UP Assembly Election 2017: BJP ने बढ़ाईं 'माया-मुलायम और शीला' की मुश्किलें!

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसा दांव चला है जिसके बाद सपा, बसपा समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखना लाजिमी है। पहले स्वामी प्रसाद मौर्या और अब सपा, बसपा और कांग्रेस के कुल आठ नेताओं के भाजपा में पलायन की खबरों ने राजनीतिक हलकों में भूचाल सा ला दिया है।

'माया और मुलायम' के लिए बड़ा गड्ढा खोद रहे हैं नीतीश?

Uttar Pradesh Assembly Elections: BIG BOOST! 8 MLAs from SP, BSP and Congress join BJP in Lucknow

पेश है ये रिपोर्ट-

सिर्फ 8 नहीं और 22 अन्य दलों के विधायकों पर बीजेपी की नजर

सूत्रों के मुताबिक बीएसपी के 3, कांग्रेस के 3 और एसपी के दो विधायक बीजेपी में शामिल होंगे। दावा किया जा रहा है कि अगले एक महीने में अलग-अलग पार्टियों के 22 विधायक बीजेपी में शामिल होंगे और आज 8 विधायकों को शामिल होना है।

कमजोर हो रहीं हैं बसपा सुप्रीमो मायावती

स्वामी प्रसाद मौर्या और आरके चौधरी के द्वारा बसपा का दामन छोड़ देने के बाद सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि अब बसपा किस तरह से वापसी कर पाएगी या ये संभव हो पाएगा भी कि नहीं ? कुल मिलाकर सवाल ही सवाल।

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BJP ने बढ़ाईं 'माया-मुलायम और शीला' की मुश्किलें!

BJP ने बढ़ाईं 'माया-मुलायम और शीला' की मुश्किलें!

मायावती की झुंझुलाहट

जिनके बीच बसपा को फंसाकर जनता के जहन में जीवित होने की तमाम संभावनाओं पर गहन चिंतन किया गया। पर, बड़े कद के नेताओं के पलायन के बाद जनाधार पर कुछ फीसदी ही सही लेकिन फर्क पड़ना लाजिमी है। ऐसे में मायावती की झुंझुलाहट साफ तौर पर दयाशंकर मसले में सामने आई। आखिर जिस भरोसे पर मायावती चुनाव जीतने का दम खम रखती हैं उसी समाज के नेताओं का पलायन लगातार भाजपा में जारी है। जो कि एक चिंताजनक बात है।

बसपा सुप्रीमो मायावती को फर्क तो पड़ता है!

हो सकता है कि इस पर हवाला इस बात का दिया जाए कि मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में बड़े कद के 26 नेताओं को बाहर कर दिया। जिसमें 13 मंत्री और दूसरे मंत्री स्तर के दर्जा प्राप्त लोग, सांसद और विधायक थे। लेकिन इसके बाद ऐसा नहीं है कि पार्टी पर प्रभाव नहीं पड़ा, जनाधार का प्रतिशत जो कि इन नेताओं के साथ जुड़ा हुआ था उन्होंने सपा से किनारा कर लिया।

सपा भी हांशिए पर

भाजपा की ओर रूख कर रहे 8 विधायकों में से 2 विधायक सपा के भी हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी के लिए भी चिंताजनक बात है। क्योंकि सत्तारूढ़ सपा लॉ एंड ऑर्डर समेत कई अन्य मुद्दों के लेकर जनता की नाराजगी का सामना कर रही है। ऐसे में सपा से नेताओं का टूटकर भाजपा में जुड़ना आगामी चुनावों में भाजपा को मजबूत मौका देने का काम करेगा।

अस्तित्व की लड़ाई में कांग्रेस को बड़ा झटका

जी हां अस्तित्व की लड़ाई। लोकसभा चुनाव के मोर्चे पर बुरी तरह से असफल हुई कांग्रेस लगातार अपने पुनर्जीवन के लिए मौका तलाश रही है। जिसमें कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर दिल-ओ-जान से जुटे हैं। लेकिन लोगों के पास कांग्रेस के नेताओं के साथ, कमजोर नीति, नीयत को लेकर आज भी ढ़ेर सारे सवाल हैं। फिर इस तरह से कांग्रेस के नेताओं का भाजपा में पलायन पीके की रणनीति पर सवालिया निशान बनकर ही उठेगा। जनता के जहन में कांग्रेस को लेकर अभी से सवाल हैं कि जब कांग्रेस के अपने ही लोग उस पर यकीन नहीं कर रहे तो भला जनता किस आधार पर उस पर यकीन करे।

दूसरों से गलबहियां करते करते अपनों से तो दूर नहीं हो रही है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी में जुड़ रहे नए नामों को लेकर एक खेमा तो उत्साहित नजर आ रहा है लेकिन पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि जब अन्य पार्टियों से प्रभावशाली नेता भाजपा में जुड़ेंगे तो निश्चित तौर पर प्रथमिकता उन्हें पहले दी जाएगी। हालांकि देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी किस योजना के तहत आगे बढ़ती है।

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