तो सेल्फी खिंचना मानसिक विकार की निशानी है?
नई दिल्ली। जब से स्मार्टफोन मार्कट में आया है तब से ही लोगों के अंदर सेल्फी खिंचने का शौक बढ़ गया है, आजकल लोगों के अंदर सेल्फी खींचना आदत में शुमार हो गया है। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या जवान, सभी इसकी आदत से ग्रसित हैं।
लोगों की इस बढ़ती आदत को पर अमरीका के प्रतिष्ठित अमरीकन साइकाईट्रिस्ट एसोसिएशन (एपीए) ने एक बड़ा अजीब सा बयान दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि सेल्फी लेना मानसिक रोगी होने की निशानी है, एसो ने इस बीमारी का नाम रखा है 'सेल्फिटिश'। .यही नहीं शोधकर्ताओं ने इस बीमारी की हर स्टेज को बकायदा काफी व्याखित भी किया है। हालांकि बाद में यह खबर अफवाह साबित हुई।
लड़कियों में बढ़ रहा है 'सेल्फी' शौक का नशा, खाने-कपड़े से ज्यादा तस्वीरों से प्रेम
लेकिन इस खबर ने लोगों के बीच में बहस छेड़ दी है, कई मनोरोगी केन्द्र में इस बात पर डिबेट हो रही है कि क्या खुद की तस्वीरें खींचना एक बीमारी नहीं हैं? आखिर बार-बार अपनी सुंदरता और काया की तारीफ सुनना एक मनोरोग नहीं है? फिलहाल इस पर बहस जारी है लेकिन इसमें किसी को शक नहीं कि आजकल लोगों का ज्यादा वक्त स्मार्टफोन पर गुजरता है जिसमें सेल्फी खींचना एक बहुत बड़ा और अहम कारण है।













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