Apara Ekadashi: आर्थिक परेशानियों और बीमारियों से मुक्ति का मार्ग है अपरा एकादशी का व्रत
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

Apara Ekadashi: अपरा एकादशी की महिमा भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताई थी। उन्होंने धर्मराज से कहा था कि हे राजन! यह एकादशी दो नामों से जानी जाती है, एक अपरा एकादशी और दूसरी अचला एकादशी। यह एकादशी अपार धन देने वाली है और जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत रखते हैं, वे संसार में प्रसिद्ध हो जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि जो फल कार्तिक पूर्णिमा पर त्रिपुष्कर में स्नान करने या गंगा तट पर पितरों का पिंडदान करने से प्राप्त होता है, वही फल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है।
कहा जाता है कि मकर के सूर्य में प्रयागराज के स्नान से, शिवरात्रि का व्रत करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोमती नदी के स्नान से, कुंभ में केदारनाथ के दर्शन या बद्रीनाथ के दर्शन, सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र के स्नान से, स्वर्णदान करने से या अर्ध प्रसूता गौदान से जो फल मिलता है, वही फल अपरा एकादशी व्रत से मिलता है।
अपरा एकादशी का धार्मिक व पौराणिक महत्व
ऐसा माना जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप धुल जाते हैं, साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं तो एकादशी के दिन विष्णु जी के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें, ऐसा करने से आप आर्थिक तौर पर संपन्न होते हैं। साथ ही एकादशी का व्रत रखने से शरीर रोग मुक्त भी रहता है। इस व्रत में शंख, चक्र और गदाधारी भगवान विष्णु के स्वरूप की पूजा की जाती है।
जीवन में तरक्की और मोक्ष का मार्ग
अपरा एकादशी व्रत से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं जल्द पूर्ण होती हैं। साथ ही सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। वैसे तो प्रत्येक एकादशी का अपना महत्व होता है लेकिन अपरा एकादशी विशेष रूप से शुभ और लाभकारी मानी जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली एकादशी तिथि को अपरा एकादशी कहा जाता है। भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए समर्पित अपरा एकादशी का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से वह जल्दी प्रसन्न होते है। जो भी यह व्रत रखता है उसको जीवन में अपार तरक्की मिलती है, साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। हिंदी में 'अपार' शब्द का अर्थ 'असीमित' है, क्योंकि इस व्रत को करने से व्यक्ति को असीमित धन की भी प्राप्ति होती है, इस कारण से ही इस एकादशी को 'अपरा एकादशी' कहा जाता है। इस एकादशी का एक और अर्थ यह है कि यह अपने उपासक को असीमित लाभ देती है। अपरा एकादशी का महत्व 'ब्रह्म पुराण' में बताया गया है।
दिनभर करें भगवान विष्णु की आराधना
व्रत के दिन तामसिक आहार और बुरे विचार से दूर रहें। बिना भगवान कृष्ण की उपासना के दिन की शुरुआत न करें। मन को ज्यादा से ज्यादा ईश्वर भक्ति में लगाए रखें। एकादशी के दिन चावल और जड़ों में उगने वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए।
शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 15 मई को सुबह 2:46 मिनट हो रही है। अगले दिन ये तिथि 16 मई को सुबह1:03 मिनट पर समाप्त होगी। 15 मई को उदया तिथि होने से सोमवार को ही अपरा एकादशी व्रत रखा जाएगा।
असीमित लाभ और तरक्की देता है व्रत
अपरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और विधि-विधान से श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पंडित अनीष व्यास के अनुसार वैसे तो प्रत्येक एकादशी का अपना महत्व होता है लेकिन अपरा एकादशी विशेष रूप से शुभ और लाभकारी मानी जाती है। पंडित नारायण दत्त दवे के अनुसार अपरा एकादशी का महत्व ब्रह्म पुराण में बताया गया है। माना जाता है कि जो भी यह व्रत रखता है, उसको जीवन में अपार तरक्की मिलती है, साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इस एकादशी का एक और अर्थ यह है कि यह अपने उपासक को असीमित लाभ देती है।
पूरे देश में मनाई जाती है
अपरा एकादशी पूरे देश में मनाई जाती है। इसे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हरियाणा राज्य में अपरा एकादशी को भद्रकाली एकादशी के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देवी भद्रा काली की पूजा करना शुभ माना जाता है। उड़ीसा में इसे जलक्रीड़ा एकादशी के रूप में जाना जाता है और भगवान जगन्नाथ के सम्मान में मनाया जाता है।












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