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Shaheed Diwas: भगत सिंह-सुखदेव और राजगुरु... इन्होंने बांधा कफन का सेहरा...

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    Bhagat Singh, Rajguru, Sukhdev को PM Modi की श्रद्धांजलि, Shaheedi Diwas पर नमन | वनइंडिया हिन्दी

    नई दिल्ली। आज है शहीदी दिवस, 1931 में आज ही के दिन शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। आजादी के इन मतवालों का जिक्र जब भी होता है तो हर भारतीय का सीना फक्र से चौड़ा और आंखें गर्व से नम हो जाती है। उम्र के उस पड़ाव जहां लोग अपने भावी जीवन के सपने देखते हैं वहां भारत माता के इन लालों ने आजादी से मोहब्बत करके मौत को अपनी दुल्हन बना लिया इसलिए ही स्वतंत्रता से इश्क करने वाले शहीद भगत सिंह का नाम कभी अकेले नहीं लिया जाता, उनके साथ राजगुरु और सुखदेव का भी जिक्र होता है।

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    शिवराम हरि राजगुरु

    शिवराम हरि राजगुरु

    आपमें से बहुत कम लोग जानते होंगे कि शिवराम हरि राजगुरु महाराष्ट्र के रहने वाले थे। उनका जन्म पुणे के पास खेड़ नामक गांव (वर्तमान में राजगुरु नगर) में हुआ था। बचपन से ही राजगुरु के अंदर जंग-ए-आज़ादी में शामिल होने की ललक थी। वे महाराष्ट्र के देशाथा ब्रह्मण परिवार से थे। उनके परिवार का शांत साधारण जीवन था, लेकिन उनके जीवन में अशांति तब आयी, जब होश संभालते ही उन्होंने अंग्रेजों के जुल्म को अपनी आंखों के सामने होते देखा और यहीं से उन्होंने प्रण किया कि वो अपनी भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराएंगे।

    देश का लाल सुखदेव थापर

    देश का लाल सुखदेव थापर

    ऐसी ही सोच देश लाल सुखदेव थापर की भी थी, इनका जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में श्रीयुत् रामलाल थापर और श्रीमती रल्ली देवी के घर पर 15 मई 1907 को हुआ था। सुखदेव और भगत सिंह दोनों 'लाहौर नेशनल कॉलेज' के छात्र थे। ताज्जुब ये है कि दोनों ही एक ही साल में लायलपुर में पैदा हुए थे और एक ही साथ शहीद हुए।

    भगत सिंह

    भगत सिंह

    भगत सिंह का जन्म पंजाब के किसान सरदार किशन सिंह के घर हुआ था, इनकी मां का नाम विद्यावती कौर था। 13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने एक पढ़ने लिखने वाले सिख लड़के की सोच को ही बदल दिया। लाहौर में स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने यूरोप के अलग अलग देशों में हुई क्रांति के बारे में अध्ययन किया। भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इसके बाद भगत सिंह पं.चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड़ गये थे। जिसके बाद इस संगठन का नाम हो गया था हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।

    भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया

    भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया

    1929 में भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ असेंबली में बम धमाके की योजना बनाई। बताया जाता है कि यह बम सिर्फ आजादी की लड़ाई के आगाज की सूचना अंग्रेजों के लिए पहुंचाना था। भगत सिंह और बटुकेश्वर ने एक-एक बम फेंका। धमाके में किसी की मौत नहीं हुई थी। भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में कैद रहने के दौरान भगत सिंह ने डायरी और किताबें भी लिखीं थी।

    मौत को गले लगाया

    मौत को गले लगाया

    अंग्रेजों के विरोध के चलते ही सुखदेव को भगत सिंह और राजगुरु के साथ फांसी की सजा हुई थी। 23 मार्च 1931 को सायंकाल 7 बजे सुखदेव, राजगुरु और भगत सिंह तीनों को लाहौर सेण्ट्रल जेल में फाँसी पर लटका दिया गया

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    English summary
    Bhagat Singh, Sukhdev Thapar, and Shivaram Rajguru are remembered on Martyrs’ Day 2017, here are some interesting facts about them.
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