Chandrayaan 2: जानिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ी ये खास बातें
बेंगलुरु। चांद की सतह पर लैंडर विक्रम की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया गया है और यही नहीं ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की एक थर्मल इमेज भी क्लिक की है, हालांकि अभी उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसरो प्रमुख ने रविवार को कहा कि टीम लैंडर विक्रम से कम्युनिकेशन स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रही है, उम्मीद है कि जल्द ही संपर्क स्थापित हो जाएगा, इसरो के वैज्ञानिकों की पूरी कोशिश अपने मिशन को पूरा करने की है इसलिए वो दिन-रात इसी प्रयास में जुटे हैं।
बात जब इसरो की हो रही है तो चलिए भारत के इस अंतरिक्ष संस्थान के बारे में विस्तार से जानते हैं कुछ जरूरी बातें...........

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है जिसका मुख्यालय बेंगलुरू (कर्नाटक) में है, संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी और वैज्ञानिक कार्यरत हैं।
- संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष सम्बधी तकनीकी ज्ञान उपलब्ध करवाना है, अंतरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी राकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना 15 अगस्त 1969 में की गई थी।
- तब इसका नाम 'अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति' (INCOSPAR) था।

आर्यभट्ट
- भारत का पहला उपग्रह, आर्यभट्ट,19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ द्वारा छोड़ा गया था, इसका नाम गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था।
- 7 जून 1979 को भारत का दूसरा उपग्रह भास्कर था, जो कि 445 किलो का था, पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था।
- 1980 में रोहिणी उपग्रह पहला भारत-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बन गया जिसे कक्षा में स्थापित किया गया।
- इसरो के वर्तमान निदेशक डॉ. कैलाशावदिवु सिवन हैं।

पहला राष्ट्र भारत
- इसरो ने 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा था, जिसने चन्द्रमा की परिक्रमा की।
- इसके बाद 24 सितम्बर 2014 को मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला मंगलयान (मंगल आर्बिटर मिशन) भेजा।
- सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया और इस प्रकार भारत अपने पहले ही प्रयास में सफल होने वाला पहला राष्ट्र बना।

इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित है इसरो
- दुनिया के साथ ही एशिया में पहली बार अंतरिक्ष एजेंसी में सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने के लिए इसरो चौथे स्थान पर रहा।
- इसरो को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 के इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के लगभग एक वर्ष बाद इसने 29 सितंबर 2015 को एस्ट्रोसैट के रूप में भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला स्थापित किया।












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