हवाला कारोबार को खत्‍म करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन

बेंगलुरु। 'डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है,' डॉन का यह डायलॉग भारत में फैले हवाला करोबार पर शायद सबसे फिट बैठता है। हमारी पिछली कुछ खास रिपोर्ट्स में आपने हवाला से जुड़े हर पहलू के बारे में जाना। इस आखिरी सिरीज में जानिए कि आखिर क्‍यों हवाला के कारोबार को देश से पूरी तरह से खत्‍म करना एक ऐसा मिशन है जो पूरी तरह से इंपॉसिबल है।

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बेंगलुरु स्थित देश और दुनिया के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्‍थानों में से एक आईआईएम के प्रोफेसर आर वैद्यनाथन, जो यहां पर फाइनेंस के प्रोफेसर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्‍होंने वन इंडिया के साथ हुई एक खास बातचीत में हवाला के बारे में यह बात कही।

प्रोफेसर वैद्यनाथन ने काले धन पर कई पेपर्स तैयार किए हैं। उन्‍होंने बातचीत में बताया कि भारत को इस पूरे मुद्दे को किस तरह से डील करना चाहिए। साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि इस समस्‍या को देश से खत्‍म करना नामुमकिन है।

'बहुत ही गंभीर है हवाला की समस्‍या '

प्रोफेसर वैद्यनाथन की मानें तो हवाला देश के लिए एक बहुत ही गंभीर समस्‍या बन चुकी है। उन्‍होंने कहा, 'हवाला ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर खासा प्रभाव डाला है। अब इसे कम कर पाना या इस पर किसी भी तरह से लगाम लगा पाना काफी मुश्किल है।' हालांकि उन्‍होंने यह बात भी कही कि किसी को भी अपने दिमाग से यह बात पूरी तरह से निकाल देनी चाहिए कि हवाला कारोबार सिर्फ अपराध या फिर आतंकवाद से ही जुड़ा है।

ईमेल की ही तरह है हवाला कारोबार

प्रोफेसर वैद्यनाथन के मुताबिक जिस समय हवाला का ट्रांजैक्‍शन होता है, उसे किसी भी तरह से रिकॉर्ड कर पाना या उस पर नजर रख पाने के लिए कोई भी जरिया नहीं है। उन्‍होंने कहा कि इससे जुड़ी रकम को जमा तो एक देश की बैंक में किया जाता है लेकिन इसके साथ ही भारत में मौजूद एजेंट्स को इससे जुड़ा कोड बता दिया जाता है।

वह कहते हैं, 'हवाला की रकम कभी भी किसी वायर ट्रांसफर से होकर नहीं गुजरती है। इसे सिर्फ एक एजेंट के तहत इससे संबंधित व्‍यक्ति को सौंपा जाता है। यह बिल्‍कुल उसी तरह से है जिस तरह से आतंकवादी अपना ईमेल अकाउंट ऑपरेट करते है।'

उन्‍होंने बताया कि आतंकी अपना ईमेल अकाउंट तो बना लेते हैं लेकिन वह इसका प्रयोग सिर्फ जानकारियों को सहेजने के लिए ही करते हैं। इस ईमेल का पासवर्ड दूसरे व्‍यक्ति के साथ साझा किया जाता है। वह व्‍यक्ति ड्राफ्ट में सेव किए गए मेल को पढ़ लेता है और उसे जानकारी मिल जाती है। ऐसे में कोई भी जानकारी पास नहीं होती है और फिर उसका पता लगा पाना भी काफी मुश्किल हो जाता है।

आतंकवाद ने बनाया हवाला को समस्‍या

प्रोफेसर वैद्यनाथन ने कहा कि हवाला देश में एक बड़ी समस्‍या उस समय से बन गया है जब से आतंकवादी और अपराधी इसका प्रयोग करने लगे हैं। वह कहते हैं, 'दिन पर दिन यह समस्‍या और विकराल होती जा रही है। यह बहुत ही आकर्षित करने वाला व्‍यवसाय है और इसमें कई बेरोजगार युवक खासतौर पर सक्रिय हैं। वह इसके साथ बतौर हवाला ऑपरेटिव्‍स जुड़ते जा रहे हैं।

इन युवा ऑपरेटिव्‍स को न सिर्फ अच्‍छी सैलेरी दी जा रही है बल्कि इंश्‍योरेंस जैसे भत्‍ते भी दिए जाने लगे हैं।

केरल ने बढ़ाई मुश्किलें

प्रोफेसर वैद्यनाथन की मानें तो अब इस समस्‍या को खत्‍म करना काफी मुश्किल है। उन्‍होंने कहा कि यह समस्‍या केरल में सबसे ज्‍यादा बड़ी है। केरल के आधे नागरिक मिडिल ईस्‍ट में रहते हैं और लगभग सारे लोग हवाला से आने वाली रकम पर ही निर्भर रहते हैं ताकि वह अपने घर में पैसे भेज सकें। यहां पर ट्रांजैक्‍शन की तीव्रता ने इस समस्‍या को और भी गंभीर और नासूर की तरह बना डाला है।

हवाला पर लोगों का विश्‍वास

हालांकि प्रोफेसर वैद्यनाथन मानते हैं कि समस्‍या के गंभीर होने के बाद भी सरकार ने इसे सुलझाने के लिए सही कदम उठाया। सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि अब इसके जरिए भेजी जाने वाली रकम पर कुछ लगाम लग सकी है। उन्‍होंने जानकारी दी कि सिर्फ पांच प्रतिशत जनसंख्‍या ही वैध तरीकों का प्रयोग कर विदेशों में पैसे भेजती है।

पैसे भेजने के जो बाकी तरीके हैं वह काफी महंगे हैं और ऐसे में सिर्फ हवाला ही लोगों को सस्‍ते विकल्‍प के तौर पर नजर आता है। साथ ही साथ लोग इसके जरिए पैसे भेजने के तरीके को काफी विश्‍वसनीय मानते हैं।

प्‍लास्टिक मनी बेहतर विकल्‍प

प्रोफेसर वैद्यनाथन ने इस कारोबार पर लगाम के लिए जो सुझाव दिए हैं उनमें सबसे है कैश की एक लिमिट तय करना। उन्‍होंने कहा है कि कोई भी व्‍यक्ति हो, उसके पास सिर्फ 20 लाख रुपए ही बतौर कैश होने चाहिए। अगर कैश की लिमिट तय हो जाएगी तो 20 लाख से ज्‍यादा की रकम को काले धन में गिना जाएगा।

बंद हों 500, 1,000 रुपए के नोट

प्रोफेसर वैद्यनाथन की मानें तो प्‍लास्टिम मनी के साथ ही बैंक के जरिए होने वाले ट्रांजैक्‍शंस में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को शामिल करना हवाला का सही जवाब है। वह इस बात को महसूस करते हैं कि 500 और 1,000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि देश में सिर्फ 100 रुपए के नोटों को ही प्रचलन में लाया जाना चाहिए। इसकी वजह से कैश ट्रांजैक्‍शन पर लगाम लगेगी।

हालांकि वह यह भी मानते हैं कि इन सब कामों के लिए सरकार की महत्‍वाकांक्षा की जरूरत है।

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