Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Surrogacy Law: सरोगेसी से पैदा हुए ब्रिटेन के बच्चे जान सकेंगे जैविक पिता का नाम

1 अक्टूबर, 2023 ब्रिटेन के उन बच्चों के लिए बहुत बड़ा दिन होगा, जिनका जन्म सरोगेसी प्रक्रिया से हुआ और अब वे 18 साल के हो गए हों। अब उन्हें कानूनन अपने जैविक पिता के बारे में जानकारी पाने का अधिकार होगा। वह जान सकेंगे कि आखिर किसने स्पर्म डोनेट किया था? उनका नाम क्या है? उनका पता और जन्म स्थान सबकुछ।

बीबीसी की हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1991 के बाद से ब्रिटेन में 70,000 से अधिक बच्चे सरोगेसी से पैदा हुए हैं। जब कोई दंपत्ति किसी कारण से मां-बाप नहीं बन पाते तो सरोगेसी का ऑप्शन चुनते हैं।

British children born through surrogacy will be able to know the name of the biological father

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में साल 2005 में स्पर्म डोनर को लेकर कानून में बड़े बदलाव किए गए थे। वहां कोई भी स्पर्म डोनर चोरी छिपे इस काम को अंजाम नहीं दे सकता है। कानून के मुताबिक डोनर के स्पर्म से जन्म लेने वाला बच्चे को हक होगा कि जब वह 18 साल का हो जाए, तब वो अपने जैविक पिता की पहचान जान सकता है। साल 2005 में इस बदले हुए कानून के नियम के मुताबिक इसका पहला चरण 1 अक्टूबर, 2023 को पूरा हो रहा है।

सरोगेसी क्या है?
सेरोगेसी को लेकर आसान शब्दों में कहें तो दूसरी महिला की कोख को प्रयोग में लेने को सरोगेसी कहा जाता है। मतलब एक कपल का बच्चा किसी दूसरी महिला की कोख में पलता है। सरोगेसी की सुविधा वे महिलाएं भी ले सकती हैं, जो व्यक्तिगत या शारीरिक समस्या के कारण खुद गर्भवती नहीं हो पातीं हैं। सरोगेसी दो तरह की होती है- पारंपरिक और गर्भकालीन।

पारंपरिक सरोगेसी- जिसमें पिता या स्पर्म डोनर के शुक्राणु का मिलन सरोगेट मां के अंडों से किया जाता है फिर डॉक्टर कृत्रिम रूप से शुक्राणु को सीधे सरोगेट महिला के गर्भाशय ग्रीवा, फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय में इंजेक्ट करता है। सरोगेट मां के गर्भ में भ्रूण का निर्माण होता है और फिर सरोगेट मां उस भ्रूण को नौ महीने तक अपने गर्भ में रखती है। इस मामले में सरोगेट मां ही बच्चे की जैविक मां होती है। लेकिन जिस मामले में पिता के शुक्राणु का उपयोग नहीं किया गया है और किसी अन्य पुरुष के स्पर्म का उपयोग हुआ हो, यानी स्पर्म डोनर हो तो फिर पिता आनुवंशिक रूप से बच्चे से संबंधित नहीं होता है।

गर्भकालीन सरोगेसी- इस सरोगेसी के तहत सरोगेट मां आनुवंशिक रूप से बच्चे से संबंधित नहीं होती है। यानी गर्भकालीन (जेस्टेशनल) सरोगेसी में सरोगेट मां के अंडों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। वह सिर्फ बच्चे को जन्म देती है। सरोगेट मां बच्चे की जैविक मां नहीं है। पिता के शुक्राणु और मां के अंडे को मिलाकर सरोगेट मां के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसमें आईवीएफ विधि से भ्रूण का निर्माण किया जाता है और सरोगेट मां के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस प्रकार, आईवीएफ का उपयोग पारंपरिक सरोगेसी में भी किया जाता है।

सरोगेसी को लेकर भारत में क्या है नियम?
दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां सरोगेसी को अवैध माना जाता है। पर भारत में सरोगेसी वैध है। यहां सरोगेसी मान्य है, लेकिन कुछ नियम कानून के साथ। सरोगेसी को लेकर नए नियम कानून भी बने हैं। ताकि, सरोगेसी को लोग व्यवसायिक रूप न दे सकें और इसका उपयोग जरूरतमंद कपल उठा सकें।

15 जुलाई 2019 को सरकार ने सरोगेसी रेगुलेशन बिल लोकसभा में पेश किया था। दिसंबर 2021 में ये बिल पास कर दिया गया और जनवरी 2022 में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया। नए सरोगेसी कानून, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार केवल विवाहित जोड़े ही सरोगेसी का सहारा ले सकते हैं। कोई भी अकेला पुरुष सरोगेसी का लाभ नहीं उठा सकता है। हालांकि, एकल महिलाएं इसका लाभ उठा सकती हैं लेकिन केवल तभी जब वो तलाकशुदा या विधवा हों और उनकी उम्र 35 से 45 वर्ष के बीच हो। साथ ही समलैंगिक व्यक्तियों को भी सरोगेसी इस्तेमाल करने की मनाही है।

क्या हैं सरोगेसी के नियम
• जो कपल बांझपन से जूझ रहे हों।
• जब किसी शख्स को गंभीर बीमारी के कारण गर्भधारण करना मुश्किल हो रहा हो।
• भारत का विवाह अधिनियम गे कपल्स की शादी को मान्यता नहीं देता है। इस कारण बच्चे पैदा करने के लिए समलैंगिक व्यक्ति सरोगेसी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।
• सरोगेसी को लेकर कॉन्ट्रैक्ट होने के बाद कोई भी महिला बच्चा पैदा होने तक सरोगेसी से इंकार नहीं कर सकती है और न ही अपनी मर्जी से गर्भ को खत्म कर सकती है।
• सरोगेसी में भ्रूण से मां-बाप का रिश्ता होना जरूरी है, या तो पिता से हो, या मां से हो या फिर दोनों से। इसका मतलब यह हुआ कि भ्रूण किसी और के होने की अनुमति नहीं है।
• भारतीय जोड़ा अगर किसी कारणवश देश के बाहर सरोगेसी की सुविधा लेते हैं तो इससे पैदा होने वाले बच्चे को भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।
• सरोगेसी से जन्मे बच्चे 18 वर्ष के होने पर यह जानने का अधिकार रखते हैं कि वे सरोगेसी से पैदा हुए हैं। वे सरोगेट मां की पहचान का पता लगाने का भी अधिकार रखते हैं।

भारत में सरोगेसी को लेकर कितना मिलता है पैसा
बीसीसी की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में किराए की कोख यानी सरोगेसी का बाजार लगभग 63 अरब रुपये से ज्यादा का है। अगर सरोगेट माता जुड़वां बच्चों को जन्म देती है तो उसे करीब सवा छह लाख रुपये मिलता है। वहीं यदि पहले ही गर्भ गिर गया तो उसे करीब 38,000 रुपये तक देकर विदा कर दिया जाता है। जबकि बच्चा चाहने वाले दंपति से अस्पताल हर सफल गर्भवास्था के लिए करीब 18 लाख रुपये तक लेता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+