Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Hajipur Seat: जहां पिता ने रचा इतिहास, अब बेटे ने ठोकी ताल; जानें हाजीपुर सीट का सियासी इतिहास

बिहार की सबसे हाईप्रोफाइल लोकसभा सीटों में से एक हाजीपुर लोकसभा सीट हमेशा से सुर्खियों में रही है। कभी इस सीट पर रामविलास पासवान की तूती बोलती थी। लेकिन, अब चाचा-भतीजे (पशुपति पारस और चिराग पासवान) की तनातनी ने इस सीट को देश की सबसे हॉट सीट बना दिया है।

रामविलास पासवान इस संसदीय सीट से 8 बार जीतकर संसद पहुंचे थे। आज इसी सीट पर चुनाव लड़ने के लिए रामविलास पासवान के भाई (पशुपति पारस) और बेटे (चिराग) के बीच की लड़ाई एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। वर्तमान में इस सीट से पशुपति कुमार पारस सांसद हैं।

Hajipur seat

दक्षिण में गंगा और पश्चिम में गंडक नदी के तट पर बसा यह शहर हाजीपुर आज केले, आम और लीची के उत्पादन के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। हाजीपुर, बिहार के वैशाली जिले में स्थित एक नगर (जिला) है। यह लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। हाजीपुर सीट में छह विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें हाजीपुर, लालगंज, महुआ, राजा पाकर, राघोपुर और महनार शामिल हैं। इनमें दो सीटों पर बीजेपी, एक पर कांग्रेस और तीन पर राजद का कब्जा है।

राम विलास पासवान का गढ़ रहा हाजीपुर

वैसे तो देश की आजादी के बाद सबसे पहले यहां 1957 में चुनाव हुए थे। इस लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार चुनाव हो चुके हैं। जिसमें 4 बार कांग्रेस, एक बार कांग्रेस (ओ), और अन्य सभी चुनावों में जनता पार्टी, या उससे निकले अन्य दल जीतते रहे हैं। बीजेपी और आरजेडी इस सीट पर आज तक खाता भी नहीं खोल सकी हैं। वैसे वर्तमान में यहां से लोक जनशक्ति पार्टी से सांसद पशुपति पारस हैं।

हालांकि, ये लोकसभा सीट किसी पार्टी के दबदबे के लिए नहीं जाती है। यह सीट हमेशा राम विलास पासवान के गढ़ के रूप में जानी जाती है। राम विलास पासवान 1977 में पहली बार यहां से जनता पार्टी के टिकट पर सांसद बने थे। तब से लेकर 2014 तक अलग-अलग पार्टियों के टिकट पर वे यहां से 8 बार सांसद बनकर संसद पहुंचे थे। राम विलास पासवान ने 1977, 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2014 में हाजीपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।

2024 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो हाजीपुर सीट से राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान अपनी पार्टी लोजपा (रामविलास) के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। जबकि उनके खिलाफ आरजेडी ने शिवचंद्र राम को मैदान में उतारा है। बताते चलें कि एलजेपी (आर) इस चुनाव में एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। हाजीपुर सीट से ही चुनाव लड़ने के लिए बीते महीने तक पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच की तनातनी ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं।

हाजीपुर लोकसभा का सियासी इतिहास

देश में 1951-52 में पहली बार लोकसभा के चुनाव हुए। लेकिन, हाजीपुर लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। शुरुआती चुनावों में इस सीट पर भी देश की अन्य लोकसभा सीटों की तरह कांग्रेस का ही दबदबा था। 1957 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर हाजीपुर से राजेश्वर पटेल पहली बार सांसद चुने गए थे।

इसके बाद 1962 लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के राजेश्वर पटेल ही सांसद बनें। लेकिन, 1967 के चुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार बदल दिया और यहां से कांग्रेस के टिकट पर वाल्मिकी चौधरी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस की अंदरूनी कलह के कारण राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के दो फाड़ हुए, जिसमें हाजीपुर सीट से 1971 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (संगठन) के उम्मीदवार दिग्विजय नारायण सिंह सांसद बनें।

रामविलास पासवान की एंट्री, रचा इतिहास

आपातकाल के बाद पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना हुआ था। हाजीपुर संसदीय क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं था। इस दौरान 1977 में ही हाजीपुर सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। तब भारतीय लोकदल ने युवा नेता रामविलास पासवान को मैदान में उतारा।

अपने पहले ही चुनाव में रामविलास पासवान ने इतिहास रच दिया। जिसके कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाया गया था। दरअसल इस चुनाव में रामविलास पासवान को 4,69,007 वोट (89.30% वोट दर) मिले थे। जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार बलेश्वर राम को 44,462 वोट (4.42% वोट दर) ही मिले। पासवान ने बलेश्वर राम को 4,24,545 वोटों के अंतर से हराया था। जो उस समय एक रिकॉर्ड था।

इसके बाद 1980 में जनता पार्टी (सेक्यूलर) के उम्मीदवार बनकर राम विलास पासवान मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। हालांकि, 1984 में लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरे पासवान को कांग्रेस के उम्मीदवार राम रतन राम ने 51,216 वोटों के अंतर से हरा दिया। लेकिन, 1989 में पासवान जनता दल के टिकट पर फिर उतरे और जीतकर संसद पहुंचे। ये जीत बहुत बड़ी थी क्योंकि पासवान ने कांग्रेस के महाबीर पासवान को 5,04,448 वोटों के अंतर से हराया था।

साल 1991 में पासवान ने ये सीट छोड़ दी। तब इस सीट से जनता दल के राम सुंदर दास झारखंड पार्टी के दासई चौधरी को 3,67,752 वोटों के अंतर से हराकर सांसद बने थे। लेकिन, 1996 में फिर से पासवान की एंट्री हुई और वे समता पार्टी के राम सुंदर दास को हराकर सांसद बने। 1998 लोकसभा चुनाव में भी रामविलास पासवान जनता दल के टिकट पर हाजीपुर से सांसद चुने गए। इसके बाद 1999 में रामविलास पासवान जदयू के टिकट पर हाजीपुर से जीत कर संसद पहुंचे।

पहली बार एलजेपी के टिकट पर बने सांसद

अक्टूबर 2000 में रामविलास पासवान ने अपनी खुद की पार्टी बनाई। जिसका नाम रखा 'लोक जनशक्ति पार्टी'। साल 2004 लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान ने अपनी ही पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे और तब उन्होंने जदयू के छेदी पासवान को 2,37,801 वोटों के अंतर से हरा दिया।

इसके बाद 2009 के चुनाव में हाजीपुर का माहौल बदला और पहली बार रामविलास पासवान को हाजीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। तब जदयू के वरिष्ठ नेता राम सुंदर दास ने पासवान को 37,954 वोटों के अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2014 में रामविलास पासवान ने कमबैक किया और कांग्रेस उम्मीदवार संजीव प्रसाद टोनी को 2,25,500 वोटों के अंतर से हराकर 8वीं बार लोकसभा के सांसद चुने गए।

हालांकि, 2019 में रामविलास पासवान ने ये सीट छोड़ दी और एलजेपी के टिकट पर अपने भाई पशुपति कुमार पारस को मैदान में उतारा। तब पशुपति पारस अपने निकट प्रतिद्वंदी राजद उम्मीदवार शिवचंद्र राम को 2,05,449 वोटों के अंतर से हराकर सांसद बने।

हाजीपुर सीट का जातीय समीकरण

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान हाजीपुर सीट पर 18,23,664 मतदाता थे। इनमें से 9,84,179 पुरुष मतदाता और 8,39,426 महिला मतदाता थीं। 59 मतदाता थर्ड जेंडर के थे। निर्वाचन क्षेत्र में 2,731 पोस्टल वोट थे। 2019 में हाजीपुर में सेवा मतदाताओं की संख्या 5,455 थी (5,218 पुरुष और 237 महिलाएं थीं)।

यहां पर जातीय समीकरण को देखें तो इस क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी काफी है। यहां सबसे ज्यादा 2.75 लाख यादव मतदाता हैं। जबकि 2.50 लाख पासवान, 2.50 लाख राजपूत, 1.50 लाख भूमिहार और 1.25 लाख के करीब कुशवाहा मतदाता हैं। कुर्मी और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 1.25 लाख और करीब 80 हजार रविदास जाति के मतदाता हैं। जबकि 9% के करीब मुस्लिम, क्रिश्चियन 0.06% और सिख, बुद्धिस्ट, जैन 3% के करीब हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+