और अनेक लोगों की मौत का कारण बनता है। हालांकि, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पास इससे जुड़े आंकड़े अलग से नहीं हैं।

Chinese Manjha

बीते सप्ताह ही दिल्ली सरकार ने लोगों से अपील की है कि चाइनीज मांझे का इस्तेमाल न करें। यदि कोई इसका इस्तेमाल या बिक्री करते हुए पाया जाता है, उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।

दरअसल पूरे दिल्ली में ये मेटल कोटेड मांझे का इस्तेमाल 15 अगस्त के करीब जोर पकड़ लेता है। लिहाजा एक बार ये कोटेड मांझा किसी की गर्दन तक पहुंच गया तो उसकी जान पर बन आती है। इसी मेटल कोटेड मांझे को चाइनीज मांझा कहते हैं।

क्या होता है 'किलर मांझा' या चाइनीज मांझा?

भारत में चाइनीज मांझे को किलर मांझा भी लोग कहते हैं क्योंकि एक बार ये किसी के गर्दन या पक्षी के पंखों पर लग जाये तो काट देता है। चीनी मांझे में 5 तरह के केमिकल और कई धातुओं का प्रयोग होता है। चाइनीज मांझे को नायलॉन के धागे में मैटेलिक पाउडर मिलाकर बनाया जाता है। नायलॉन के धागे पर कांच और लोहे को पीस कर नायलॉन के धागे पर पॉलिश (धार) लगाई जाती है।

चाइनजी मांझा (धागा) प्लास्टिक जैसा दिखता है और स्ट्रेचेबल होता है। इसे खींचते हैं तो टूटने के बजाय बढ़ जाता है। इसे काटना मुश्किल होता है। इसीलिए पतंग उड़ने वाले बच्चे या लोग इसे पसंद करते हैं। वहीं कल तक ये मांझा चाइना से आया करता था। जबकि अब ये मांझा भारत में भी बनने लगा है।

कैसे खतरनाक है चाइनीज मांझा?

ये चाइनीज मांझा मानसून के दौरान भी खराब नहीं होता है। मेटल युक्त इस मांझे से करेंट लगने का भी खतरा होता है। बिजली कंपनी के हवाले से माने तो अगर इस चाइनीज मांझे से 66 या 35 केवी की एक लाइन ट्रिप हुई तो करीब 2500 घरों में बिजली गुल होने का खतरा बढ़ जाता है। रेलवे लाइन पर यह चाइनीज मांझा गिरता है तब भी सप्लाई में बहुत बाधा आती है।

दिल्ली के एक पक्षी अस्पताल के डॉक्टर हरअवतार सिंह के हवाले से बताया गया कि उनके पास पक्षियों के घायल होने के ज्यादातर मामले चाइनीज मांझे की वजह से आते हैं। कई बार मांझे की वजह से पक्षियों की हड्डियां तक टूट जाती हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त करीब आ रहा है इसलिए ऐसे मामले और बढ़ेंगे।

अवैध तरीके से होती है बिक्री

इस चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री दिल्ली समेत देश के कई शहरो में धड़ल्ले से हो रही है। सोशल मीडिया के जरिये भी इसकी बिक्री की जाती है। खरीदने वाला दुकानदार को सिर्फ मजबूत कोड वर्ड प्लास्टिक कहता है। दुकानदार खुद ही उसे ये मांझा दे देता है। वहीं सोशल मीडिया पर Mono Kite, Hero और Cobra के नाम से कोड हैं, जिसके सहारे प्रतिबंधित मांझे की खरीद फरोख्त की जाती है। इस चाइनीज मांझे की कीमत 200 से 1000 रुपये तक होती है।

चाइनीज मांझे को लेकर क्या हैं नियम?

दिल्ली में 2017 से ही चाइनीज मांझा बैन है। दिल्ली पर्यावरण विभाग ने 10 जनवरी 2017 को नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके मुताबिक पतंग उड़ाने के लिए नायलॉन, प्लास्टिक और अन्य तरह के सिंथेटिक सामान से तैयार मांझों की बिक्री, उत्पादन, स्टोरेज, सप्लाई और उसे आयात करने पर पूरी तरह बैन लगाया गया था।

साथ ही पतंग उड़ाने के लिए दिल्ली में शार्प (तेज) मांझे जैसे कि कांच, मेटल, केमिकल या अन्य चीजों से तैयार मांझों का उपयोग नहीं किया जायेगा। हालांकि, पतंग उड़ाने के लिए सूती मांझों पर कोई रोक नहीं है। वहीं सूती मांझों में भी शार्प मेटल, कांच, चिपचिपा पदार्थ, मांझों को सीधा रखने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले सामान का इस्तेमाल नहीं करना है।

एनजीटी ने पूरे देश में लगाई रोक

दिल्ली में बैन के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जुलाई, 2017 में चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री पर देश भर में प्रतिबंध लगा दिया था। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाना देश की परंपरा रही है, लेकिन खतरनाक मांझे से पशु-पक्षी और लोग बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं। इस चाइनीज मांझे पर बैन लगाया जाता है।

5 साल की होती है सजा

चाइनीज मांझा पर एनजीटी का आदेश आने पर दिल्ली सरकार ने 2017 में ही एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसके मुताबिक चाइनीज मांझे रखने और इस्तेमाल करने पर पांच साल की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। या फिर दोनों सजा हो सकती है।

चाइनीज मांझा से हुई मौतों का आंकड़ा

सच ये है कि एनसीआरबी के पास चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। जबकि दिल्ली पुलिस ने साल 2022 में जुलाई-अगस्त में दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपनी एक स्टेटस रिपोर्ट में माना था कि वह अगस्त 2019 से जुलाई 2022 तक दर्ज हुए छह मौत और आठ जख्मी होने के कुल 14 केस में से किसी भी मामले को सॉल्व नहीं कर सकी थी। साथ ही पुलिस ने बताया था कि साल 2017 से 31 जुलाई 2022 तक चाइनीज मांझा बेचने या इस्तेमाल करने के 256 केस दर्ज हुए थे।

कितना बड़ा है चाइनीज मांझा का कारोबार?

सच तो ये है कि चाइनीज मांझा का कारोबार कितने का है, इसका भी कोई आंकड़ा किसी सरकारी संस्था या किसी प्राइवेट संस्था के पास नहीं है। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई से 5 अगस्त 2023 के बीच चीनी मांझा की बिक्री के संबंध में उत्तरी जिला पुलिस द्वारा कुल 56 मामले दर्ज किये गये हैं। इसी अवधि में बाहरी जिले द्वारा 54 मामले दर्ज किये गये है। इस बीच, दक्षिण पश्चिम जिले में 32 मामला, दक्षिण पूर्व जिले में 15 मामला, पश्चिम जिले में 22 मामला, उत्तर पूर्व जिले में 15 मामला, मध्य जिले में 17 मामले दर्ज किये गये।

14,000 से अधिक चाइनीज मांझे की रील जब्त

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2022 में दिल्ली में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री के खिलाफ एक अभियान चलाया गया था। तब 14,000 से अधिक चाइनीज मांझे की रील जब्त की गयी थी और लगभग 137 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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