Unwed Mothers: चीन में कुंआरी मां को मिली मान्यता
Unwed Mothers: चीन ने सिंगल मदर या कुंवारी माँ को मान्यता दे दी है। अब बिन ब्याही माँ भी अपने बच्चे का रजिस्ट्रेशन करा सकती है, बच्चे को स्कूल में दाखिला दिला सकती है, माँ के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सरकारी सहायता प्राप्त कर सकती है और सबसे बड़ी बात वह समाज में अपना अस्तित्व छुपाने के बजाय प्रदर्शित कर सकती है। मालूम हो कि चीन भी एशियाई मुल्कों की तरह परिवार आधारित समाज है, जहां लड़कियों के लिए पति पत्नी का सम्बन्ध बहुत मायने रखता है।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने यह बड़ा फैसला देश की जनसंख्या बढ़ाने के लिए लिया है, क्योंकि चीन की युवा पीढ़ी बच्चे पैदा करने के प्रति उदासीन हैं और देश में बुजुर्गों की संख्या बढ़ती जा रही है। चीन ने पहले 2016 में दो संतान की अनुमति दी और फिर आगे बढ़कर, 2021 में तीन संतानों को जन्म देने का अधिकार नागरिकों को दे दिया। अब चीन जन्म दर बढ़ाने के लिए कुंआरी मां को मान्यता दे रहा है तो यह बड़ा और हैरान कर देने वाला बदलाव है।

कौन होती हैं कुंआरी मां
वह युवती या महिला जिसने शादी न की हो, लेकिन उसने संतान को जन्म दिया हो, वह अपने बच्चों की कुंआरी मां होती है। आम भाषा में इन्हें अनवेड मदर या सिंगल मदर भी कहते हैं। ऐसी मांओं के बच्चों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इनका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन सकता था। बचपन में लगने वाले स्वास्थ्य टीके की अनुमति नहीं होती थी। इन्हें विदेश यात्रा करने की अनुमति भी नहीं मिलती थी। सरकारी स्कूलों में प्रवेश प्रतिबंधित होता था और इनको किसी भी तरह की बीमा पॉलिसी भी नहीं मिलती थी। सरकार की सब्सिडी का भी इनको कोई लाभ नहीं मिलता था।
क्या है नया बदलाव
हाल ही में चीन के सिचुआन (Sichuan), गुआंग्डोंग (Guangdong), अनहुई (Anhui) और शानक्सी (Shaanxi) जैसे राज्यों ने नियमों में रियायतें दी हैं। इन राज्यों ने अपने यहां अविवाहित माताओं या कुंआरी मां को बच्चों का रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति दे दी है। यानी उनका जन्म प्रमाण पत्र बनने लगा है। इससे उन्हें दूसरी सुविधाएं मिलने का रास्ता खुल गया है। इस पहल का नतीजा यह निकला कि दूसरे राज्यों ने भी ऐसा करने की तैयारी शुरू कर दी है।
निर्धारित उम्र पर ही हो सकता है विवाह
चीन में विवाह के लिए जरूरी है कि लड़के की उम्र कम से कम 22 वर्ष हो, और लड़की की उम्र कम से कम 20 वर्ष हो। इस उम्र से पहले प्रेम संबंध होने पर अगर संतान होती है तो वह कानूनन संतान नहीं मानी जाती है। ऐसे में अधिकतर प्रेमी जोड़े अनचाही संतान से बचने के इरादे से जरूरी ऐहतियात का पालन करते हैं और प्रेगनेंसी प्रिकॉशन लेते हैं।
प्रेमी जोड़ों के अलगाव पर भी सिंगल मदर
कई बार ऐसा भी होता है जब प्रेमी जोड़े शादी करने की उम्र होने पर भी शादी नहीं करते हैं, लेकिन आपसी सहमति से संतान को जन्म दे देते हैं। बाद में वे अगर अलग हो जाते हैं तो बच्चे के लिए उसकी मां सिंगल मदर ही मानी जाती है।
कुंआरी मां या सिंगल मदरहुड की जड़ क्या थी
इसको समझने के लिए इसका पुराना किस्सा जानना होगा। दरअसल चीन विश्व का सबसे बड़ी आबादी वाला राष्ट्र रहा है। बढ़ती आबादी कई तरह की समस्याएं पैदा कर रही थी, लिहाजा 1979 में चीन ने 'वन चाइल्ड पॉलिसी' लागू कर दी। यानी एक विवाहित जोड़ा सिर्फ एक ही संतान पैदा कर सकता था। चाहे वह बेटा हो या बेटी। एक से अधिक संतान के जन्म देने वाले पर भारी जुर्माना लगाया जाने लगा। नौकरी तक से बर्खास्तगी होने लगी थी। सिंगल मदरहुड की मान्यता का बीज यहीं से पड़ा।
'वन चाइल्ड पॉलिसी' ने हालात और बिगाड़ दिया
'वन चाइल्ड पॉलिसी' से देश में लैंगिक असमानता की स्थिति पैदा हो गई। यानी कई जगह लड़कियां ज्यादा हो गईं तो कई जगह लड़के अधिक हो गये। लिहाजा देश में कामकाजी युवाओं की भारी कमी पैदा हो गई और बुजुर्गों की संख्या तुलनात्मक रूप से काफी ज्यादा हो गई। 1980 के बाद जबरन गर्भपात कराने के सरकारी नियम ने हालात और बिगाड़ दिये। लिहाजा लैंगिक असमानता ने सामाजिक विषमता की स्थिति पैदा कर दी।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा बुरा प्रभाव
कामकाजी युवाओं की कमी ने चीन की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव डाला। विवश होकर सरकार ने साल 2016 में इस कानून को खत्म कर दिया। अब सरकार ने विवाहित जोड़ों को दो बच्चे पैदा करने की इजाज़त दे दी। सिर्फ इजाजत ही नहीं दी, बल्कि बढ़ावा भी दिया।
'खाओ, पीओ और मौज करो' की बिंदास जीवन शैली
चार दशकों से एक संतान पैदा करने के नियम से बंधे परिवार को अचानक दो संतानों को जन्म देने की छूट रास नहीं आई। कई परिवार अब रूढ़िवादी परंपरा को त्यागकर संतान को जन्म देने और पालने-पोषने के झंझट से ही बचना चाहते हैं। लिहाजा नई पीढ़ी इस छूट या इजाजत को गैरजरूरी मानते हुए खुद को किसी भी तरह के बंधन से मुक्त रखने की जीवन शैली अपनाने की ओर बढ़ रहा है। वह परिवार जैसी संस्थाओं से बंधने के बजाए खुद 'खाओ, पीओ और मौज करो' जैसी बिंदास जिंदगी जीना पसंद करता है।
बिना विवाह किये रखनी पड़ रही अनचाही संतान
देश में बिंदास पसंद प्रेमी जोड़ों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो पति-पत्नी जैसा जीवन जीते हैं, लेकिन विवाह नहीं करते हैं। परन्तु कई बार संयम नहीं बरतने और प्रेगनेंसी को रोकने के लिए जरूरी प्रिकॉशन नहीं लेने से ऐसा जीवन जी रहीं युवतियां गर्भवती हो जाती हैं और अनचाही संतानों की कुंआरी मां बनने को विवश होती हैं।
पहाड़ तोड़ने जैसा है बिना पिता की संतान पालना
'खाओ, पीओ और मौज करो' की जिंदगी वाले इन प्रेमी जोड़ों में अलगाव भी तेजी से हो रहा है। तब बिना पिता के ऐसी संतानों को पालना किसी भी कुंआरी मां के लिए पहाड़ तोड़ने जैसा कठिन काम हो जाता है। इन्हीं सब हालातों को देखते हुए सरकार न केवल अब इन्हें मान्यता दे रही है, बल्कि उनकी संतानों का जन्म रजिस्ट्रेशन भी होने लगा है। इससे इनको दूसरी तरह की सुविधाएं भी पाने का रास्ता खुल गया है।












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