Baghpat Seat: चरण सिंह परिवार का गढ़ रही है बागपत सीट, प्रचार में सनी देओल पर पड़े थे गोबर के उपले
Baghpat Seat: 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव का आगाज हो चुका है। सभी पार्टियां जोर-शोर से अपने प्रचार पर लगी हुई है। इस चुनावी जंग में कुछ पार्टियां और नेता मर्यादा को तार-तार तो कर ही रहे हैं, वे चुनाव जीतने के लिए सभी सीमाएं भी लांघ रहे हैं।
यहां तक कि नेताओं के साथ-साथ उनके समर्थक तो इसमें उनसे भी आगे है, जुबानी जंग के साथ-साथ वे एक-दूसरे से झगड़ा भी कर रहे हैं। लेकिन यह सब नया नहीं है, इससे पहले भी ऐसा होता आया है। तो चलिए, ऐसी ही एक लोकसभा के बारे में विस्तार से जानते है, जहां चुनाव प्रचार के दौरान अभिनेता सन्नी देओल पर गोबर के उपले फेंके गये थे।

बागपत लोक सभा सीट
पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की कर्मभूमि बागपत लोकसभा सीट में पांच विधानसभा (बागपत, बड़ौत, छपरौली, मोदीनगर व सिवालखास) सीटें आती हैं। इस लोकसभा का उदय 1967 में हुआ, इससे पूर्व (1957 व 1962 चुनावों) में यह क्षेत्र सरधना लोकसभा में आता था।
15 लाख से भी ज्यादा मतदाताओं वाली यह लोकसभा सीट हमेशा ही चर्चा में रही है, क्योंकि यह लोकसभा सीट जाट बहुल सीट है। इसके अलावा गुर्जर, त्यागी, राजपूत, मुस्लिम और दलित मतदाताओं का भी इस सीट पर प्रभाव रहता है।
1967 में निर्दलीय रघुवीर सिंह शास्त्री को मिला भारी बहुमत
1967 में बागपत लोकसभा पर 5,11,368 मतदाता थे, जिनमें से इस लोकसभा चुनाव में 63.6 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। जिनमें से 47.5 प्रतिशत वोट प्राप्त कर रघुवीर सिंह शास्त्री ने अपने प्रतिद्वंद्वी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार कृष्ण चन्द्र शर्मा को करीब 87.5 हजार के बड़े अंतर से हराया था।
1971 - कांग्रेस के रामचंद्र विकल हुए विजयी
1971 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बागपत से रामचंद्र विकल को अपना उम्मीदवार खड़ा किया। जिनके सामने पूर्व सांसद रघुवीर सिंह शास्त्री को भारतीय क्रांति दल ने अपना प्रत्याशी बनाया था। अबकी बार इस लोकसभा सीट पर 61.8 प्रतिशत मतदान हुआ। जिसमें से रामचंद्र विकल 1,70,270 (50 प्रतिशत) वोट प्राप्त कर विजयी हुए, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी रघुवीर सिंह शास्त्री को 1,22,660 (36 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए।
1977 - रालोद के साम्राज्य का उदय
1971 में मुजफ्फर नगर से हार के बाद चौधरी चरण सिंह ने 1977 लोकसभा में बागपत से चुनाव लड़ने का निर्णय किया। इमरजेंसी के बाद आए राजनीतिक भूचाल से किसान नेता चौधरी चरण सिंह का यह निर्णय बागपत की जनता को भा गया। बागपत की जनता ने इस बार चौधरी चरण सिंह को भारी बहुमत से जिताया। कांग्रेस प्रत्याशी रामचन्द्र विकल, जिन्होंने 1974 में दिल्ली-सहारनपुर वाया शामली रेलमार्ग का निर्माण भी कराया, फिर भी करीब 1.22 लाख वोटों से हार गये।
1980 - चौधरी चरण सिंह ने फिर दी विकल को पटखनी
चौधरी चरण सिंह का 1977 के लोकसभा चुनाव में मिली जीत का सिलसिला इस बार भी जारी रहा। चौधरी चरण सिंह का प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला चुनाव था। इस लोकसभा चुनाव में जहां वोटरों की संख्या बढ़कर 7,12,650 हो गई, वहीं रिकॉर्ड 70.3 प्रतिशत वोटिंग भी हुई। जिसमें से 64.4 प्रतिशत वोट चौधरी चरण सिंह (जनता पार्टी-धर्मनिरपेक्ष) व रामचंद्र विकल को 31.5 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। इस बार जीत का अंतर लगभग 1.65 लाख वोट रहा।
1984 - इंदिरा को हराने वाले भी हारे
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद संपूर्ण भारत में सहानुभूति लहर थी। जिसमें कांग्रेस को सर्वाधिक 405 सीटें भी मिली। परंतु बागपत लोकसभा सीट से फिर एक बार चौधरी चरण सिंह 52.9 फीसदी वोट लेकर विजयी हुए।
1977 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से इंदिरा गांधी को हराने वाले राजनारायण को भी बागपत से हार का मुंह देखना पड़ा। वे कुल 7 फीसदी वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहें, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी महेश चन्द को 35 फीसदी वोट मिले।
1989 - चौधरी अजीत सिंह का पदार्पण
29 मई 1987 को चौधरी चरण सिंह के देहावसान के उपरांत 1989 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे अजीत सिंह का राजनैतिक पदार्पण हुआ। इस लोकसभा चुनाव में अजीत सिंह को एकतरफा (69.2 फीसदी वोट प्राप्त कर) जीत हासिल हुई। उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी को 26.9 फीसदी वोट प्राप्त हुए। इसके उपरांत चौधरी अजीत सिंह की जीत का यह सिलसिला 1991 व 1996 लोकसभा चुनाव में भी जारी रहा।
1998 - बीजेपी ने हराया अजीत सिंह को
1997 में मायावती द्वारा बागपत को अलग जिला बनाने के उपरांत 1998 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस लोकसभा सीट से सोमपाल शास्त्री को चौधरी अजीत सिंह के विरूद्ध चुनाव में उतारा। इस बार चौधरी अजीत सिंह लगभग 44 हजार वोटों से हार गये।
1999 - अजीत सिंह ने लिया बदला
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरने के उपरांत हुए चुनाव में चौधरी अजीत सिंह ने सोमपाल शास्त्री को 1.55 लाख वोटों से हराकर हिसाब चुकता किया। इस बार अजीत सिंह को 47.5 प्रतिशत व सोमपाल शास्त्री को 27 प्रतिशत वोट मिले।
2004 - पहली बार बसपा ने दी टक्कर
2004 के लोकसभा चुनाव में जीत तो जरूरी चौधरी अजीत सिंह की हुई, परंतु इस बार उनके प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी औलाद अली रहे। अजीत सिंह ने उन्हें करीब 2.23 लाख वोटों से हराया। वहीं भाजपा के सत्यपाल मलिक को लगभग 1.02 लाख वोट (15.6 प्रतिशत) मिले।
2009 - बसपा ने फिर दी चुनौती
इस बार भी जीत चौधरी अजीत सिंह की हुई, परंतु इस बार बसपा की हार का अंतर 2.23 लाख से घटकर लगभग 53 हजार रह गया। बसपा ने मुकेश शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया था।
2014 - हैट्रिक जीत के बाद हारे अजीत सिंह
लगातार तीन बार जीतने के उपरांत चौधरी अजीत सिंह मोदी लहर में बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह से हार गये। बीजेपी व रालोद के वोटों का अंतर करीब 2.24 लाख का रहा। यहां तक कि 19.9 प्रतिशत वोट प्राप्त कर अजीत सिंह तीसरे स्थान पर रहे, दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गुलाम मौहम्मद रहे।
इस चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारक के रूप में आए सनी देओल को फतेहपुर पुट्ठी के ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा। इस दौरान उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़, विरोधी नारेबाजी व उन पर गोबर के उपले भी फेंके गये।
2019 - अजीत के बेटे जयंत मैदान में उतरे
इस बार चौधरी अजीत सिंह ने बागपत लोकसभा सीट से अपने बेटे जयंत चौधरी को चुनाव में उतारा और स्वयं ने मुजफ्फर नगर सीट से चुनाव लड़ा। परंतु दोनों सीटों से रालोद चुनाव हार गयी। जयंत चौधरी को डॉ. सत्यपाल सिंह ने करीब 23 हजार वोटों से हरा दिया।
इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में रालोद व बीजेपी का गठबंधन होने के उपरांत यह बागपत लोकसभा सीट रालोद को मिली है। अब देखना यह है कि क्या रालोद अपना यह गढ़ बचा पाती है या नहीं?
-
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Monalisa Caste: मुस्लिम मर्द से शादी करने वाली मोनालिसा की क्या है जाति? क्या कर लिया धर्म परिवर्तन? -
IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी रद्द, BCCI ने अचानक ले लिया बड़ा फैसला, मैच पर भी मंडराए संकट के बादल? -
Iran US War: ईरान ने खाक किए अमेरिकी बेस, बताया अब किसकी बारी? खौफनाक दावे से मचा हड़कंप -
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, ईरान जंग के बीच इस कंपनी ने बढ़ाई कीमतें, ये है रेट -
Energy Lockdown: एनर्जी लॉकडाउन क्या है? कब लगाया जाता है? आम पब्लिक पर कितना असर? हर सवाल का जवाब -
LPG Price Today: क्या राम नवमी पर बढ़ गए सिलेंडर के दाम? आपके शहर में आज क्या है रेट? -
Fact Check: क्या सच में देश में लगने वाला है Lockdown? क्या है वायरल दावों का सच? -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी होने लगा महंगा, गोल्ड 6000 और सिल्वर के 10,000 बढ़े भाव, अब ये है रेट












Click it and Unblock the Notifications