जानिए क्या होगा अगर लागू हो गया जीएसटी- पूर्ण विवरण
आजकल हर तरफ जी.एस.टी. की चर्चा हो रही है। यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है। वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले लगभग सभी करों को इसके अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है। आइये पढ़ते हैं जीएसटी के आने के बाद क्या-क्या होगा।

कई का होंगे समाप्त
इसके लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट/सेल्स टैक्स, परचेज टैक्स, लग्ज़री टैक्स आदि समाप्त हो जाएंगे। ऐसा होने पर एक एकीकृत बाजार व्यवस्था अस्तित्व में आयेगी, एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान की आवाजाही लगातार बिना किसी बाधा के हो सकेगी। इससे लेन-देन (ट्रांजैक्शन) की लागत घटेगी, जिसके कारण खपत में बढ़ोतरी होगी और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को फ़ायदा होगा।
आम नागरिकों को होगा लाभ
इसी के साथ वर्तमान में उत्पाद/सेवा की सम्पूर्ण कीमत पर लगनेवाले टैक्स के बजाय, इस व्यवस्था में एक श्रृंखला में केवल वैल्यू-एडिशन पर टैक्स लगेगा। इन दोनों ही प्रक्रियाओं से टैक्स की कास्केडिंग (Cascading) का निराकरण होगा, जिसके परिणामस्वरूप कीमतों में घटोतरी होगी और आम नागरिकों को लाभ होगा।
इस व्यवस्था के अंतर्गत पूरे देश में एक समान दर से टैक्स लगाया जाएगा, तथा इससे काले धन को रोकने में मदद मिलेगी।
राज्यों को होगा फायदा
मौजूदा प्रणाली के विपरीत, जी.एस.टी. लागू होने के बाद ‘मैन्यूफैक्चरिंग प्लेस' की बजाय ‘कन्ज़्यूमिंग प्लेस' पर टैक्स लगेगा, जिससे उपभोग करने वाले राज्यों को लाभ प्राप्त होगा। इस प्रकार राज्यों के बीच असमानता कम होगी। साथ ही केंद्र सरकार ने इसके तहत राज्यों को होने वाले नुकसान की 5 वर्षों तक भरपाई करने का निर्णय लिया है।
नहीं होगी 100% कर चोरी
चूंकि इस व्यवस्था में हर स्तर पर अलग-अलग लोगों द्वारा टैक्स चुकाया जाएगा, इसलिए कोई भी एक साथ 100% कर की चोरी नहीं कर सकता। सरकार के पास हर स्तर पर चुकाए गए टैक्स का लेखा-जोखा होगा। साथ ही कर चोरी में पकड़े जाने पर, उसके 5 गुना तक की पेनाल्टी का भी प्रावधान है।
1 लाख करोड़ की आमदनी
जी.एस.टी. से सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रूपए सालाना की अतिरिक्त आमदनी होने की संभावना है, जिससे देश का भरपूर आर्थिक विकास होगा और रोजगार में बढ़ोतरी होगी।

तमाम करों से मिलेगी मुक्ति
कंपनियों को कई राज्यों में अनेक प्रकार के टैक्स चुकाने से मुक्ति मिलेगी, जिससे लागत घटेगी। साथ ही खपत में बढ़ोतरी से कंपनियों को फ़ायदा होगा। इसके अलावा आम नागरिकों को कोई भी वस्तु पूरे देश में एक ही कीमत पर मिलेगी।
क्या है कांग्रेस की मांग
इन फ़ायदों के बावजूद कांग्रेस अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर इस बिल का विरोध कर रही है। पहला, कांग्रेस ‘इंटर-स्टेट' ट्रेड टैक्स की 1 प्रतिशत की दर को खत्म कराना चाहती है। दूसरा, कांग्रेस की मांग है कि टैक्स की ऊपरी सीमा को 18 प्रतिशत के स्तर तक सीमित रखा जाए। तीसरा, कांग्रेस यह भी चाहती है कि जी.एस. टी से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए, पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल पंचाट का गठन किया जाए।
कांग्रेस चाहे जो भी प्रदर्शित करे, लेकिन इन सभी मांगों के पीछे कांग्रेस की असली मंशा राजनीतिक है। दरअसल इस बिल के पारित न होने अथवा देरी से पारित होने, इन दोनों ही स्थितियों में कांग्रेस को अपना फ़ायदा दिख रहा है।
कई महत्वपूर्ण योजनाएं पूरी होंगी
अगर यह बिल पारित हो जाता है, तो इससे सरकार को लगभग एक लाख करोड़ रूपए की अतिरिक्त आय होगी। जिससे मोदी सरकार की अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा किया जा सकता है। जिसका सारा श्रेय मोदी सरकार को मिलेगा। भले ही यह देश हित में है, लेकिन कांग्रेस पार्टी और अन्य विरोधी शायद नहीं चाहते कि यह श्रेय मोदी सरकार को मिले।

अगर जीएसटी में हुई देरी
अगर यह विधेयक देरी से पारित होता है, तो फिर 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। और जैसा कि *‘द इकोनॉमिक टाइम्स' में 30 नवंबर को छपे एक लेख के अनुसार इस विधेयक से शुरूआती 2-3 वर्षों के लिए मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी होती है (जो हाल ही में मलेशिया में देखने को मिला, जहां 1 अप्रैल 2015 में जी.एस.टी लागू होने के बाद से अब तक मुद्रास्फीति की दरों में 2.5% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है) तो कांग्रेस ऐसी स्थिति में मोदी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर चुनावी लाभ प्राप्त कर सकती है।
शुरुआती दौर में बढ़ेगी महंगाई
भले ही दीर्घकालिक तौर पर जी.एस.टी के लागू होने से जी.डीपी. में 1.5 से 2.0 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। लेकिन शुरूआती दौर में मंहगाई बढ़ने के कारण यह जनता में लोकप्रिय नहीं होता है।
‘द इकोनॉमिक टाइम्स' के अनुसार यह एक तथ्य है, कि पूरी दुनिया में जी.एस.टी लागू करने के बाद हुए चुनावों में कोई भी सरकार दुबारा नहीं चुनी गई है। इन सभी बातों के बावजदू देश हित में मोदी इस बिल को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देते हैं, जिसका पारित होना देश के विकास के लिए आवश्यक है।
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