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Jack Ma: कौन सी गलती की सजा भुगत रहे हैं Alibaba ग्रुप के जैक मा?

Jack Ma: चीन की प्रसिद्ध अलीबाबा कंपनी की स्थापना करने वाले जैक मा इन दिनों बुरे दौर से गुजर रहे हैं। जैक मा का अलीबाबा ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन फिनटेक कंपनियों में से एक है। अलीबाबा ग्रुप की सहयोगी कंपनी एंट ग्रुप पर चीन की पीपुल्स बैंक ने 1 अरब डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया है।

अलीबाबा की इस फाइनेंशियल टेक कंपनी पर पीपुल्स बैंक ऑफ चाईना ने उपभोक्ता संरक्षण, मनी लॉन्ड्रिंग और भुगतान संबंधी उल्लंघन की वजह से यह जुर्माना लगाया गया है। एंट ग्रुप ने अपने बयान में कहा है कि वह बैंक द्वारा लगाये गये जुर्माने की शर्तों का पालन करेगा। उसने वित्तीय आयोग की तरफ से बताये जरूरी सुधार संबंधी काम को पूरा कर लिया है।

china For which mistake is Jack Ma of Alibaba Group facing punishment?

पहले भी भरना पड़ा रिकॉर्ड जुर्माना

एंट ग्रुप में जैक मा की कंपनी अलीबाबा ग्रुप की 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इस साल 6 जुलाई से और 6 प्रतिशत बढ़ गयी है। ऐसा पहली बार नहीं है, जब अलीबाबा ग्रुप पर चीन के वित्तीय आयोग ने जुर्माना लगाया है। इससे पहले चीनी वित्तीय आयोग ने नवंबर 2020 में एंट के विशाल आईपीओ पर रोक लगा दी थी।

इस रोक की वजह से अलीबाबा को रिकॉर्ड 2.8 बिलियन डॉलर का एंटीट्रस्ट जुर्माना देना पड़ा था। जबकि सिस्टर कंपनी राइड हेलिंग को 1.2 बिलियन डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा था। अली बाबा ग्रुप के संस्थापक जैक मा को इसकी वजह से अब तक भारी नुकसान पहुंच चुका है।

कौन है जैक मा?

चीनी बिजनेसमैन जैक मा का जन्म 10 सितंबर 1964 में हुआ था। जून 2023 तक जैक मा चीन के चौथे सबसे अमीर शख्स हैं, जिनके पास $34.5 बिलियन की संपत्ति है। बुरे दौर से गुजरने के बावजूद ब्लूमबर्ग बिजनेस इंडेक्स में जैक मा दुनिया के 39वें सबसे अमीर शख्स है। उनका जन्म झीजियांग प्रांत के हांगझिआउ में हुआ था। उन्होंने 1988 में हांगझिआउ यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की है।

साल 1994 में जैक मा इंटरनेट बिजनेस में आ गये थे। तब से लेकर अब तक जैक मा ने ग्लोबली फिनटेक कंपनियों में बड़ा निवेश किया है। 1998-99 में जैक मा चीनी सरकार की आईटी कंपनी के हेड रह चुके हैं। आईटी कंपनी छोड़ने के बाद जैक मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर अलीबाबा ग्रुप की स्थापना की थी।

अलीबाबा ग्रुप और जैक मा का सफर

1999 में अलीबाबा ग्रुप की स्थापना एक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस वेबसाइट के तौर पर हुई थी। बाद में अलीबाबा ग्रुप ने चीनी बाजार में ई-कॉमर्स के साथ-साथ, हाई टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन पेमेंट सॉल्यूशन के तौर पर कदम रखा। 2017 में जैक मा फॉर्च्यून वर्ल्ड टॉप-50 बिजनेस लीडर्स की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थे। उन्हें चीनी बिजनेस सर्कल का ग्लोबल एम्बेसडर माना जाता था।

जैक मा ने कई स्टार्ट-अप कंपनियों को फंड किया। उनकी अगुवाई में अलीबाबा ग्रुप ने कई भारतीय कंपनियों में भी निवेश किया था। साल 2018 में जैक मा ने अलीबाबा ग्रुप के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था। जैक मा ने एजुकेशनल वर्क के लिए इस्तीफा लिया था। जैक मा के बाद डेनियल झांग ने अलीबाबा ग्रुप के चेयरमैन का पद संभाला है।

जैक मा का बुरा दौर

अलीबाबा ग्रुप और जैक मा का बुरा दौर साल 2020 में शुरू हुआ, जब अलीबाबा ग्रुप के बड़े आईपीओ पर चीनी बैंक ने रोक लगा दी। इस रोक की वजह से कंपनी को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा। जैक मा अक्टूबर 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक पब्लिक अपीयरेंस से दूर हो गए। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जैक मा के गायब होने की वजह चीनी बैंक और आयोग के खिलाफ दिया गया बयान था, जिसमें जैक मा ने चीन के वित्तीय आयोग और बैंक की आलोचना की थी।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार के विरोध में दिए गए बयान की वजह से जैक मा को पब्लिक अपीयरेंस से दूर होना पड़ा था। तीन महीने गायब रहने के बाद 20 जनवरी 2021 में जैक मा ने एक वीडियो लिंक के द्वारा रूरल टीचर इनिशिएटिव में हिस्सा लिया था। फरवरी 2021 में जैक मा को चीन के हैनन आईलैंड पर सन वैली गोल्फ रिसार्ट में देखा गया था।

आम जिंदगी जी रहे हैं जैक मा

मार्च 2021 में चीनी सरकार ने जैक मा और अलीबाबा ग्रुप को कुछ मीडिया कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने का आदेश दिया था। इन मीडिया कंपनियों में हांगकांग की साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट शामिल था। अक्टूबर 2021 में जैक मा को स्पेन के एक शॉपिंग स्टोर पर देखा गया था। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2022 में जैक मा जापान की राजधानी टोकियो में एक आम जिंदगी जीते हुए नजर आए। इसके बाद मार्च 2023 में जैक मा को एक बार फिर से चीन के हांगझाउ में देखा गया। अब जैक मा की कंपनी अलीबाबा ग्रुप एक होल्डिंग कंपनी बन चुकी है, जिसकी 6 सब्सिडियरीज हैं, जिन्हें 6 इंडिपेंडेंट फर्म में बदल दिया गया है। अब जैक मा जापान के टोकियो यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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