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Safety of Toys: क्या विदेशी खिलौने होते हैं 'खतरनाक', जानिए भारत में क्यों हो रही है इन पर कार्रवाई

भारत सरकार पहले ही बाजार में मौजूद चीनी खिलौनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। सरकारी एजेंसियों की कड़ाई से स्पष्ट है कि घटिया और असुरक्षित खिलौनों के आयात पर सरकार कोई कोताही नहीं बरतने वाली है।

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भारतीय मानक ब्यूरो यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस - BIS) ने पिछले एक महीने में 18600 विदेशी खिलौनों को जब्त किया है। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी खिलौने हैमले (Hamleys), डब्ल्यूएचस्मिथ (WH Smith) और आर्चीज (Archies Toys) जैसे अंतरराष्ट्रीय नामी-गिरामी स्टोर्स समेत अन्य जगहों से जब्त किए गए हैं। इन सभी खिलौनों को बीआईएस क्वालिटी मार्क न होने की वजह से जब्त किया गया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने ई-कॉमर्स कंपनियों को भी नोटिस जारी कर सरकार की ओर से तय नियमों के पालन करने और खराब क्वालिटी के खिलौनों की बिक्री न करने को कहा हैं।

विदेशी खिलौनों पर क्यों हो रही है कार्रवाई?
केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2021 से खिलौनों के लिए टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के तहत ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स की तरफ से तय किए गए सेफ्टी नॉर्म्स का पालन करना जरूरी कर दिया है। अगर खिलौने आयात करने वाली और बनाने वाली कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ बीआईएस एक्ट के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है। विदेश से आयातित खिलौने पर बीआईएस की ओर से दिया जाने वाला आईएसआई (ISI) मार्क जरूरी होता है, जिसके बिना इनकी बिक्री अवैध मानी जाती है।

क्या है टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर?
टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के तहत आयातित और देश में ही बनाए जा रहे खिलौनों की गुणवत्ता को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। इसके तहत विदेशी खिलौनों के साथ भारत में बनाए जा रहे खिलौनों के लिए भी बीआईएस सर्टिफिकेशन जरूरी कर दिया गया है। हालांकि, इस नियम में हस्तशिल्प और जीआई (भौगोलिक संकेतक) यानी किसी क्षेत्र विशेष से आने वाले खिलौनों को छूट मिली हुई है। टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के जरिये भारतीय बाजार में भेजे जा रहे घटिया और असुरक्षित खिलौनों पर रोक लगाई जा रही है।

क्या हैं बीआईएस के सेफ्टी नॉर्म्स?
भारत में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाए जा रहे या आयात किए जा रहे सभी खिलौनों पर बीआईएस क्वालिटी मार्क होना जरूरी है। जिनमें हर तरह के इलेक्ट्रिक खिलौनों के साथ नॉन-इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्ट टॉय भी आते हैं। बीआईएस के सेफ्टी नॉर्म्स की बात करें, तो खिलौने के मैकेनिकल, मैटेरियल, ज्वलनशीलता, केमिकल (थैलेट्स ईस्टर्स), फिंगर पेंट्स, सुरक्षा जैसे पहलुओं की जांच की जाती है। ये सभी सुरक्षा जांच अब सरकारी लैब में होती है। अगर खिलौनों की कोई खेप इस जांच में फेल हो जाती है, तो उसे वापस भेज दिया जाता है या आयातक के खर्चे पर नष्ट कर दिया जाता है।

अमेरिका जैसे अन्य देशों में नियम कहीं ज्यादा सख्त
अमेरिका जैसे देश में खिलौने का निर्माण और आयात करने के लिए नियम भारत की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त हैं। अमेरिका में 12 साल से नीचे की उम्र के बच्चे के लिए बनाए जा रहे किसी भी प्रोडक्ट (खिलौनों से लेकर कपड़ों तक) के लिए सर्टिफिकेशन जरूरी होता हैं। अमेरिका में 3 साल की उम्र से कम के बच्चों के खिलौनों और अन्य चीजों के लिए नियम सबसे सख्त हैं। इसके साथ ही 3-5 साल के बच्चों से जुड़ी चीजों के लिए भी सख्त नियम हैं। 6-12 साल के वर्ग के बच्चों से जुड़े खिलौनों और अन्य प्रोडक्ट को लेकर नियमों में थोड़ी ढील दी जाती है, क्योंकि वो खुद को संभाल सकते हैं और यूं ही किसी चीज को निगलते नहीं हैं।

अमेरिका में छोटे बच्चों के खिलौने और अन्य प्रोडक्ट्स को अलग-अलग ग्रुप में रखकर उन्हें कई तरह के संभावित खतरों से बचाने की कोशिश की जाती है। 3 साल से कम उम्र के बच्चे आमतौर पर चीजों को मुंह में डाल लेते हैं। अगर इन खिलौनों का कोई हिस्सा छोटा हो, तो उससे बच्चे का दम घुटने जैसी घटना भी हो सकती है। जिसके चलते ऐसे प्रोडक्ट्स पर सिर्फ चेतावनी देने भर से काम नहीं चलता है, बल्कि उसे प्रतिबंधित कर दिया जाता है। हर खिलौने पर जरूरत के हिसाब से चेतावनी के अलग-अलग लेबल लगाए जाते हैं।

अमेरिका में बच्चों के खिलौने और प्रोडक्ट्स में प्रतिबंधित चीजों के इस्तेमाल, ज्वलनशीलता, दम घुटने के खतरे और अन्य संभावित खतरों की जांच की जाती है। प्लास्टिक से बने खिलौनों में केमिकल्स की मात्रा 0.1 फीसदी से ज्यादा पाए जाने पर इन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाता है। वहीं, अगर कोई प्रोडक्ट बिना जांच, लेबलिंग और सर्टिफिकेशन के बिकता है, तो जब्ती के साथ मैन्युफैक्चरर्स या इंपोर्ट करने वाले पर एक लाख डॉलर का भारी जुर्माना और 5 साल तक की जेल का भी प्रावधान हैं।

टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर की जरूरत क्या है?
अमेरिका की तुलना में भारत में नियम बहुत ज्यादा सख्त नहीं थे, लेकिन बीते कुछ सालों में उन्हें सख्त किया जा रहा है। टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के तहत बिना बीआईएस क्वालिटी मार्क के न सिर्फ विदेशी, बल्कि स्वदेशी खिलौनों पर भी रोक लगाई जा रही है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक खिलौनों के साथ-साथ नॉन-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर भी अब आईएसआई मार्क होना अनिवार्य है। इसके साथ ही बीआईएस खिलौनों में गुणवत्ता बनाए रखने और चेतावनियों की लेबलिंग वगैरह की भी जांच करता है।

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