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Khushwant Singh Birthday: औरतों को वासना की वस्तु कहने वाले मशहूर लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह की खास बातें

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    नई दिल्ली। देश के मशहूर पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार खुशवंत सिंह का आज 103वां जन्मदिन है। पद्म विभूषण से सम्मानित खुशवंत सिंह 'ट्रेन टू पाकिस्तान' और 'देल्ही' जैसी दर्जनों किताबों के लिए जाने जाते हैं। उनकी कलम ने कभी लोगों को काफी खुश किया तो कभी उनकी कलम ने लोगों को एक बड़ी बहस का मौका भी दिया। बेहद ही जिंदादिल लेखक खुशवंत सिंह खाने-पीने के काफी शौकिन और बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते थे जिसकी वजह से उन्हें कभी-कभी आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ता था। अपनी लेखनी में खुद खुशवंत सिंह ने माना था कि उनके लिए सुंदर महिलाएं हमेशा ही कमजोरी रही हैं। वह खुद कहते थे कि महिलाएं वासना की वस्तु हैं।

    किताब ‘खुशवंतनामा : दी लेसंस ऑफ माई लाइफ'

    किताब ‘खुशवंतनामा : दी लेसंस ऑफ माई लाइफ'

    इस बात का जिक्र खुशवंत सिंह ने अपनी किताब ‘खुशवंतनामा : दी लेसंस ऑफ माई लाइफ' में किया है। उनकी किताबों में अक्सर सेक्स, मजहब के लेकर टिप्पणी की जाती रही है जिसके लिए उन्हें कभी तो तालियां मिलीं तो कभी लोगों की गालियों से भी दो चार होना पड़ा।इसमें कोई शक नहीं कि खुशवंत सिंह की लेखनी प्रभावशाली थी। उनकी कलम दिल पर दस्तक दिया करती थी।

    खुशवंत सिंह की किताब 'ट्रेन टू पाकिस्तान'

    खुशवंत सिंह की किताब 'ट्रेन टू पाकिस्तान'

    2 फरवरी 1915 को पाकिस्तान के हदेली में जन्मे खुशवंत सिंह ने कभी परंपराओं की बेड़ियों में खुद को नहीं जकड़ा और खुद को एक नये सांचे में ढालते हुए नई पत्रकारिता को जन्म दिया। जो कि बेबाक थी, निडर थी और कभी-कभी विवादित भी।भारत-पाकिस्तान दोनों जगह बेहर लोकप्रिय खुशवंत सिंह की किताब 'ट्रेन टू पाकिस्तान' उनकी सबसे फेमस बुक है जिस पर फिल्म भी बन चुकी है।

     1974 पद्म भूषण और 2007 में 'पद्म विभूषण' से सम्मानित

    1974 पद्म भूषण और 2007 में 'पद्म विभूषण' से सम्मानित

    उनके अनुपम काम के चलते खुशवंत सिंह को 1974 पद्म भूषण और 2007 में 'पद्म विभूषण' से भी सम्मानित किया जा चुका है।एक पत्रकार के रूप में इन्होंने बहुत लोकप्रियता मिली 'भारत सरकार' के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी खुशवंत सिंह जी ने काम किया।

    लंदन से ही क़ानून की डिग्री ली

    लंदन से ही क़ानून की डिग्री ली

    खुशवंत सिंह जी ने 'गवर्नमेंट कॉलेज', लाहौर और 'कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी' मंक शिक्षा पाई थी। इसके बाद लंदन से ही क़ानून की डिग्री ली। उसके बाद तक वे लाहौर में वकालत करते रहे। खुशवंत सिंह जी का विवाह कंवल मलिक के साथ हुआ। इनके बेटे का नाम राहुल सिंह और पुत्री का नाम माला है।

    1951 में आकाशवाणी से जुड़े थे

    1951 में आकाशवाणी से जुड़े थे

    खुशवंत सिंह 1951 में आकाशवाणी से जुड़े थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र 'योजना' का संपादन किया। मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साप्ताहिक 'इल्लस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया' के और 'न्यू डेल्ही' के संपादक का भी काम भी उन्होंने 1980 तक संभाला। 1983 तक दिल्ली के प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक 'हिन्दुस्तान टाइम्स' के संपादक भी वह रहे।

    उपन्यासकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक

    उपन्यासकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक

    खुशवंत सिंह उपन्यासकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में विख्यात हैं। उनके अनेक उपन्यासों में प्रसिद्ध हैं- 'डेल्ही', 'ट्रेन टू पाकिस्तान', 'दि कंपनी ऑफ़ वूमन' और ‘खुशवंतनामा : दी लेसंस ऑफ माई लाइफ','सिक्खों का इतिहास' 'वोमेन: लव एंड लस्ट" रही है। इसके अलावा उन्होंने लगभग 100 महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं।

    सेक्स, मजहब को लेकर आलोचनाओं में रहें

    सेक्स, मजहब को लेकर आलोचनाओं में रहें

    अपने जीवन में सेक्स, मजहब और ऐसे ही विषयों पर की गई टिप्पणियों के कारण वे हमेशा आलोचना के केंद्र में बने रहे, उन्होंने खुद माना था कि औरतें उनकी कमजोरी हैं और उनकी नजर में औरतें वासना की वस्तु हैं, जिनकी कंपनी उन्हें अच्छी लगती है।

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    English summary
    Khushwant Singh would have turned 103-years-old today.Read Some interesting Facts About him.

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